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भारत आए ईरानी विदेश मंत्री बोले- जनरल सुलेमानी को मारना अमेरिका का घमंड दिखाता है, उनकी मौत पर भारत के 430 शहरों में प्रदर्शन हुए

Last updated: January 15, 2020 4:31 pm
Surabhi Saloni
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9 Min Read
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नई दिल्ली: ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ बुधवार को दिल्ली में रायसीना डायलॉग में शामिल हुए। उन्होंने कहा, “जनरल कासिम सुलेमानी को मारना अमेरिका का घमंड और बेवकूफी दिखाता है। उनकी मौत पर 4 देशों में लोग सड़कों पर उतरे। इसके अलावा भारत में भी 430 शहरों में प्रदर्शन हुए। इसलिए अमेरिका को अब क्षेत्र में अपनी रणनीति बदलने की जरूरत है।”

इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “मुझे लगता है कि आने वाले समय में भारत की भूमिका एक स्थिरता फैलानी वाली ताकत के तौर पर होगी। भारत आतंक के खिलाफ सख्ती से निपट रहा है, लेकिन कई मामलों में हम पुरानी छवि में कैद हो कर रह गए थे। हम बोलते ज्यादा थे और काम कम करते थे। हालांकि, अब हम उस छवि को तोड़ने की कोशिश में हैं। अब हमें दूर से खड़े होकर देखने वालों की जगह निर्णय लेने वाली ताकत बनना होगा।”

अमेरिका हमारे क्षेत्र को अपने नजरिए से देख रहा, यह उसकी गलती: जरीफ
जरीफ ने कहा, ‘‘पिछले कुछ हफ्तों में जो भी हुआ, वह दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद है। यह अमेरिका से जुड़ी उस बड़ी समस्या को उठाता है कि वह पश्चिमी एशिया को सिर्फ अपने नजरिए से देखता है, न कि क्षेत्र में रहने वाली जनता के नजरिए से। जनरल सुलेमानी के लिए ईरान की सड़कों पर 90 लाख लोग प्रदर्शन के लिए उतरे थे। कोई सरकार कभी इतने लोगों को सड़कों पर प्रदर्शन के लिए नहीं ला सकती। इसके अलावा इराक और रूस में भी उनकी याद में लोग सड़कों पर उतर आए। इसलिए अब अमेरिका को क्षेत्र के बारे में ठीक से सोचने की जरूरत है। वे बड़ी गलती कर रहे हैं।’’

‘‘अभी सुलेमानी की मौत का जश्न कौन मना रहा है? राष्ट्रपति ट्रम्प, पोम्पियो और आईएस आतंकी। साफ है कि कौन-कौन साथी हैं। अमेरिका अब तालिबान के साथ समझौता कर रहा है, ताकि खुद अफगानिस्तान से बाहर निकल सके। उसने इराक के साथ जो किया, अपनी मर्जी से किया, लेकिन इराक का इस्तेमाल कर इराक के ही आधिकारिक मेहमान पर हमला एक भड़काने वाला कदम था, इसलिए ईरान ने आत्मरक्षा में हमला किया।’’

अमेरिका खुद अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़ता है, फिर इसकी दुहाई देता है

‘‘अमेरिका ने आरोप लगाया था कि जनरल सुलेमानी अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश रच रहे थे, लेकिन अब साफ है कि वे ऐसी किसी साजिश में शामिल नहीं रहे। अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों की बात ही इसलिए करता है, ताकि वह इन नियमों को तोड़ सके। ट्रम्प कह चुके हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं मानते। उनके विदेश मंत्री पोम्पियो कहते हैं कि अगर ईरान चाहता है कि उसके लोगों को खाना मिले, तो उसे अमेरिका की सुननी होगी। यह युद्ध अपराध की तरह है।’’

‘अमेरिका खुद अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़ता है, फिर दुहाई देता है’
जरीफ के मुताबिक, ‘‘अमेरिका ने आरोप लगाया था कि सुलेमानी अमेरिकी दूतावास पर हमले की साजिश रच रहा था, लेकिन अब साफ है कि जनरल सुलेमानी ऐसी किसी साजिश में शामिल नहीं रहे। अमेरिका खुद अंतरराष्ट्रीय नियम तोड़ता है और फिर अंतरराष्ट्रीय कानून की दुहाई देता है। अमेरिकी राष्ट्रपति तक कहते हैं कि वह अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं मानते। उनके विदेश मंत्री पोम्पियो कहते हैं कि अगर ईरान चाहता है कि उसके लोगों को खाना मिले, तो उसे अमेरिका की सुननी होगी। यह युद्ध अपराध की तरह है।’’

