ऐतिहासिक अवसर पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़
कर्नाटक। अपनी अहिंसा यात्रा के साथ पहली बार दक्षिण भारत की ऐतिहासिक कर जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, महातपस्वी, अखण्ड परिव्राजक आचार्यश्री महाश्रमणजी ने अपनी धवल सेना के साथ आज प्रातः लगभग 6.51 बजे देश के सत्रहवें राज्य के रूप में कर्नाटक की सीमा में मंगल प्रवेश किया। साधु-साध्वियों के साथ आचार्यश्री का कर्नाटक की धरती पर पदार्पण का उत्साह कर्नाटकवासियों दिखाई दे रहा था। सैंकड़ों-सैंकड़ों की संख्या में उपस्थित कर्नाटकवासियों ने अपने राज्य की सीमा में प्रवेश करने पर भव्य स्वागत-अभिनन्दन किया। बेंगलुरु सहित कर्नाटक के सभी क्षेत्रों के श्रद्धालु इस ऐतिहासिक अवसर को अपने नेत्रों से निहारा। आचार्यश्री ने कर्नाटक की सीमा में प्रवेश के पश्चात मंगलपाठ का उच्चारण किया तो उपस्थित श्रद्धालुओं के जयघोष से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।



