श्रावक का व्यवहार आम आदमी से में विलक्षण होता है- मुनिश्री जिनेश कुमार जी
पालघर। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनिश्री जिनेश कुमार जी ठाणा 2 के सान्निध्य में जिला स्तरीय श्रावक श्राविका कार्यशाला “प्रेरणा” एवं तप अभिनंदन समारोह का आयोजन जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा पालघर द्वारा तेरापंथ भवन में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि “श्रेष्ठ कार्यकर्ता” उपासक अर्जुन जी मेडतवाल, मुख्य वक्ता पियुष जी नाहटा, सम्मानीय अतिथि संजय जी मरलेचा, उपासक गौतम जी वेदमूथा विशेष रूप से उपस्थित थे। श्रीमती भावना बाफना ने अट्ठाई तप के प्रत्याख्यान किया।
इस अवसर पर उपस्थित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा राग, द्वेष विजेता को जिन कहते है और जिन के उपासक को जैन कहते है। संसार में जैन धर्म की विशिष्ट पहचान है। जैन संस्कृति को सुरक्षित रखने में श्रावक श्राविकाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिन शासन साधु -साध्वी, श्रावक- श्राविका रूप चार खम्बों पर टिका हुआ है। श्रावक का अर्थ है सुनने वाला। जो जिनवाणी का श्रवण करता 12 व्रतों का पालन करता है, जो श्रद्धावान, विवेकवान, क्रियाशील, कर्तव्य शील होता है वह श्रावक कहलाता है। मुनिश्री जी ने आगे कहा श्रावक विश्वास का प्रतीक होता है। वह मैत्री, प्रमोद, करुणा, व माध्यस्थ भाव का विकास करे। आडम्बर, प्रदर्शन से दूर रहकर सादगीमय जीवन जिये।
तप अभिनंदन पर विचार व्यक्त करते हुए मुनिश्री जिनेश कुमार जी ने कहा जीव ज्ञान से जानता है, दर्शन से श्रद्धा करता है, चरित्र से निग्रह करता है, और तप से परिशुद्ध होता है। तप तत्काल पवित्रता देता है। तप से आत्मा का शोधन व वृतियों का परिष्कार होता है। पालघर में तपस्या का अच्छा क्रम चला। चला सभी तपस्वियों के प्रति खूब-खूब आध्यात्मिक मंगल कामना प्रकट करता हूं।
मुख्य अतिथि अर्जुन जी मेडतवाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा मोक्ष के तीन मार्ग है। सम्यक ज्ञान, दर्शन, चरित्र है। सभी तपस्वियों के तप की अनुमोदना करता हूं।
मुख्य वक्ता श्रीमान पियुष जी नाहटा ने प्रशिक्षण देते हुए कहा जो विजेता के पथ का अनुसरण करता है वह जैन है। जो हार नही मानता है वह जैन है। अपने भीतर के तीर्थत्व को लगातार विकसित करते रहे। श्रावक के पास जो आये वह पवित्रता लेकर जाये। छोटे छोटे तप विजय के पथ पर बढ़ने का मार्ग है।
इस अवसर पर उपासक गौतम जी वेदमुथा, संजय जी मरलेंचा, तेरापंथ सभा के अध्यक्ष नरेश जी राठौड़ व तप अनुमोदना में दिया घाटावत,अशोक खोखावत ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। आभार ज्ञापन चतुर तलेसरा व संचालन मुनिश्री परमानंद जी ने किया।
तप अभिनंदन समारोह का संचालन राकेश श्रीश्रीमाल व अमर बाफना ने संयुक्त रूप से किया। तप अभिनंदन में ४ कई तपस्या से लेकर १६ दिन के अगभग १०० तपस्वियों का सम्मान तेरापंथी सभा पालघर द्वारा किया गया। 2 धर्मचक्र तप का व अतिथियों का सम्मान किया गया। पालघर में तपस्या का अच्छा माहौल बना। ६ मासखमण तप, क्षुद्रिक सर्वतो भद्रा तप वाटकी तप ,आयंबिल तप लगभग २०० , तेला तप लगभग २५०-३०० एकांतर तप, उपवास सेकड़ो की संख्या में किये गये।
कार्यक्रम में पालघर, बोईसर, वसई, विरार, नालासोपारा, केलवा रोड, दहानू, मुंबई, सूरत आदि क्षेत्रों से अच्छी संख्या में उपस्थित थे। कार्यक्रम का सफल आयोजन तेरापंथ सभा के कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। यह जानकारी दिनेश राठौड़ ने दी।
पालघर में जिला स्तरीय श्रावक श्राविका कार्यशाला “प्रेरणा” एव तप अभिनंदन समारोह का आयोजन

