मोहनखेडा तीर्थ में जैन कवि संगम का तृतीय अधिवेशन सम्पन्न

  • मोहनखेड़ा आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है -जिनचंद्र विजय
  • जैन कवि-साहित्यकार जैन समाज की धरोहर है -नाहटा
  • जैन कवि संगम ज्ञान गुरुद्वारा है -कवि हर्षदर्शी

राजगढ़ (मोहनखेडा)। जैन कवि-साहित्यकारों के अंतरराष्ट्रीय समूह का दो दिवसीय तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन श्री मोहनखेड़ा तीर्थ की पावन पुण्य धरा पर भारत भर से आए जैन कवि-साहित्यकारों की उपस्थिति में 7-8 जनवरी को विभिन्न साहित्यिक अनुष्ठानों के साथ सम्पन्न हुआ। राष्ट्रीय महामंत्री जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने जानकारी देते हुए बताया कि अधिवेशन का मंगल प्रारंभ कवि-साहित्यकारों द्वारा जिनालय-दर्शन के साथ हुआ, जिसमें शोभायात्रा के रूप में नृत्य करते हुए जिनालय में आदिनाथ प्रभु के दर्शन, चैत्यवंदन व गुरुदेवश्री राजेन्द्र सूरीश्वरजी महाराजा के जिनालय में गुरुवन्दन किया।
प्रथम सत्र
अधिवेशन का प्रथम सत्र खुला अधिवेशन के रूप में हुआ । निश्रादाता मुनिराजश्री जिनचंद्रविजयजी म.सा द्वारा मंगलाचरण किया गया । तत्पश्चात् समारोह के मुख्य अतिथि अनिल जैन (सेशन जज-दिल्ली) व विशेष अतिथि विजयसिंह नाहटा (अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट-प्रतापगढ़ व समाजसेवी भरत जी मुणोत-चेन्नई आदि द्वारा दीप-धूप प्रज्वलन कर किया गया । माँ सरस्वती की वंदना प्रीतिमा पुलक ने सुन्दर गीत सा की । वरिष्ठ कवि कैलाश जैन “तरल” ने सुमधुर स्वर नवकार महामन्त्र महिमा गीत सुनाकर सभा को नवकारमय बना दिया । संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेन्द्रपाल जैन ने अतिथियों व सदस्यों का जैन कवि संगम की ओर से भावभीना स्वागत करते हुए संस्था के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला । आपके द्वारा रचित जैन कवि संगम के प्रतिनिधि गीत “हमारा जैन कवि संगम…को सूरत की कवयित्री शकुन सरगम ने मीठे कंठ द्वारा प्रस्तुत कर सभी को भावविभोर कर दिया।
जैन कवि संगम के संरक्षक व राष्ट्रीय महामंत्री जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने संस्था का राष्ट्रीय प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि संस्था की देश के दस राज्यों में इकाईयाँ हैं, जिनमें 500 से अधिक सदस्य साहित्य-सेवा को समर्पित हैं । कवि हर्षदर्शी ने बताया कि जैन कवि-साहित्यकारों को उचित काव्य-मंच व प्रोत्साहन देने के साथ संस्था राष्ट्र-चेतना की दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रही है । भविष्य में जैन कवि सम्मेलन, राष्ट्रीय संगोष्ठियाँ, काव्य-संकलन प्रकाशन, सोशल मिडिया पर काव्य-कार्यशालाएं आदि देश भर में आयोजित किये जायेंगे।
विशेष अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार व अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट विजयसिंह जी नाहटा ने अपने उद्बोधन में जैन कवि संगम के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि जैन कवि-साहित्यकार समाज की धरोहर है । आपने जैन कवि संगम के देश भर में चहुँमुखी विकास का आह्वान किया। सेशन जज-दिल्ली अनिल जी जैन ने जैन सिद्धांतों को आत्मसात करने पर बल देते हुए शुद्धाचरण से जीवन सँवारने की बात कही। आपने प्रथम बार मोहनखेडा तीर्थ स्पर्शना-वन्दना के लिए जैन कवि संगम व अपनी धर्मपत्नी सरिता जैन का आभार व्यक्त किया। समाजसेवी भरत मुणोत-चेन्नई ने जैन कवि संगम के विस्तार व विकास के बारे महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए तीन वर्ष के कार्यों की सराहना करते हुए अपनी और से हरसंभव सहयोग की बात कही, जिसका करतल ध्वनि से स्वागत हुआ ।
