ठाणे। साध्वी श्री आणिमाश्रीजी एवं साध्वी श्री मंगलप्रज्ञाजी के सानिध्य में तेरापंथी सभा ठाणा के तत्वाधान में नवरात्र के महत्त्वपूर्ण अवसर पर दम्पति कार्यशाला का सफल आयोजन किया गया, जिसमे अच्छी संख्या में भाई-बहनों ने भाग लिया। इस अवसर पर सामूहिक निवी का अनुष्ठान भी करवाया गया।
साध्वी आणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा जीवन के आनंद, उल्लास एवं सामाजिक जीवन की सुख-शांति का आधार यदि सफल दाम्पत्य जीवन को कहा जाए तो उसमें तनिक भी अवयुक्ति नही होगी। दाम्पत्य जीवन पर पारिवारिक उन्नति एवं विकास निर्भर करता है। पति-पत्नी के सहयोग, एकता, परस्पर आत्मोत्सर्ग, त्याग, सेवा आदि से दाम्पत्य जीवन की सुखद और सर्वगीय अनुभूति सहज ही कि जा सकती है। आपसी सामंजस्य एवं विश्वास रूपी बरगद की छांव तले जीवन आनंद एवं खुशहाली से हराभरा हो सकता है। अगर पति पत्नी के विचारों में, भावों में सवेंदनशीलता हो तो जीवन समस्या नही समाधान बन सकता है। नारी शक्ति है तो पुरुष पौरुष है। शक्ति व पौरुष का समान प्रवाह नव सृजन के लिए नव निर्माण के लिए आवश्यक है।
साध्वी मंगलप्रज्ञाजी ने कहा दाम्पत्य संबध पारिवारिक जीवन की रीढ़ है। गृहस्थ जीवन की गाड़ी इन्ही दो पहियों के सहारे चलती है। पति-पत्नी एक दूसरे को समझते हुए जीवन को सरस एवं समरस बनाए। साध्वी श्रीजी ने खुशहाल दाम्पत्य के लिए कुछ संकल्पो को परिषद के सामने रखा, जिसे सभी दम्पतियों ने सहर्ष स्वीकार किया। आनंददायक पारिवारिक जीवन के लिए कुछ विशेष मंत्रो का अनुष्ठान भी साध्वी जी ने करवाया।
साध्वी सुधाप्रभाजी ने आओ जाने ज्ञान का पेरोमिटर कितना है आपके भीतर रोचक प्रतियोगिता का संचालन किया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए साध्वी मैत्रीप्रभाजी ने कहा स्वाद व विवाद बहुत ही महत्त्वपूर्ण शब्द है। स्वाद विजय न हो तो स्वास्थ्य बिगड़ता है। विवाद से रिश्ते खराब होते है इसीलिए दोनो की साधना करे।
जितेंद्र विमला बरलोटा, विमला संतोष गादिया, मदन वैजंती श्रीश्रीमाल, प्रवीण पुष्पा श्रीश्रीमाल, विजयलक्ष्मी संचेती, विक्रम रेणु राखेचा, मुकेश शिल्पा धोका, आनंद जयंती भंसाली, प्रिया मनोज श्रीश्रीमाल, निर्मल भारती ओस्तवाल ने मंगल संगान किया। हर्षा श्रीश्रीमाल, यशा भंसाली, दिव्या सांखला ने सुंदर नाटिका प्रस्तुत की प्रस्तुति दी।
ठाणे में दम्पति कार्यशाला का शानदार आयोजन

