आधुनिक तकनीक ने पत्रकारिता के स्वरूप को बदला: कृपलानी

  • साहित्य के बिना पत्रकारिता की बात अधूरी: सक्सेना
  • “क्योंकि पत्रकारिता समाज को जगाता है और साहित्य समाज को जोड़ता है इसी मिशन को लेकर राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष “अनिल सक्सेना” यह अनूठा आयोजन हर उपखंड स्तर पर चला रहे हैं!” – डॉ शोकीन वर्मा, “सामाजिक न्याय का पक्षधर”
  • “राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम की परिचर्चा” सामाजिक ताने-बाने में पत्रकारिता और साहित्य की भूमिका”

निम्बाहेड़ा। वर्तमान समाज पत्रकारिता के नये युग में जी रहा है। तकनीक ने पत्रकारिता के पंरपरागत स्वरूप को व्यापक रूप में बदला है। आज की पत्रकारिता अखबार, पत्रिका, रेडियो और टेलीविजन की पत्रकारिता तक ही सीमित नही रह गई है बल्कि नई मीडिया का मतलब वेब पत्रकारिता से है।
यह बात राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के द्वारा रविवार को श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय में सात दिवंगत पत्रकारों की स्मृति में आयोजित परिचर्चा में मुख्य अतिथि ने पूर्व स्वायत्त शासन मंत्री श्रीचंद कृपलानी ने कही ।
राजस्थान मीडिया एक्शन फोरम के संस्थापक अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार अनिल सक्सेना ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि साहित्य के बिना पत्रकारिता की बात और पत्रकारिता के बिना साहित्य का जिक्र करना ही व्यर्थ है । पत्रकारिता की शुरूआत ही समाजहित का भाव लेकर चली है और साहित्य का भी यह भाव रहा है । इसलिए यह दोनो हमेशा साथ-साथ चले है। आजादी से पहले पत्रकारिता और साहित्य का एक ही उद्देश्य पराधीनता से मुक्ति था।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि निम्बाहेड़ा नगर पालिका अध्यक्ष सुभाष शारदा ने कहा कि फोरम के द्वारा दिवंगत पत्रकारों की स्मृति में कार्यक्रम करना अपने आप में महत्वपूर्ण है और समाज में इसका एक सकारात्मक संदेश जा रहा है। विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक अशोक नवलखा ने कहा कि मीडिया आज समाज की एक बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है। साहित्य, समाज एवं मीडिया की कड़ी मानवीय मूल्य है।
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार डाॅ.जे.एम.जैन ने दिवंगत पत्रकार गिरधारी लाल जीनगर, कनकमल जैन, हरिप्रकाश शारदा, जगदीश आचार्य, सुरेश झंवर , महेश कुमावत और जय अग्रवाल के पत्रकारिता जीवन पर प्रकाश डाला । जैन ने कहा कि समाज में पत्रकारिता के मायने व्यवसायिक हो गये हैं। पत्रकारों को जीवन में बहुत संघर्ष करना पड़ रहा है और सरकार की ओर से ठोस मदद नही मिल रही है जबकी पत्रकार का कोई तय कार्यकाल नही होता, वो जीवन भर पत्रकारिता करता रहता है।
श्री कल्लाजी वैदिक विश्वविद्यालय के चैयरमेन कैलाशचन्द्र मून्दड़ा ने आध्यात्मिक का महत्व बताते हुये पत्रकारिता और साहित्य पर अपने विचार व्यक्त किये। सामाजिक ताने-बाने पर साहित्य और पत्रकारिता का प्रभाव विषय पर डाॅ.कमल नाहर,डाॅ.रविन्द्र उपाध्याय, पंकज झा, नरेश मेनारिया, दिलीप कोठारी आदि ने अपने विचार व्यक्त किये। एस.एस. अग्रवाल, अमित चेचाणी, रविंद्र सिंह कोठारी, तेजकरण राठौड़, डाॅ. शोकिन वर्मा, हेमन्त सालवी, खुर्शिद ऐजाजी, मदन नाथ सोनीगरा, अमित खंडेलवाल,एडवोकेट कुसुमलता भटनागर आादि ने अपने मंचासिन अतिथियों का स्वागत किया ।
कार्यक्रम का शुभारम्भ अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्वलन से किया गया । फोरम के द्वारा दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को शाॅल ओढाकर और मोमेन्टो भेंट कर सम्मानित किया गया।
फोरम के सचिव गिरिश पालीवाल ने फोरम के कार्यो की जानकारी देते हुए प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा में हो रहे कार्यक्रम के बारे में बताया । संदीप माली ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के पत्र का वाचन किया । कार्यक्रम का संचालन प्रियंका सोमानी ने किया । चित्तौड़गढ़ जिला अध्यक्ष मनोज सोनी ने आभार प्रकट किया । आयोजन में दिवंगत पत्रकारों के परिजन संतोष जैन, गीता देवी शारदा, पार्षद एकता सोनी, मोनिका अग्रवाल, यशवंत कुमावत को सम्मानित किया । निम्बाहेड़ा क्षेत्र के पत्रकार, लेखक, साहित्यकार और प्रबद्धजन मौजूद रहे।

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