मुनिराज श्री जिनचंद्रविजयजी म. सा. ने जैन कवि संगम के सदस्यों को मंगल आशीर्वाद देते हुए कहा कि मोहनखेडा वही आता है जिसे गुरुदेवश्री बुलाते हैं । यह तीर्थ आध्यात्मिक ऊर्जा का स्रोत है । जैन कवि-साहित्यकारों को यहाँ की आध्यात्मिकता का अनुभव अवश्य होगा। इस अवसर पर जैन कवि संगम के वरिष्ठजनों सर्वश्री कैलाश जैन तरल-उज्जैन, हुकुमचंद कोठारी-मुम्बई, सुगनचंद जैन-उज्जैन, सुनील रांका-इन्दौर, राजेन्द्र जैन-उज्जैन, आशारानी जैन-झालावाड़ आदि को माला-प्रतीक-चिह्न व नवकार उपरणा अर्पण कर सम्मानित किया गया। देशभर में कार्यरत जैन कवि संगम की इकाईयों को उत्कृष्ट साहित्यिक आयोजनों के लिए प्रतीक चिह्न, माला, शाॅल अर्पण कर सम्मानित किया गया। तृतीय राष्ट्रीय अधिवेशन के संयोजक दिनेश जैन, मनोज जैन मनोकामना एवं निर्मल जैन नीर का राष्ट्रीय कार्यकारिणी की ओर से अभिनन्दन किया गया। अधिवेशन का काव्यमयी संचालन जगदीप जैन “हर्षदर्शी” ने किया ।
द्वितीय सत्र-
अधिवेशन के द्वितीय सत्र में तमिलनाडु, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली की इकाईयों ने प्रतिवेदन प्रस्तुत करते भावी योजनाओं के बारे में बताया । इस अवसर पर डाॅ. पूनम गुजरानी की कृति “तीन तेरह तैंतीस”, नरेन्द्रपाल जैन की कृति “जीवनमाला”, डाॅ. अरूणा मुणोत की कृति “यह निरंकुश मन” व विजयसिंह नाहटा की कृतियों का लोकार्पण किया गया, इस सत्र का कुशल संचालन डाॅ. पूनम गुजरानी-सूरत द्वारा किया गया । अधिवेशन के संयोजक मनोज जैन “मनोकामना” ने माँ-पिता विषयक स्वरचित कविता-पोस्टर व सीडी का वितरण करते हुए अधिवेशन में पधारे हुए अतिथियों, सदस्यों, मोहनखेडा ट्रस्ट, पत्रकारों आदि का जैन कवि संगम की ओर से आभार व्यक्त किया । इस अवसर पर पत्रकारों का अभिनन्दन किया गया।
कवि सम्मेलन
रात्रि में ॠषभ ध्यान सभागार में विराट कवि सम्मेलन हुआ । जिसमें जैन कवि संगम के वरिष्ठ व नवोदित कवियों ने विविध रसों में रात्रि 9 बजे से रात्रि 2 बजे तक काव्यपाठ कर तीर्थ परिसर में दर्शनार्थ पधारें श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । कवि सम्मेलन का संचालन संदेश जैन ने कुशलतापूर्वक किया ।
अधिवेशन के दूसरे दिन सदस्यों ने प्रातः जिनालय में दर्शन, पूजा आदि का लाभ लिया । तत्पश्चात् जैन कवि संगम के समस्त सदस्य श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के निकट श्री जयन्तसेन म्युजियम गये, जहाँ ट्रस्टी संजय जी हरण के नेतृत्व में म्युजियम का अवलोकन किया । यहाँ प्रदर्शित विभिन्न सुन्दर झाँकियों और सारगर्भित विवेचना ने सभी कवि-साहित्यकारों को बेहद प्रभावित किया । यहाँ ट्रस्ट के द्वारा जलपान कर स्वागत किया गया। स्नेह, सौहार्द और अपनत्व के आध्यात्मिक वातावरण में आयोजित तृतीय अधिवेशन की सुमधुर यादों के साथ सभी ने एक-दूसरे को विदाई दी।

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