विकास धाकड़/विलेपार्ले (मुंबई)। आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री राकेशकुमारीजी आदि ठाणा 4 के पावन सानिध्य में विलेपार्ले गोंयल भवन में तेयुप के तत्वावधान में आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का 17वां महाप्रयाण दिवस मनाया गया। तेरापंथ महिला मंडल के मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
साध्वी श्री राकेश कुमारीजी ने प्रेक्षाप्रणेता आचार्यजी महाप्रज्ञजी को श्रद्धासुमन अर्घ्य चढ़ाते हुए सामूहिक गीत प्रस्तुत करते हुए कहा- अतीन्दिय ज्ञान के धनी युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञजी की यशोमय यश कीर्ती गौरव गाथा सौरभ विश्व को सुरभित करती रहेगी। सदिया-२ यश कीर्ती की पताकाए फहराती रहेगी और यशोगाथाएं ब्रह्माण्ड में अनुगुंजित होती रहेगी। साध्वी श्री ने आगे कहा-आज उनका पार्थिव शरीर हमारे बीच नहीं है पर ज्ञानशरीर, यशशरीर अनुभव शरीर आज भी जीवित है। आप एक सिद्ध पुरुष थे। अपने उदात्त व्यक्तित्व, यशस्वी कर्तृत्व तथा साधना की तेजस्विता की स्याही विश्व के भाल पर जो आलेख लिखे उन पर समग्र विश्व को गौरव व गर्व की अनुभूति होती है और ज्ञान की रश्मीया से सम्पूर्ण विश्व लाभान्वित हो रहा है।
साध्वी श्री मलयाविभाजी ने जीवन के मधुर संस्मरणों को उजागर करते हुए आचार्य महाप्रज्ञ अहिंसा के जीवंत पर्याय थे। भीतर में करुणा का दरिया छलकता था। साध्वी श्री ने आचार्य महाप्रज्ञजी के अनेक प्रसंगों पर प्रकाश डालते हुए कहा- वे विश्व की अनमोल धरोहर थे। देश के महान दार्शनिक वैज्ञानिक व अध्यात्म के भाष्यकार थे। साध्वी चेतस्वी प्रभाजी ने मधुर गीत की प्रस्तुति दी।
तेयुप अध्यक्ष महेन्द्र जी नें आचार्यश्री को विश्व के महान प्रभावशाली आचार्य बताते हुए सद्धासुमन अर्पित किए। साध्वी विपुलयशाजी ने कुशलता से मंच का संचालन करते हुए अपने भावों को प्रकट किया। बांद्रा आदि चौखले के श्रद्धालु श्रावक भी उपस्थित थे।
अतींद्रिय ज्ञान के धनी आचार्य श्री महाप्रज्ञजी का 17 वां महाप्रयाण दिवस का सुंदर आयोजन मनाया

