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Reading: पर्युषण पर्व का सातवां दिवस-ध्यान दिवस
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पर्युषण पर्व का सातवां दिवस-ध्यान दिवस

Last updated: September 13, 2018 3:00 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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भायंदर। तुलसी समवसरण भायंदर में आज सातवे दिन ध्यान में मग्न होकर ध्यान दिवस के रूप में मनाया गया। मंगलाचरण- महिलामण्डल की विद्या जी द्वारा ध्यान धरे,हम प्रेक्षाध्यान करे,आत्म साक्षात्कार अणु प्रेक्षा ध्याय द्वारा अपनी सुंदर प्रस्तुति दी।
साध्वीश्रीशारदा प्रभाजी ने कहा काम भोग को दो भागों मर बांटा गया है ।एक बार भोगा जाय वो भोग और बार बार भोगा जाय वह उपभोग कहलाता है । पूर्वभव के कारण आज इस भव में उसका कर्ज हमे चुकाना पड़ता है । साध्वीश्री पंकजश्रीजी ने नमस्कार महामंत्र के उच्चारण से ध्यान दिवस की सुरुवात करते हुए गुरु उपासना की स्तुति की। धर्म ध्यान में लग्न गणि है,घर के गौरख धंधों में ध्यान ऐसो लागे की सीमा नही है काज की, अरे माने साधु संता रो उजयारो प्यारो प्यारो लागे गीतिका द्वारा अच्छी अभिव्यक्ति दी । साध्वीश्री सम्यक्त्व यशाजी ने ध्यान क्यो करते और क्यो जरूरी है पर बताया  किसी एक बिंदु पर मन को स्थिर,बाहर से भीतर की ओर लौटना,निर्विचार अंतर्यात्रा, एवं जो हर परिस्थिति में शांत और संतुलित रहने की क्षमता प्रदान करता हो । शरीर, इन्द्रिय,मन,ध्यान,तप एक साथ तपते है तब आत्मा का साक्षात्कार होता है।
आत्मदर्शन द्वारा अपने मन को एकाग्र करना ध्यान है। तन मन के तनाव छूटते है को कार्योत्सर्ग को बढ़ाया जा सकता है । अतः 10 मिनट का प्रतिदिन ध्यान अवश्य करना चाहिए। ओर कल ज्यादा से ज्यादा पर्युषण पर्व पर (दो पहरी, चोपोरी,या अस्ठ पहरी) पोषद करने का भाव रखे ।शासनश्री साध्वी केलाशवतीजी ने महावीर जन्म का वाचन करते हुए उनके दीक्षा से पूर्व संकल्प पूर्ण हो जाने पर भाई, बहन, माता एवं सम्पूर्ण परिवारवालो से दीक्षा ग्रहण करने की अनुमति ली । नंदीभद्र ने दो वर्ष के बाद दीक्षा लेनी की अनुमति दी थी ।  भगवान महावीर का कार्यसमय जप,तप, ध्यान, स्वाध्याय एवं संयंमय जीवन पूर्ण रहा । महावीर को दीक्षा ग्रहण करते ही मंत्र ज्ञान प्राप्त हो गया । त्याग वैराग्य के पथ पर चलते, सब कष्ठों को हँसकर सहते ,जग को धर्म का मार्ग बताते साध्वी श्री केलाशवति ने भायंदर वाशियो को ध्यान करने का उपदेश दिया ।शान्ति की शरण ,सदा सूखकारी ।  शांति का पावन उपदेश करता भव जल पार की अभिव्यक्ति द्वारा कन्यामण्डल का संचालन निधि भंडारी व श्रुति सालेचा  द्वारा कुशलतापूर्वक पूरा करने में अहम भूमिका निभाई।

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