नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 में मतदान करने के लिए विदेशों में बसे करीब 1 लाख भारतीयों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, लेकिन सिर्फ 25% ने अपने वोट डाले। चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, करीब 99,807 भारतीय विदेशों में रहते हैं और उन्हें भारत की नागरिकता नहीं मिली है। लेकिन, विभिन्न राज्यों की मतादाता सूची में उनका नाम शामिल है।
आयोग के मुताबिक इनमें 91850 पुरूष, 7943 महिलाएं और 14 ट्रांसजेंडर शामिल हैं। इस साल संपन्न हुए चुनाव में 24,458 पुरूष और 1148 महिलाओं ने मतदान किया।
केरल में 25,091 प्रवासी भारतीयों ने वोट डाला
दिल्ली से 336 प्रवासी भारतीयों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया था लेकिन कोई भी मतदान के लिए नहीं पहुंचे। इसी प्रकार, पुद्दुचेरी में 272 मतदाताओं में से कोई भी मतदान करने नहीं पहुंचे। पश्चिम बंगाल के 34 प्रवासी भारतीयों में से किसी ने भी मतदान नहीं किया।
केरल का आंकड़ा सबसे अलग रहा। यहां पर सबसे ज्यादा प्रवासी भारतीयों ने मतदान करने पहुंचे। आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, केरल में 85161 प्रवासी भारतीयों ने मतदान के लिए पंजीकरण कराया था और इनमें से 25,091 लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया।
प्रवासी भारतीयों के लिए प्रॉक्सी वोटिंग की सुविधा देनेवाला बिल 16वीं लोकसभा का कार्यकाल समाप्त होते ही खत्म हो गया था। कानून मंत्री इस बिल को केंद्रीय मंत्रिमंडल की अनुमति मिलने के बाद पुन: सदन में रखेंगे। प्रॉक्सी वोटिंग वह सुविधा है, जिसके तहत विदेश में रहने वाला कोई भारतीय मतदाता अपने प्रतिनिधि द्वारा मतदान कर सकता है। अभी तक यह सुविधा सिर्फ सैनिकों को ही मिली है।
वर्तमान में, पंजीकृत प्रवासी भारतीय अपने क्षेत्र जाकर मतदान कर सकते हैं। विदेश मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, करीब 3.10 करोड़ प्रवासी भारतीय विश्व के विभिन्न हिस्सों में रहते हैं। अधिकारियों का मानना है कि कई प्रवासी भारतीय सिर्फ मतदान करने के लिए धन खर्च करके भारत आना नहीं चाहते हैं।

