लाडनूं, प्रथम दिवस। पूज्य गुरुदेव आचार्यश्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य एवं मंगल आशीर्वाद से तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम (टीपीएफ) के त्रिदिवसीय 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन ‘हो हमारा योगक्षेम’ का शुभारंभ जैन विश्व भारती, लाडनूं में हुआ। अधिवेशन में देशभर की टीपीएफ शाखाओं से लगभग 625 प्रोफेशनल्स सहभागिता कर रहे हैं। प्रथम दिन आध्यात्मिक मार्गदर्शन, संगठनात्मक उपलब्धियों, वार्षिक साधारण सभा एवं नई राष्ट्रीय टीम के निर्वाचन सहित विभिन्न कार्यक्रम हुए।
सूर्यप्रकाश श्यामसुखा को ‘टीपीएफ गौरव’ सम्मान
प्रथम दिन वर्ष 2026 का प्रतिष्ठित ‘टीपीएफ गौरव’ सम्मान श्री सूर्यप्रकाश श्यामसुखा (गंगाशहर-लुधियाना) को पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में प्रदान किया गया। सम्मान स्वीकार करते हुए श्री श्यामसुखा ने इसे आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किया। उन्होंने कहा कि तेरापंथ परिवार में जन्म लेना गौरव की बात है, लेकिन अपने आचरण एवं कर्मों से तेरापंथी बनना अधिक महत्वपूर्ण है। आचार्यश्री ने उनके उपासक श्रेणी एवं टीपीएफ से जुड़े सेवाभावी योगदान की सराहना करते हुए कहा कि धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सेवा गतिविधियों में निरंतर सक्रिय रहना चाहिए। उन्होंने टीपीएफ के कार्यों की सराहना करते हुए संस्था को समाज एवं धर्मसंघ के लिए उपयोगी कार्य करते रहने की प्रेरणा दी।
युवाचार्यश्री से मिला मार्गदर्शन
टीपीएफ राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हिम्मत माण्डोत, चीफ ट्रस्टी श्री एस.के. सिंघी, महामंत्री श्री मनीष कोठारी सहित पदाधिकारियों ने युवाचार्य श्री महावीर कुमारजी के दर्शन-वंदन एवं सेवा का लाभ लिया। श्री माण्डोत एवं श्री सिंघी ने टीपीएफ को प्राप्त हो रहे युवाचार्यश्री के मार्गदर्शन के लिए कृतज्ञता व्यक्त की। युवाचार्यश्री ने कहा कि संस्था का विकास अकेले अध्यक्ष के प्रयासों से नहीं, बल्कि सामूहिक सहयोग एवं सहभागिता से होता है। टीपीएफ धर्मसंघ की महत्वपूर्ण संपत्ति है। इससे जुड़े प्रोफेशनल्स का केवल व्यावसायिक ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक एवं धार्मिक विकास भी होना चाहिए। उन्होंने टीपीएफ की प्रगति की सराहना करते हुए संगठन के उत्तरोत्तर विकास की मंगलकामना की।
आचार्यश्री के समक्ष टीपीएफ की उपलब्धियों का विवरण
टीपीएफ टीम ने आचार्यश्री महाश्रमणजी के दर्शन-वंदन एवं सेवा का लाभ लिया। राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हिम्मत माण्डोत ने फोरम की विगत दो वर्षों की गतिविधियों एवं उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रेक्षाध्यान, संबोध कार्यशालाओं, जैन विद्या एवं तत्त्वज्ञान परीक्षाओं सहित विभिन्न आध्यात्मिक पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। शिक्षा क्षेत्र में आचार्य महाप्रज्ञ शिक्षा सहयोग योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष 4.5 से 5 करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति एवं फीस सहायता दी जा रही है तथा 13 नॉलेज सेंटर युवाओं को कोचिंग के माध्यम से आगे बढ़ा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि ‘मिशन दृष्टि’ के तहत करीब 1.40 लाख बच्चों की नेत्र जांच की गई है और अहमदाबाद में चिकित्सा एवं नेत्र सेवा प्रकल्प विकसित किया जा रहा है। दो वर्षों में टीपीएफ का कॉर्पस फंड 13.5 करोड़ से बढ़कर करीब 20 करोड़ तथा एफडी 3 करोड़ से बढ़कर 7.5 करोड़ रुपए हुई है। विभिन्न प्रकल्पों के लिए करीब 24 करोड़ रुपए के डोनर कमिटमेंट एवं लगभग 5 करोड़ रुपए का सीएसआर सहयोग प्राप्त हुआ है।
17वीं वार्षिक साधारण सभा में कार्यों एवं आय-व्यय का विवरण
टीपीएफ की 17वीं वार्षिक साधारण सभा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री हिम्मत माण्डोत की अध्यक्षता में महाश्रमण ऑडिटोरियम, विमल विद्या विहार, जैन विश्व भारती में आयोजित हुई। नवकार महामंत्र के सामूहिक उच्चारण से सभा का शुभारंभ हुआ। महामंत्री श्री मनीष कोठारी ने वर्षभर की आध्यात्मिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य, प्रोफेशनल डेवलपमेंट एवं सेवा गतिविधियों का विवरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्री नरेश कठोतिया ने वार्षिक आय-व्यय का ब्यौरा सदन के समक्ष रखा।
पुष्प जैन बने राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रकाश बैद चीफ ट्रस्टी
सत्र 2026-28 के लिए श्री पुष्प जैन (मोमासर-नई दिल्ली) को टीपीएफ का राष्ट्रीय अध्यक्ष तथा श्री प्रकाश बैद (लाडनूं-कोलकाता) को चीफ ट्रस्टी निर्वाचित किया गया। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पुष्प जैन ने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पूर्व अध्यक्षों एवं टीमों द्वारा तैयार की गई मजबूत नींव को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने आगामी दो वर्षों के लिए योजनाबद्ध कार्ययोजना तैयार कर ब्रांच, जोन एवं विभिन्न प्रोजेक्ट स्तर पर अधिकाधिक सदस्यों को सक्रिय रूप से जोड़ने की बात कही। नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री पुष्प जैन एवं चीफ ट्रस्टी श्री प्रकाश बैद ने टीपीएफ के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक डॉ. मुनि श्री रजनीश कुमारजी के दर्शन-वंदन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।अधिवेशन के दौरान आचार्यश्री ने वर्तमान एवं आगामी टीम को सेवा, समर्पण एवं निरंतर प्रगति की भावना से कार्य करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि संस्था के लिए शुद्ध एवं अच्छा कार्य करने का आत्मसंतोष रहना चाहिए। उन्होंने टीपीएफ के निरंतर विकास एवं उत्तरोत्तर प्रगति की मंगलकामना की।
आचार्यश्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में टीपीएफ के 19वें राष्ट्रीय अधिवेशन का आगाज
Highlights
- ‘हो हमारा योगक्षेम’ थीम पर लाडनूं में जुटे देशभर से 625 से अधिक प्रोफेशनल्स

