संकट के समय धर्म ही त्राण है, शरण हैः शासन श्री साध्वीश्री रतनश्रीजी (लाडनूं)

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नवरंगपुरा, अहमदाबाद। शासन श्री साध्वीश्री रतनश्रीजी (लाडनूं) अपनी सहवर्तिनी साध्वियां शासन श्री रामवतीजी, हिम श्रीजी मुक्तियशा जी एवं चैतन्ययशाजी के साथ श्रद्धाशील श्रावक बाबूलाल जी सेखानी के विशाल प्रांगण से अनुशासन रेली प्रारंभ हुई जोकि अनेक क्षेत्रों से गुजरती हुई अणुव्रत घोष जयनारों, सुमधुर गीतों के साथ लगभग 2 किलोमीटर तक सुव्यवस्थित चली अनुशासन रैली सुवास सोसायटी के नवरंगपुरा क्षेत्र में पहली बार चतुर्मास करने हेतु पदार्पण हुआ । श्रावक श्राविकाओं का अतिज्यादा उत्साह देखकर लग रहा था वास्तव में गुरु भक्ति, संघ भक्ति बेजोड़ है। साध्वी रतनश्री जी ने मंगल उद्बोधन में कहा – भारतीय संस्कृति त्याग व धर्मप्रधान संस्कृति रही है । साधु-संतों के आगमन का एक विशेष उद्देश्य है धर्म जागरण । क्योंकि चातुर्मास में 4 महीने तक विशेष खुराक प्राप्त होती है । धार्मिक चेतना को जागृत करने में साधु-संतों का अपना विशेष महत्व होता है।
आप ने आगे कहा – आज की संस्कृति भौतिकता की ओर दौड़ रही है । भौतिक विकास को ही अपना श्रेय और प्रेय समझती है । लेकिन मनुष्य को धर्म की अपेक्षा तब होती है जब वह विपत्ति, संकट या दुख में घिर जाता है । उस समय धर्म ही त्राण है, शरण है ।  किसी भी धर्मस्थान में हम जाएं, चार बातों का ध्यान अवश्य रखें 1. सम्यक दृष्टि रखे 2. जीवन चर्या शुद्ध हो 3. आजीविका शुद्ध हो 4. व्यसन मुक्त हो । तभी चातुर्मास की सार्थकता है। कार्यक्रम नवरंगपुरा क्षेत्र की युवतियों द्वारा मंगल गीत से प्रारंभ हुआ।
इसी क्रम में शासन श्री साध्वी श्री रामावतीजी ने वक्तव्य में कहा – बसंत आता है तो प्रकृति मुस्कुराती है, संत आते हैं तो संस्कृति मुस्कुराती है, दोनों का योग मिलता है तो तप और जप में चार चांद लग जाते हैं ।आवश्यकता है अप्रमत्ता की साधना करें। प्रवेश पर साध्वी हिमश्रीजी मुक्तियशाजी एवं चैतन्ययशाजी द्वारा करणीय कार्यों की प्रस्तुति सुमधुर गीत “गुरु आज्ञा ने सिर धार, पावस करने आया हां,  सोयेडां ने मेह आज जगाणआया हां” जोश भरी प्रस्तुति देते हुए कहा क्या-क्या करना है, श्रावकों सोच लो।
प्रोग्राम में महासभा के सदस्य – नानालालजी कोठारी, पश्चिम सभा के अध्यक्ष लूणकरणजी सांड, अहमदाबाद सभा के अध्यक्ष – नरेंद्र जी सुराणा, प्रेक्षा विश्व भारती कोबा के अध्यक्ष- राजीव जी छाजेड़,  अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद उपाध्यक्ष – मुकेश जी गुगलिया,  अणुव्रत समिति के अध्यक्ष विमल जी बोरदिया आदि ने अपने भावों की प्रस्तुति देते हुए कहा – ज्ञान दर्शन चरित्र के रत्न लेकर साध्वी रतनश्रीजी पश्चिम क्षेत्र में बांटने आए हैं, कितना कौन प्राप्त करता है यह स्वयं की जागरूकता है।
इसी क्रम में पश्चिम सभा के पूर्व अध्यक्ष अनुज जी सेखानी ने सभी साध्वी वृंद का परिचय देते हुए मंगल कामना व्यक्त की। पावस के प्रसंग पर डॉक्टर धवल दोषी,  तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष – बी एम जैन, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष राजेशजी चोपड़ा, महिला मंडल की अध्यक्षा रेखा जी कोठारी, कांकरिया सभा के अध्यक्ष रायचंद जी लुनिया आदि ने अपनी भावना व्यक्त करते हुए कहा साध्वी श्री जी शांत स्वभाव एवं करुणा शील है लेकिन साध्वियों का आपस में जो तालमेल है वह बहुत उल्लेखनीय है।  महिला मंडल की सक्रिय कार्यकर्ता चांद भाई छाजेड़ ने अपनी मारवाड़ी भाषा में साध्वी वृंद का चातुर्मास प्रवेश पर स्वागत किया। सभा के मंत्री दिनेश जी नौलखा ने चातुर्मास प्रवेश पर प्रोग्राम का संचालन करते हुए कहा-  हम श्रद्धा भक्ति के भावों से आज आपको बघातें हैं।आभार ज्ञापन सभा के सह मंत्री संजय जी पारख ने किया।
रिपोर्ट : सरला भंसाली

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