आज पर्यावरण और मनुष्य के बीच असंतुलन का ही दुष्परिणाम है कि आए दिन वैश्विक महामारीयो से लेकर विभिन्न प्रकार के आपदा देखने को मिल रहा है l दोस्त हम इंसान और पर्यावरण के बीच गहरा संबंध है l प्रकृति के बिना हमारा जीवन संभव नहीं है l दोस्तों हमें हर हाल में प्रकृति के साथ तालमेल बैठाकर ही चलना होगा l आज पूरे विश्व में लगातार वातावरण दूषित हो रहा है ,जिसका गहरा प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ रहा है l जिस प्रकार से हम देख रहे हैं की वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के कारण सभी जगह लॉकडाउन किया गया तो प्रकृति ने अपना स्वरूप निखारा जिस गंगा नदी को और यमुना नदी को साफ करने के लिए ना जाने कितने सरकारों ने कितने का बजट लाया फिर भी यमुना और गंगा और भी अन्य नदियां साफ नहीं हो पाई l लेकिन लॉकडाउन के कारण पर्यावरण को सांस लेने का मौका मिला तो अपना असली स्वरूप निखारा पर्यावरण ने आगे भी हमें अपने पर्यावरण के साथ संतुलन बनाकर रखने की जरूरत है l जैसा कि हम जानते हैं कि 1972 से विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जा रहा है l जिसका नीव संयुक्त राष्ट्र संघ ने 5 जून 1972 को रखा था तभी से हम लगातार 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाते हैं ताकि जागरूकता आ सके और मनुष्य और प्रकृति में तालमेल बना रहे जिससे हम इस धरा पर जीवित रह सकें l
दोस्तों जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक वर्ष 5 जून को हम विश्व पर्यावरण दिवस इसलिए मनाते हैं ताकि हमारे पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वैश्विक स्तर पर जागरूकता आए l वर्ष 2018 का विश्व पर्यावरण दिवस समारोह का मेजबानी भारत ने ही किया था जिसका थीम था प्लास्टिक प्रदूषण जो आज हम लोग विश्वविद्यालय स्तर पर भी जैसे कि मैं दिल्ली विश्वविद्यालय से हूं वहां भी हम लोग प्लास्टिक मुक्त कैंपस अभियान चला रहे हैं ,इसी तरह देश के अलग-अलग कोने में चलाया जा रहा है और इसको तेज करने की जरूरत है l जैसा कि हम जानते हैं कि लॉकडाउन से पहले देश की राजधानी दिल्ली प्रदूषण के मामले में पहले स्थान पर था l लेकिन वैश्विक महामारी से उपजी कोरोना वायरस के कारण हमने देखा कि लॉकडाउन के कारण दिल्ली बिल्कुल स्वच्छ हो गई यमुना नदी बिल्कुल नीले रंग की हो गई और गंगा बिल्कुल स्वच्छ नदी हो गई इसलिए हमें अपने पर्यावरण को संतुलित करने के लिए हर संभव प्रयास करने की जरूरत है l हमें ठोस निर्णय लेने की जरूरत है ताकि जिस प्रकार से दिल्ली जैसा प्रदूषित शहर अब प्रदूषण मुक्त है आगे भी ऐसे ही बना रहे l इसलिए हमें सरकार के साथ मिलकर पहल करने की जरूरत है जैसे कि वाहनों के उत्सर्जन मानकों को मजबूत करना होगा l जो निर्माण कार्य के कारण उड़ने वाली धूल है उस पर हमें नियंत्रण करने की जरूरत है साथ ही इलेक्ट्रिक वाहनो को मुख्यधारा में लाना होगा और अंतरराष्ट्रीय जहाजों से होने वाले उत्सर्जन में कमी लाना होगा l जिस प्रकार से पिछले दिनों अमेजन के जंगलों में आग लगी उस पर हमें ध्यान रखने की जरूरत है l जो भी हुआ अमेज़न जंगल में और कोई भी भूमि है अगर उसमें आग लगती है तो उसको रोकने के लिए त्वरित निर्णय लेने की जरूरत है साथ ही घरेलू अपशिष्ट को जलाने पर भी सख्त पाबंदी लागू होना चाहिए l और जो बड़े-बड़े शहरों में एसी ,फ्रिज ,रेफ्रिजरेटर प्रयोग करते हैं उन पर भी ध्यान रखना होगा हमें पर्यावरण अनुकूलन शीतला यंत्रों का इस्तेमाल करने की जरूरत है l अब ताकि इस वैश्विक महामारी मे जो सकारात्मक परिणाम हमें देखने को मिला है प्रदूषण मुक्त यमुना, गंगा और अन्य नदियों का पुनरुत्थान होना आगे भी हमें इसे बनाए रखने के लिए प्रकृति के साथ तालमेल अभी से ठोस नीति बनाने की जरूरत है l दोस्तों आज जिस प्रकार से जीव -जंतु पेड़ पौधे खुली हवा में सांस ले रहे वैसे ही आगे भी लेते रहे इसके लिए हमें तालमेल बनाने की जरूरत है l
दोस्तों हमारी धरती पर पिछले कुछ वर्षों से लगातार भूकंप, बाढ़ सुनामी एवं अन्य प्रकार की वैश्विक महामारीया तेजी से बढ़ती जा रही है l जैसा कि हम देख रहे हैं कि इन प्राकृतिक आपदाओं में जान -माल का बहुत नुकसान हो रहा है l दरअसल, हमारी धरती के इको सिस्टम में आए बदलावो और तेजी से बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग के कारण यह सब हो रहा है l ध्यान से देखे तो इन सभी आपदाओं के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुध इस्तेमाल का ही कारण है l दोस्त आज हमारी धरती अपने भार से कहीं अधिक भार वहन कर रही है l मेरे बात को ध्यान से देखना अगर यही हाल रहा तो 2030 तक हमें रहने के लिए दूसरे प्लेनेट की जरूरत होगी l इसलिए पर्यावरण सुरक्षा के लिए खूब पेड-़ पौधे लगाने की जरूरत है साथ ही साफ -सफाई अभियान, रीसाइक्लिंग, सौर ऊर्जा, बायोगैस, बायो खाद, सीएनजी वाले साधनों का इस्तेमाल करने की जरूरत है, और साथ ही हमें रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीक अपनाने पर बल दिए जाने की जरूरत है जिससे हमारा प्राकृत के साथ तालमेल बना रहे l दोस्तों अब हम सबको मिलकर दुनिया भर के लोगों को प्राकृतिक संसाधनों के रखरखाव और इस्तेमाल की दर को कंट्रोल करने के लिए जागरूक करने की जरूरत है l ताकि हम स्वास्थ्य पर्यावरण के साथ पृथ्वी के विकास के सपने को साकार कर सकें l आप सब मेरे साथ प्रतिज्ञा कीजिए कि किसी भी शुभ अवसर पर हम अधिक से अधिक पेड़ लगाएंगे और जीव- जंतुओं के प्रति दया भाव रखेंगे और जितना हो सके साइकिल का प्रयोग करेंगे और अपने आस-पड़ोस एवं अपने स्कूल ,विश्वविद्यालयों को कचड़ा और प्लास्टिक मुक्त बनाएंगे l
पर्यावरण के साथ अब तो तालमेल बना लो

