प्रयागराज:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) के छात्रों पर 15 दिसंबर, 2019 को पुलिस लाठी चार्ज का मुद्दा उठाने वाली एक जनहित याचिका पर अपना फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया। अदालत इस मामले में सात जनवरी, 2020 को फैसला सुनाएगी। चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस विवेक वर्मा की पीठ ने प्रयागराज के मोहम्मद अमन खान द्वारा दायर जनहित याचिका पर यह आदेश पारित किया।
इस याचिका में कहा गया है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र नागरिकता संशोधन कानून, 2019 के खिलाफ 13 दिसंबर को शांतिपूर्ण विरोध कर रहे थे। हालांकि, 15 दिसंबर को ये छात्र मौलाना आजाद पुस्तकालय के आस पास एकत्रित हुए और विश्वविद्यालय गेट की ओर मार्च किया। याचिकाकर्ता का आरोप है कि विश्वविद्यालय गेट पर पहुंचने पर वहां तैनात पुलिस ने छात्रों को उकसाना शुरू कर दिया, लेकिन छात्रों ने प्रतिक्रिया नहीं दी। कुछ समय बाद पुलिस ने इन छात्रों पर आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए और उन पर लाठियां बरसाईं जिसमें करीब 100 छात्र घायल हो गए।
सरकार बोली- छात्रों ने तोड़ दिया था विश्वविद्यालय का गेट
याचिका में अदालत की निगरानी में पुलिस कार्रवाई की जांच कराने, पुलिस हिरासत से छात्रों को रिहा कराने और इस हिंसा में घायल सभी का इलाज कराने एवं मुआवजा दिलाने का अनुरोध किया गया है। अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने इस मामले में राज्य सरकार की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया और पुलिस कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने दलील दी कि विश्वविद्यालय का गेट छात्रों द्वारा तोड़ दिया गया था और विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुरोध पर पुलिस ने हिंसा में लिप्त विद्यार्थियों को काबू में करने के लिए विश्वविद्यालय परिसर में प्रवेश किया और इस कार्रवाई के दौरान कोई अतिरिक्त बल प्रयोग नहीं किया गया।

