मुंबई। विजयादशमी का पावन महापर्व हम सभी के लिए परम गौरव, कृतज्ञता और ऐतिहासिक आनंद का स्वर्णिम क्षण हैः पारस दुग्गड़
मुंबई जैसे व्यस्ततम महानगर में जहां स्थान का अभाव और समय की चुनौती सदैव रहती है, वहां बिना खुद के स्थायी स्थान के भी प्रेक्षाध्यान योग साधना केंद्र (अशोक नगर, कांदिवली, मुंबई) ने सेवा और साधना का अद्वितीय इतिहास रच दिया है। वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक पारस दुग्गड़ यह प्रेक्षाध्यान योग साधना केंद्र 30 वर्षों से संचालित कर रहे हैं, विजयादशमी के पावन अवसर पर 30वां वर्षगांठ मनाया गया।
अगर हम पारस दुग्गड़ और प्रेक्षाध्यान योग साधना के प्रमुख उपलब्धियों की बात करें तो –
अखंड सेवा: पिछले 30 वर्षों से लगातार, वर्ष के 365 दिन, बिना एक भी दिन के अवकाश (Zero Days Off) के यह साधना अनवरत जारी है।
विश्व का पहला केंद्र: प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिना किसी रुकावट के 30 वर्षों तक लगातार संचालित होने वाला यह विश्व का पहला प्रेक्षाध्यान केंद्र बन गया है।
पूर्णतः निःशुल्क: स्थापना के पहले दिन से लेकर आज तक, यह केंद्र पूरी तरह निःस्वार्थ भाव से जन-कल्याण हेतु निःशुल्क संचालित है।
गुरु-कृपा और संतों का सान्निध्य: प्रेक्षाध्यान के प्रणेता युगप्रधान आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की इस केंद्र पर सदैव असीम कृपा रही थी। वर्तमान में अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण जी का पावन आशीर्वाद निरंतर इस केंद्र पर बरस रहा है। स्वयं आचार्य श्री महाश्रमण जी ने दो बार इस केंद्र का पावन अवलोकन किया है। साथ ही, साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभा जी एवं साध्वीवर्या श्री सम्बुद्धयशा जी भी केंद्र का एक बार अवलोकन कर इसे पावन कर चुकी हैं। समय-समय पर अनेक चारित्र आत्माओं के पावन पदार्पण से यह स्थल आध्यात्मिक ऊर्जा का दिव्य स्रोत बन चुका है।
संकल्प, साधना और समर्पण: इस 30 वर्षीय अखंड यात्रा की रीढ़ हैं-वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री पारसमल जी दुगड़ एवं उनकी धर्मपत्नी वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षिका श्रीमती विमलादेवी दुगड़। दोनों की अटूट संकल्प शक्ति, निष्काम सेवा और कठोर साधना ही इस केंद्र की सबसे बड़ी शक्ति है। साथ ही, समर्पित सहयोगी टीम का कुशल प्रबंधन, वर्षों से जुड़े नियमित साधकों की निष्ठा और प्रतिदिन जुड़ने वाले नए भाई-बहनों का विश्वास ही इसे विश्व का सबसे लोकप्रिय केंद्र बनाता है।
अखंड साधना के 30 वर्ष, गुरु-कृपा, संकल्प और निःस्वार्थ सेवा की मिसाल
Highlights
- विजयादशमी का पावन महापर्व हम सभी के लिए परम गौरव, कृतज्ञता और ऐतिहासिक आनंद का स्वर्णिम क्षणः पारस दुग्गडड

