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Reading: UPSC और Aadhaar की वेबसाइट से छेड़छाड़, UIDAI का दावा-नहीं हुई हैक
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UPSC और Aadhaar की वेबसाइट से छेड़छाड़, UIDAI का दावा-नहीं हुई हैक

Last updated: September 11, 2018 9:02 pm
Surabhi Saloni
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5 Min Read
प्रतीकात्मक तस्वीर
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नई दिल्‍ली:देश में साइबर सिक्‍योरिटी पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। एक दिन में दो प्रमुख साइट को हैकर्स ने हैक कर लिया है। हैकर्स ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की वेबसाइट को सोमवार रात हैक कर लिया।
वेबसाइट http://www.upsc.gov.in/ के होमपेज पर जाने पर एक कार्टून कैरेक्टर डोरेमॉन की तस्वीर लगी दिख रही थी, जिस पर लिखा था, ‘डोरेमॉन!!! फोन उठाओ.’ इस पेज के निचले हिस्से में ‘आई.एम. स्ट्यूपीड’ (I.M. STEWPEED) लिखा था और साथ ही बैकग्राउंड में इस कार्टून सीरियल का टाइटल ट्रैक बज रहा था। वहीं दूसरी ओर आधार की साइट को भी हैक किए जाने की खबर है।  उधर, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार सॉफ्टवेयर की हैकिंग की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है।
2500 रुपये के सॉफ्टवेयर की मदद से तैयार हो सकता है नया आधार कार्ड
आधार कार्ड की सुरक्षा को लेकर देश में काफी समय से विवाद चल रहा है। कुछ दिनों पहले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने कहा है कि वह आधार के लिए फेस रिकॉग्निशन तकनीक (चेहरा पहचानने) पर काम कर रही है और इसी बीच एक रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि आधार के सॉफ्टवेयर को हैक कर लिया गया है।
उधर, भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार सॉफ्टवेयर की कथित तौर पर हैकिंग की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। आधिकारिक बयान जारी कर UIDAI ने कहा कि सोशल और ऑनलाइन मीडिया में आधार इनरोलमेंट सॉफ्टवेयर के कथित तौर पर हैक किए जाने की रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। बयान के मुताबिक रिपोर्टों में किए जा रहे दावे आधारहीन हैं और डाटाबेस में सेंधमारी संभव नहीं है।
व्हाट्सएप पर बेचा जा रहा है सॉफ्टवेयर
रिपोर्ट में हफिंगटनपोस्ट डॉट इन ने दावा किया है कि आधार कार्ड का सॉफ्टवेयर हैक किया जा चुका है और भारत के करीब एक अरब लोगों की निजी जानकारी दांव पर लगी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आधार कार्ड के सॉफ्टवेयर एक लूपहोल (गड़बड़ी) है, जिसकी मदद से एक सॉफ्टवेयर के जरिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठा व्यक्ति किसी के भी नाम से वास्तविक आधार कार्ड बना सकता है।
इस सॉफ्टवेयर की कीमत सिर्फ 2,500 रुपये है। हफिंगटनपोस्ट डॉट इन का दावा कि उसने तीन महीने की जांच के बाद इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में दुनियाभर के पांच विशेषज्ञों की मदद ली गई है। रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अभी भी इस सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है। दरअसल, इस सॉफ्टवेयर की मदद से आधार की सिक्योरिटी फीचर को बंद किया जा सकता है और नया आधार तैयार किया जा सकता है।
आधार कार्ड को हैक करने वाला यह सॉफ्टवेयर 2,500 रुपये में व्हाट्सएप पर बेचा जा रहा है। साथ ही यूट्यूब पर भी कई वीडियो मौजूद हैं, जिनमें एक कोड के जरिए किसी के भी आधार कार्ड से छेड़छाड़ हो सकती है और नया आधार कार्ड बनाया जा सकता है।
वेब एप्लीकेशन का शिकार होने में भारत सातवां प्रमुख देश
एक रिपोर्ट के मुताबिक वेब एप्लीकेशन हमले के मामले में भारत दुनिया में सातवें स्थान पर है। दरअसल, साल 2017 में हुए 53,000 साइबर हमले का करीब 40 फीसद शिकार भारत का फाइनेंस सेक्टर हुआ है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत को वेब एप्लीकेशन अटैक (डब्ल्यूएए) के मामले में टारगेटेड देशों की सूची में सातवें स्थान पर रखा गया है। हैकर्स की निगाहें बैंक, निवेश एजेंसी और बीमा कंपनियों पर टिकी है।
हैकर्स ने भारत में बैंकिंग, फाइनेंस और बीमा सेक्टर को निशाना बनाया है। हैकर्स ने इसके लिए फिशिंग, वेबसाइट घुसपैठ, वायरस और रैनसमवेयर जैसे तरीके का इस्तेमाल किया है।
जानकारों के मुताबिक हमलावरों का बड़ा मकसद हमेशा वित्तीय फायदे का रहा है। पिछले कुछ सालों में हैकर्स ने अपने टारगेट को निशाना बनाने के लिए रैनसमवेयर जैसे तरीके का ज्यादा इस्तेमाल किया है। अकामाई स्टेलट ऑफ इंटरनेट सिक्योररिटी क्यू 4 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक डिस्ट्रिब्यूटेड डिनायल ऑफ सर्विस (DDoS) हमले BFSI सेक्टर में पिछली तिमाही की तुलना में 2017 के चौथी तिमाही में 50 फीसद और बढ़ गए हैं।
पिछली तिमाही में 37 संगठनों में डीडीओएस हमले देखे गए थे जबकि इस बार हमले की संख्या बढ़कर 298 हो गई है। वहीं भारत से हटकर अमेरिका की बात की जाए, तो यहां 2017 की पिछली तिमाही की तुलना में डीडीओएस हमले में 31 फीसद की बढ़ोतरी हुई है।

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