ज्ञान की दिशा में वर्धमान बने संघ : युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमण

  • वर्धमान महोत्सव के प्रथम दिन आचार्यश्री ने चतुर्विध धर्मसंघ को ज्ञानार्जन में प्रवर्धमान बनने की दी प्रेरणा
  • बालोतरा की धरती पर आचार्यश्री ने साधु-साध्वियों व समणियों को संकल्प करा दिखाया अद्भुत दृश्य
  • भावाभिभूत श्रद्धालुओं ने दी अपनी-अपनी भावाभिव्यक्ति, प्राप्त किया आशीर्वाद

09.01.2023, सोमवार, बालोतरा, बाड़मेर (राजस्थान)। लूणी नदी के तट पर स्थित वस्त्र नगरी के नाम से प्रख्यात बालोतरा नगर में चार दिवसीय प्रवास को पधारे जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान वर्धमान के प्रतिनिधि, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में सोमवार को वर्धमान आदर्श विद्या मंदिर में बने वर्धमान समवसरण वर्धमान महोत्सव का मंगल शुभारम्भ हुआ। बालोतरा प्रवास के दूसरे दिन प्रातः लगभग दस बजे युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ वर्ष 2023 के वर्धमान महोत्सव का शुभारम्भ हुआ। इस संदर्भ में समणीवृंद ने गीत का संगान किया। वर्धमान के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित जनमेदिनी को वर्धमान महोत्सव के प्रथम दिन पावन पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि आदमी स्वयं के साथ दूसरों के प्रति भी मंगलकामना करता है। यदि कोई किसी के प्रति अंतर्मन से मंगलकामना करे तो बड़ी उदारता की बात हो सकती है। आज वर्धमान महोत्सव का प्रथम दिन है। जिस प्रकार पहले छोटी दीपावली और फिर बड़ी दीपावली होती है, उसी प्रकार हमारे धर्मसंघ में मर्यादा महोत्सव जैसे बड़े महोत्सव से पूर्व मानों छोटी दीपावली की भांति यह वर्धमान महोत्सव मनाया जाता है। आज के स्थान का नाम भी वर्धमान है। लोगस्स के पाठ में भी भगवान महावीर नहीं, वर्धमान नाम प्रयोग किया गया है। तीर्थंकर वर्धमान जो जैन शासन के उन्नायक हैं। इस महोत्सव के साथ मंगल के रूप में उनका नाम जुड़ गया है।
वर्धमान का अर्थ बढ़ता हुआ होता है। चतुर्मास के बाद गुरुकुलवास में साधु-साध्वियों समणियों के आने से संख्या में वृद्धि होती है। वर्तमान में यहां गुरुकुलवास में 106 साध्वियां, 45 संत और 29 समणियां उपस्थित हैं। शासन में साधु-साध्वियों की संख्या में बढ़ोतरी हो। मुमुक्षुओं की संख्या वृद्धि भी हो और मैंने पहले भी मुमुक्षुओं को ऐसी अनुप्रेक्षा करने को कहा था। संख्या के साथ गुणवत्ता भी वर्धमान हो।
हमारे चतुर्विध धर्मसंघ में ज्ञान वर्धमान हो, ऐसा प्रयास होना चाहिए। महाप्रज्ञ श्रुताराधना पाठ्यक्रम के माध्यम से ज्ञान की वर्धमानता हो सकती है। अन्य कई संघीय कोर्स भी उपलब्ध हैं। साधु-साध्वियां ज्ञान श्रुतधर बने, ऐसा प्रयास करें। ज्ञान सूक्ष्मता और गहराई लिए हुए हो, इस दिशा में पुरुषार्थ करने का प्रयास करना चाहिए। जो दसवेआलियं का प्रतिदिन स्वाध्याय करते वे साधुवाद के पात्र हैं। पाठ के साथ-साथ उसका अर्थ भी ध्यान होता रहे और अच्छी बात हो सकती है। साधु-साध्वियों की नई पीढ़ी दसवेआलियं को अपना सहचर बनाकर रखने का प्रयास करे। जिनमें विशेष प्रतिभा हो और भी ज्ञान का विकास करें। जिस प्रकार साधु अवस्था में विशेष ज्ञानी के तौर पर मुनि नथमलजी (टमकोर) ‘आचार्यश्री महाप्रज्ञजी’ को जाना जाता था। भाषण देने की कला और विद्वता का भी विकास हो। स्वाध्याय, मनन, अनुप्रेक्षा के द्वारा ज्ञान के विकास का प्रयास हो।
आचार्यश्री ने उपस्थित साधु, साध्वियों व समणियों को विशेष प्रेरणा प्रदान करते कुछ को एक वर्ष के लिए सप्ताह में एक दिन दसवेआलियं का पाठ, स्वाध्याय करने, ऐच्छिक साधु-साध्वियों व समणियों को प्रतिदिन दसवेआलियं का स्वाध्याय करने का संस्कृत भाषा में संकल्प कराया तो मानों वर्धमान महोत्सव के अवसर पर वर्धमान के प्रतिनिधि ने अद्भुत दृश्य उत्पन्न कर दिया। उपस्थित पूरी जनमेदिनी भावविभोर और हर्षित नेत्रों से इस अवसर को निहार रही थी। आचार्यश्री ने बालोतरा की इस धरती से ज्ञान में वर्धमान बनने के लिए श्रावक-श्राविकाओं को भी एक वर्ष तक भिक्षु विचार दर्शन को बार-बार पढ़ने और ‘तेरापंथ प्रबोध’ को याद करने की प्रेरणा प्रदान की। बालोतरा की धरती पर आचार्यश्री द्वारा ज्ञान की दिशा में वर्धमानता का ऐसा प्रासाद पाकर मानों पूरा चतुर्विध धर्मसंघ अपने आराध्य के प्रति कृतज्ञ नजर आ रहा था।
कार्यक्रम में कमिश्नर श्री अशोक कोठारी, साध्वी विजयप्रभाजी, साध्वी जिनबालाजी, साध्वी शताब्दीप्रभाजी, साध्वी कलाप्रभाजी, समणी संचितप्रज्ञाजी, मुमुक्षु प्रियंका ओस्तवाल, मुमुक्षु दिप्ती वेदमूथा, ओसवाल समाज के अध्यक्ष श्री शांतिलाल डागा, महिला मण्डल की अध्यक्ष श्रीमती निर्मला संकलेचा ने अपनी-अपनी अभिव्यक्ति दी। संसारपक्ष में बालोतरा से संबद्ध समणीवृंद और मुमुक्षुवृंद संयुक्त रूप में, साध्वी जिनबालाजी व साध्वी कमलप्रभाजी (बोरज) की सहवर्ती साध्वियों, साध्वी प्रमोदश्रीजी, साध्वी कुंथुश्रीजी, साध्वी रतिप्रभाजी की सहवर्ती साध्वियों, तेरापंथ महिला मण्डल, तेरापंथ कन्या मण्डल, तेरापंथ युवक परिषद व मुमुक्षु रक्षा ओस्तवाल ने पृथक्-पृथक् गीत के माध्यम से पूज्यचरणों की अभ्यर्थना की। टीना श्रीश्रीमाल ने आचार्यश्री से 25 की तपस्या का प्रत्याख्यान किया। इस प्रकार वर्धमान महोत्सव का प्रथम दिन का कार्यक्रम लगभग साढ़े तीन घंटे तक चला।

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