ठाणे। घाटकोपर का सफलतम एवं ऐतहासिक चातुर्मास की परिसम्पन्नता के पश्चात साध्वी श्री शासनश्री चंदनबालाजी ठाणा 5 एवं ठाणे का अभूतपूर्व एवं प्रभावकारी पावस के पश्चात साध्वी श्री अणिमाश्रीजी एवं साध्वीश्री मंगलप्रज्ञाजी ठाणा 6 का वाशी में भव्य आध्यात्मिक मिलन समारोह त्रिवेणी संगम के रूप में आयोजित हुआ। सैकड़ो भाई बहनों के विशाल जुलूस के साथ समागत साध्वी अणिमाश्रीजी व साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी आदि साध्वी वृन्द का जब शासनश्री चंदनबालाजी आदि साध्वी वृन्द से प्रथम मिलन हुआ तो विनय व वात्सल्य की अद्भुत धारा प्रवाहित हो गई। उस नयनाभिराम दृश्य को देखकर सैकड़ो भाई-बहन भावविभोर हो गए।
शासनश्री साध्वी श्री चन्दनबालाजी ने अपने वात्सल्य संभृत उद्गारों को व्यक्त करते हुए कहा तेरापंथ धर्मसंघ कल्पवृक्ष है। इसकी छाया में बैठकर व्यक्ति निश्चिंतता की अनुभूति कर सकता है। ज्योतित होने की दिशा में अग्रसर हो सकता है। आज हमें साध्वी अणिमाश्रीजी व साध्वी मंगलप्रज्ञाजी से मिलकर परम प्रसन्नता की अनुभूति हो रही है। ये दोनों हमारे धर्मसंघ की प्रबुद्ध साध्वियां है। प्रबुद्धता के साथ विनम्रता का अद्भुत संयोग है। चातुर्मास से पहले मिलने की तीव्र उत्कंठा थी किन्तु स्वास्थ्य की अनुकूलता न होने के कारण मिलन नही हो सका। मन की मुराद आज पूरी हुई है। हम दोनों को ही गुरु-दर्शनों का आदेश प्राप्त है। दोनों साध्वियां संघ की अच्छी प्रभावना कर रही है। हर साध्वी अपने आप मे निखरी हुई एवं तैयार है। आपकी यात्रा मंगलमय, सुखदायी, वरदायी हो।
साध्वी अणिमाश्रीजी ने अपने उद्गार व्यक्त करते हुए कहा तेरापंथ धर्मसंघ के दो मजबूत स्तंभ है विनय व वात्सल्य। छोटो का विनय व बड़ो का वात्सल्य जब एक दिशागामी बनते है तो धर्मसंघ का नया रूप निखरता है। शासनश्री साध्वीश्री चन्दनबालाजी द्वारा प्रवाहित वात्सल्य की गंगोत्री में प्रवाहित होकर हम बाग-बाग हो गए है। साध्वीश्री चन्दनबालाजी हमारे धर्मसंघ की विशिष्ट साध्वी है। जिसे वर्षो तक आचार्यों की गोचरी की सेवा करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ है। आपकी सहजता, सरलता, सौम्यता, मधुर व्यवहार एवं अपत्त्व हम सबको अभिभूत करने वाला है। आपके सानिध्य में आते ही हम निश्चिंत हो गए है। सभी साध्वियां प्रबुद्ध, विनम्र एवं सेवाभावी है। दीक्षा लेने के बाद बहीबिहार में आपसे पहली बार मिलन हुआ है। आपसे वात्सल्य एवं कृपा दृष्टि प्राप्त कर गदगद है। आपकी गुरु दर्शन यात्रा शिवंकर, शुभंकर एवं क्षेमकरं कर हो, मंगलकामना।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने भावाभिव्यक्ति देते हुए कहा आज वाशी में नई बहार आई है। मिलन के इस दृश्य को देखने के लिए जन सैलाब उमड़ा है। दीक्षा के बाद पहली बार मिलन हुआ है। अतीत की स्मृतियां वर्तमान में जिवंत हो गई है। आपकी गंभीरता, मृदु व्यवहार हम सबके लिए प्रेरणा है। आपको वर्षो तक राज में रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। आपश्री के वात्सल्य संभृत व्यवहार को देखकर साशन गौरव साध्वी श्री कमलू जी याद आने लगे है। यह मिलन आत्ममिलन की दिशा प्रशस्त करे। मंगलकामना। हम सब संघ प्रभावना करते रहे, यही काम्य है।
साध्वी कर्णिकाश्रीजी, साध्वी सुधाप्रभाजी, साध्वी समत्वयशाजी व साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने प्रमोद भावना से युक्त गीत का संगान करते हुए एक-एक साध्वी वृन्द की विशेषताओं का स्वरों के माध्यम से व्यक्त किया।
साध्वी वर्धमानश्रीजी, साध्वी राजश्रीजी, साध्वी समीक्षाप्रभाजी ने विचार व्यक्त किए एवं संगान किया। ठाणे सभामंत्री जितेन्द्र बरलोटा, पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमुद कच्छारा, मु.म.प्र की अध्यक्षा भाग्य श्री कच्छारा, बाबूलाल बाफना, राकेश बडाला, राकेश चंडालिया ने अपने विचार रखे। वाशी महिला मंडल ने गीत का संगान किया। विमल सोनी ने मंजे हुए भावों की प्रस्तुति दी।
आध्यात्मिक मिलन समारोह का भव्य कार्यक्रम