‘‘हमें आईएस के खिलाफ नए गठबंधन की जरूरत है। हमें पता है कि आईएस कहां खड़ा था, अब हमें यह भी पता है कि अमेरिका कहां है। हम सिर्फ राजनीति में भरोसा करते हैं। अमेरिका के साथ समझौता करने में हमारी रुचि नहीं है। उसने परमाणु समझौते के अपने वादे नहीं निभाए। हमारी अमेरिका के साथ डील थी, लेकिन उन्होंने डील को तोड़ दिया। अब अगर हम ट्रम्प से सौदा करते हैं, तो सबको पता है कि यह कितना लंबा चलेगा।’’

सुबह एनएसए अजीत डोभाल से मिले थे जवाद जरीफ

ईरान की विशेष सेना ‘कुद्स फोर्स’ के कमांडर जनरल सुलेमानी की अमेरिका ने 3 जनवरी को इराक के बगदाद एयरपोर्ट पर ड्रोन हमले में हत्या कर दी थी। इसके बाद से ही अमेरिका-ईरान के बीच तनाव जारी है। जनरल सुलेमानी की मौत के बाद यह पहला मौका है, जब ईरान का कोई नेता विदेश दौरे पर निकला है। जवाद जरीफ बुधवार सुबह ही एनएसए अजीत डोभाल से मिले हैं।

जयशंकर बोले- भारत दुनिया के लिए भलाई करने वाला देश

जयशंकर ने आगे कहा,  “दुनिया में पहले ही तनाव और अशांति फैलाने वाली ताकतें हैं। किसी को इनसे निपटना होगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गड़बड़ी फैलाना और स्वार्थी-व्यापारी की तरह व्यवहार करना भारत का तरीका नहीं। भारत एक ऐसा देश है, जो आगे दुनिया की भलाई के लिए अपनी क्षमताओं को इस्तेमाल में लाएगा। जरूरी है कि हम वैश्विक, कानून को मानने वाले और सलाह मशविरे से फैसला करने वाले देश की छवि बनाएं। दुनिया को सुरक्षा देना, आतंकवाद जैसी चुनौतियों का निपटारा करना, यह भारत का तरीका है। भारत वह देश है जिसकी अपनी संस्कृति है, जो जलवायु परिवर्तन जैसे अहम मुद्दों पर आगे दुनिया का ध्यान आकर्षित करेगा।”

पड़ोसियों में आपसी मामलों की समझ जरूरी: जयशंकर
चीन से रिश्तों पर विदेश मंत्री ने कहा, “यह अहम है कि दो पड़ोसी कुछ अहम मामलों पर समझ विकसित करें। न ही भारत और न ही चीन दोनों देशों के रिश्तों को खराब करेंगे। हमारे रिश्ते अनोखे हैं। यह जरूरी है कि दो देश आगे बढ़ने के साथ रिश्तों में संतुलन भी हासिल करें।

ईरान-अमेरिका तनाव पर क्या राय?
जयशंकर ने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव पर भी राय रखी। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान दो स्वायत्त देश हैं, इसलिए किसी भी फैसले पर उनका अधिकार है। आखिर में वही होगा, जो दोनों देश चाहेंगे।

रूसी विदेश मंत्री ने सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया

रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने बुधवार को दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित रायसीना डायलॉग में दोनों देशों के करीबी रिश्तों पर चर्चा की। लावरोव ने कहा कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करते हैं। हमें लगता है कि भारत को इस समूह का हिस्सा होना ही चाहिए।

रूसी विदेश मंत्री ने कहा- “अमेरिका, जापान और बाकी देशों की तरफ से आगे बढ़ाई जा रही हिंद-प्रशांत क्षेत्र की धारणा पहले से मौजूद स्थायी ढांचों को बदलने की कोशिश है।” लावरोव ने चीन का पक्ष लेते हुए कहा कि किसी न्यायसंगत लोकतांत्रिक व्यवस्था को ताकत के दम पर प्रभावित करने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।

‘किसी को घेरने की कोशिश ठीक नहीं’

उन्होंने पूछा- “हिंद-प्रशांत और एशिया प्रशांत बनाने की क्या जरूरत है? जवाब साफ है आप चीन को अलग करना चाहते हैं। जबकि हमारा काम लोगों को जोड़ने का होना चाहिए, न कि बांटने का। हम इस मामले में भारत की नीति का समर्थन करते हैं- जिसका आधार ही यह है कि किसी को घेरने या दबाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन (एससीओ) और ब्रिक्स दोनों ही अलग-अलग क्षेत्र में मौजूद देशों को जोड़ने वाले समूह हैं।”

क्या है रायसीना डायलॉग?
रायसीना डायलॉग पहली बार 2015 में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन थिंक टैंक ने भारतीय विदेश मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया था। हर साल इसमें अलग-अलग देशों के प्रमुख और विदेश मंत्री पहुंचते हैं। इस साल 17 देशों के मंत्री और विदेश नीति के जानकार कार्यक्रम में पहुंचे हैं। इनमें ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ, श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अन्य नेता पहुंचे हैं।

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