बीजिंग:चीनी अधिकारी और सरकारी थिंक टैंकों से जुड़े विशेषज्ञ अपनी प्राथमिकता नरेंद्र मोदी को बता रहे हैं। सरकार समर्थित अखबार ग्लोबल टाइम्स ने शिन्हुआ विश्वविद्यालय के रिसर्च फेलो लु यांग का एक लेख छापा है, जिसमें मोदी की वापसी की भविष्यवाणी की गई है। लु ने लिखा है, ‘‘इस बात में कोई संदेह नहीं है कि मोदी की भारतीय जनता पार्टी संसद में सबसे बड़ा दल होगा। मोदी का राजनीतिक कद अन्य प्रत्याशियों को पीछे छोड़ रहा है और भाजपा की वित्तीय और संगठन शक्ति विपक्ष से बहुत अधिक है। इससे साफ है कि मोदी को संभवत: एक और मौका मिल जाएगा।’’
जिनपिंग-मोदी के बीच अनौपचारिक बैठक की तैयारी शुरू
चीन के कम्युनिस्ट नेताओं ने साफ कर दिया है कि लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी की प्रधानमंत्री के तौर पर वापसी हो रही है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने हाल ही में घोषणा की है कि उनकी सरकार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और मोदी के बीच अगली ‘अनौपचारिक मीटिंग’ की तैयारी कर रही है, जो पिछले साल चीन के वुहान शहर में हुई मीटिंग की तर्ज पर होगी। इस बार यह भारत के किसी शहर में होने की उम्मीद है। विदेश नीति के संदर्भ में चुनाव के समय एक साल की तैयारी का संकेत देना जोखिम भरा माना जाता है, क्योंकि चुनाव के बाद विपक्षी नेता की सत्ता में वापसी की संभावना हर समय बनी रहती है।
लेकिन, चीन नपा-तुला जोखिम उठा है, क्योंकि उसे मोदी की वापसी की पूरी उम्मीद है। वांग ने चुनाव के दौरान यह घोषणा करके साफ कर दिया है कि मोदी को चुनाव के बाद दोबारा मौका मिल रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी के बीच वुहान की बैठक बहुत ही सफल रही थी। विशेषकर दोनों नेताओं ने आपसी भरोसा कायम करने के साथ भारत-चीन संबंधों को मजबूत बनाने और इनमें सुधार की संयुक्त योजना बनाई थी। वांग कहते हैं कि वुहान सम्मिट के बाद हमने सहयोग के सभी क्षेत्रों में सुधार देखा।
चीनी मीडिया में मोदी के प्रचार के फोटो-वीडियो
चीनी टेलीविजन, अखबार और न्यूज पोर्टल प्रधानमंत्री मोदी के चुनाव प्रचार की फोटो और वीडियो दिखा रहे हैं। इनमें 23 अप्रैल को मोदी के अहमदाबाद में वोट डालने के बाद स्याही लगी अंगुली दिखाने की फोटो भी शामिल है।
चीन कमजोर गठबंधन सरकार नहीं चाहता
कम्युनिस्ट चीन सामान्यत: उन मजबूत नेताओं का समर्थन करता है जो लंबे समय तक लटकाने की बजाय फैसले ले सकते हैं, क्योंकि लोकतांत्रिक और स्वतंत्र न्यायपालिका वाले देशों में अक्सर ऐसा होता है। चीन भारत में एक मजबूत नेता चाहता है, क्योंकि चीनी निवेशक भारतीय बाजार को ग्रोथ के प्रमुख क्षेत्र के तौर पर देखते हैं। यह इस बात से स्पष्ट है कि भारत में मोबाइल फोन के 60 फीसदी बाजार पर चीनी ब्रांड का कब्जा है। चीन नई दिल्ली में एक कमजोर गठबंधन सरकार नहीं चाहता जो विदेशी निवेश के प्रस्तावों पर तेज फैसले नहीं ले सकेगी।
चीन में ऐप पर चुनावी चर्चा
अमेरिका की तरह चीन में राजनीतिक दलों के लिए फंड जुटाने के लिए भारतीय समुदाय की डिनर मीटिंग तो नहीं हो रही हैं, लेकिन यहां रहने वाले भारतीय व्हाट्ऐप और वीचैट जैसे चीनी ऐप के जरिए गंभीर चर्चा कर रहे हैं। इन लोगों में किसी अन्य नेता की तुलना में मोदी के फैन्स की संख्या अधिक है, क्योंकि इनमें अधिकतर व्यापारी हैं।
दक्षिण चीन में फैक्टरी के मालिक राजेश पुरोहित कहते हैं कि ‘मोदी के अंतरराष्ट्रीय दौरों और उनके प्रभाव ने चीनियों की नजर में भारतीयों का स्तर ऊंचा किया है और साथ ही भारतीय पासपोर्ट के सम्मान को बढ़ाया है।’ पुरोहित कहते हैं कि ‘2014 से पहले चीन में भारतीयों को उस सम्मान से नहीं देखा जाता था, जैसा अब नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद देखा जाने लगा है। यह सम्मान भारतीयों के सामाजिक स्तर और व्यापार दोनों के लिए ही बहुत जरूरी है।’
हालांकि, मोदी के शासन में डाेकलाम सहित भारत व चीन के बीच पहले की तुलना में अधिक विवाद देखे गए। इनके अलावा मोदी द्वारा चीन के बेल्ट रोड कार्यक्रम से दूर रहना और मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित करने पर चीन की ओर से रोड़ अटकाना शामिल है। आश्चर्यजनक यह है कि इन विवादों के बावजूद चीन में भारत का सम्मान ऊंचा हुआ है क्योंकि चीन ताकत और उसके सामने खड़े होने की किसी भी देश की क्षमता का सम्मान करता है और भारत इसमें अभी तक चीन की नजर में अव्वल बना हुआ है।

