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अयोध्या में छायी उदासी युवराज राम का हुआ वनवास

Last updated: October 10, 2025 5:34 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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Highlights
  • हरिपुर अभिया में रामलीला का तीसरा दिन
  • राम, सीता, कौशल्या, उर्मिला, मंथरा, केवट और कैकई के संवाद ने दर्शकों का मोहामन

भदोही (उ.प्र.)। आदर्श रामलीला समिति हरीपुर अभिया की तरफ से मंचित रामलीला में गुरुवार को राम वनगमन का मंचन किया गया। इस दौरान रामलीला का आंनद उठाने के लिए भारी संख्या में दर्शकों मौजूद रहे। अयोध्या के महाराज दशरथ चौथापन आने के बाद राज्य का कार्यभार किसे सौंपा जाय इस राय के लिए
मंत्री सुमंत के साथ गुरु वशिष्ट के पास गए। गुरु वशिष्ठ ने उन्हें युवराज राम को अयोध्या का राजा बनाने का निर्देश दिया। गुरु के आदेश पर महाराज दशरथ ने सुमंत को सारी तैयारियां पूरी करने का आदेश दिया। इधर यह खबर दासी मंथरा को जब पता चली तो महारानी कैकई के पास पहुंचकर सारा राज खोल दिया। मंथरा की बात सुनकर महारानी कैकेई महाराज दशरथ के प्रति उद्वेलित कर दिया। मंथरा ने कहा कि भरत के होते राम कैसे युवराज बन सकता है। महारानी कैकई तो पहले उसकी बातों में नहीं आई, लेकिन बाद में उनकी मतिमारी गई और वह राम को बनवास और भरत की राजगद्दी के लिए तैयार हो गई।
मंथरा ने कहा कि देवासुर संग्राम में जो आपने महाराज के वचन को थाती ज स्वरूप रखा है अब वक्त है उसे मांग लीजिए। इधर जब यह मंगल सूचना लेकर महाराज दशरथ राजमहल पहुँचे तो वह कोपभवन में बैठी मिली। कैकई की बात जानकर महाराज दशरथ व्याकुल हो उठे। महारानी कैकई को महाराज ने बहुत समझाने का प्रयास किया लेकिन वह तैयार न हुईं। राम को वनवास और भरत को राजगद्दी पर अडि रहती है। अंततः अयोध्या का राजा बनने के श्रीराम वनवासी हो जाते हैं।
बनवास के दौरान वलकल वस्त्र धारण कर वनवास के लिए चल देते हैं। अयोध्या के पूवरासी उन्हें बहुत मनाते हैं, लेकिन वह नहीं मानते। मंत्री सुमंत भी उनसे आग्रह करते हैं और सीता को लौटाने की जिद करते हैं लेकिन श्रीराम और सीता बन जाने को अडिग रहते हैं। उधर निषाद राज केवट उन्हें गंगा पार करता है और प्रभु अंगूठी प्रदान करती हैं लेकिन केवट नहीं लेता है। यहीं पर रामलीला का समापन होता है। महाराज श्रीराम, दशरथ, कैकई कैकई, मंथरा, उर्मिला, केवट संवाद दर्शकों का मनमोहन लेता है।

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