जलगांव। शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री निर्वाणश्री जी के पावन सानिध्य में प्रातः कालीन प्रवचन में खचाखच भरे अणुव्रत भवन के प्रांगण में साध्वी श्री डॉ योगक्षेमप्रभा जी , साध्वी लावण्य प्रभा जी ,साध्वी कुंदन यशाजी ,साध्वी मुदित प्रभा जी एवं साध्वी मधुर प्रभा जी ने सुमधुर गीतिका की प्रस्तुति दी। साध्वी श्री डॉक्टर योगक्षेम प्रभा जी ने श्रावक समाज को पर्वाधिराज पर्युषण में अपने आप को पूर्ण रूप से तैयार करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सभी धर्मावलंबी अपने अपने धर्मों को अपने हिसाब से मनाते हैं चाहे हिंदू हो या मुसलमान ,दिगंबर परंपरा में 10 दिन का 10 लक्ष पर्व मनाया जाता है वही श्वेतांबर परंपरा में हम इसे आठ दिवसीय पर्यूषण के रूप में मनाते हैं तथा एक-एक दिन की अलग-अलग रूप से आराधना करते हैं ।
इस कार्यक्रम में कन्या मंडल द्वारा एक आकर्षक पर्यूषण गाड़ी, झांकी प्रस्तुत की गई जिसमें लाल दुपट्टे पर अंकित दिवस के नाम को धारण किए हुए कन्याओं ने एक-एक दिन का महत्व बताया तथा कन्या मंडल संयोजिका सुश्री आकांक्षा रांका ने संयोजन करते हुए श्रावक समाज से इस गाड़ी में सवारी करने का आह्वान किया। विदुषी साध्वी श्री निर्माणश्रीजी ने अपने मंगल उद्बोधन में पर्यूषण पर्व को किस रूप में मनाया जाए तथा सभी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पर्यूषण के दौरान अपने आपको ज्यादा से ज्यादा अध्यात्म से जुड़ने की प्रेरणा दी तथा पर्युषण के दौरान होने वाले प्रातः कालीन प्रवचन व रात्रि कालीन कार्यक्रम के बारे में बताया तथा कन्या मंडल द्वारा प्रस्तुत झांकी की ओर इशारा करते हुए कहा की सभी को जप,तप,स्वाध्याय एवं खाद्य संयम को विशेष लक्ष्य बनाते हुए पर्युषण पर्व की आराधना करनी चाहिए।
जलगांव में पर्युषण की तैयारियों में जुटने हेतु साध्वीवृन्द ने दिए प्रेरणा

