वाराणसी:उत्तर प्रदेश सरकार ने अवधपुरी में ‘इक्ष्वाकु नगरी’ के नाम से नई अयोध्या बसाने का प्रस्ताव तैयार किया है। नई अयोध्या का केन्द्र बिंदु राम जन्मभूमि पर बनने वाला मंदिर होगा। इसका विस्तार सरयू की सीमाओं के अनुसार होगा। परियोजना के पहले चरण में सात हजार करोड़ रुपए खर्च होंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में अपने दो दिवसीय प्रवास के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिन्दू परिषद के शीर्ष पदाधिकारियों से परियोजना के मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की। राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के शिलान्यास के साथ ही नई अयोध्या की इस परियोजना की भी घोषणा हो सकती है।
नई अयोध्या नगरी में जानें क्या क्या होगा?
मुख्यमंत्री के प्रवास के पहले दिन मंगलवार को संघ के सह कार्यवाह भैयाजी जोशी, सह सर कार्यवाह डॉ. कृष्णगोपाल और विहिप के अन्तरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष चंपत राय और संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार के बीच लंबी चर्चा हु़ई। इस दौरान प्रदेश के अपर मुख्य सचिव गृह अवनीश अवस्थी भी मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार नई अयोध्या में रामायणकालीन सांस्कृतिक, राजनीतिक और सामाजिक इतिहास को विभिन्न माध्यमों से नए संदर्भों में पेश किया जाएगा। इसके लिए शोध केन्द्र, ऑडिटोरियम, गुरुकुल आदि बनाए जाएंगे। मानयता है कि सरयू का पथप्रवाह प्राचीन अयोध्या का भौगोलिक निधार्रण करता है।
पड़ोसी जिलों की भूमि भी होगी अधिग्रहित
इसे ही आधार मानकर नई अयोध्या के लिए अयोध्या के अलावा पड़ोसी जिलों अंबेडकर नगर और गोंडा की भी भूमि अधिग्रहित करने का प्रस्ताव है। भैयाजी जोशी और डॉ. कृष्ण गोपाल को 27 नवंबर को वाराणसी से बिहार प्रवास के लिए निकलना था। मुख्यमंत्री का भी इसी दिन यहां प्रवास का कार्यक्रम था। इसलिए नई अयोध्या की परियोजना पर वाराणसी में ही चर्चा करना तय हुआ। बुधवार को संघ के शीर्ष पदाधिकारियों और काशी विद्वत परिषद की अलग बैठक में भी राम मंदिर पर चर्चा हुई। इसमें मंदिर प्रतिष्ठापना पद्धति और पूजन विधि को शास्त्र सम्मत बनाने पर बात हुई। बैठक में राम मंदिर के लिए प्रस्तावित ट्रस्ट के स्वरूप पर भी विमर्श हुआ।
अवधपुरी में ‘इक्ष्वाकु नगरी’ के नाम से बसेगी नई अयोध्या

