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lifestyle

दूरदर्शिता के साथ लक्ष्य तय करें और उसे पाने के लिए जुटे रहें

Last updated: October 23, 2019 3:13 pm
Surabhi Saloni
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3 Min Read
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रामनगर शहर का एक युवक गोविंद, मनमौजी किस्म का व्यक्ति था। वह एक सफल व्यापारी बनकर धन एवं मान सम्मान पाने की लालसा रखता था। उसने अपने जीवन में कई तरह के व्यवसाय करने का प्रयास किया परंतु अपने स्वभाव के अनुसार कुछ समय बाद ही वह उस व्यवसाय को छोडकर किसी दूसरे क्षेत्र में कार्यरत् हो जाता था। इस प्रकार उसका काम आधा अधूरा रहकर उसे भारी आर्थिक हानी उठानी पड़ती थी। उसके साथियों ने उसको ऐसी जीवनशैली बदलने का सुझाव दिया परंतु वह इसे अनदेखी करके अपना सारा धन गँवा बैठा और आर्थिक बदहाली की हालत में आ गया

एक रात उसने सोचा मेरा जीवन तो व्यर्थ हैं। मैं एक असफल व्यक्ति हूँ जो कि किसी भी व्यवसाय में न धन कमा पाया और न ही मान सम्मान प्राप्त कर सका। मुझे अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेनी चाहिये इस विचार से वह नदी की ओर चल पडा। उसे रास्ते में एक संत ध्यान में लीन बैठे दिखे। उसके मन में विचार आया कि मैं मृत्यु पथ पर तो जा ही रहा हूँ मरने से पहले इनका दर्शन लाभ ले लूँ। ऐसा विचार करके वहाँ पर उनके ध्यान समाप्ति का इंतजार करने लगा। ध्यान समाप्ति के पश्चात स्वामी जी ने उससे आगमन का प्रयोजन पूछा तब उसने स्वामी जी को अपने विषय में पूरी बातें विस्तारपूर्वक बता दी।

महात्मा जी उसकी बातें ध्यानपूर्वक सुन रहे थे। वे बोले कि तुम्हारी सोच सिर्फ यहाँ तक ही सही है कि इंसान को जीवन में उल्लेखनीय कार्य करके अपनी पहचान अवश्य बनाना चाहिये परंतु इसे पाने का तरीका तुम्हारा पूर्णतः गलत था। तुम तो बिना लक्ष्य का निर्धारण किये ही आगे बढते रहे जिस कारण तुम दिग्भ्रमित होकर कही भी नहीं पहुँच सके। तुमने अपने जीवन का अमूल्य समय बेवजह नष्ट किया और अब मृत्यु की बात सोचकर और भी गलत दिशा में कदम बढ़ा रहे हो। तुमने अपने लक्ष्य को पाने के लिये कितनी साधना की ? यह जीवन अमूल्य है एवं प्रभु की दी हुई सर्वोत्तम कृति है, तुम वापस जाओ और अपने पैतृक व्यवसाय में ही अपनी सफलता का लक्ष्य निर्धारित करके कड़ी मेहनत एवं कठोर परिश्रम से उसे प्राप्त करो।

स्वामी जी के निर्देश पर गोविंद वापस शहर आकर अपने पैतृक व्यवसाय में रूचि लेने लगा। उसकी कडी मेहनत और पक्के इरादे से उसका व्यवसाय चमक उठा जिससे धनोपार्जन के साथ साथ उसे र्कीर्ति भी प्राप्त होने लगी।

सीख- 
व्यक्ति को जीवन में सफल होने के लिये अपने विवेक से लक्ष्य का निर्धारण करके उसे प्राप्त करने की दिशा में सतत प्रयासरत रहना चाहिये।

साभार- रचनाकार ब्लॉग

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