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कोंकण स्तरीय जैन जीवन शैली कार्यशाला एवं शपथ ग्रहण समारोह

Last updated: April 4, 2019 8:31 pm
Surabhi Saloni
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5 Min Read
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जन-जन की जीवन शैली है जैन जीवन शैली – मुनि जिनेश कुमार
महाड़। महातपस्वी आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी दाणा -2 दो के सानिध्य में एवं स्थानकवासी साध्वी संयमलता ताजी दाणा-4 की मंगल उपस्थिति में तथा जैन श्वेतांबर तेरांपथी महासभा के सह मंत्री रमेश सुतरिया के मुख्य आतिथ्य में स्थानीय वीर ईश्वर मंदिर और मैं किसके लिए जैन जीवन शैली का रिश्ता कार्यशाला एवं शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन स्थानीय श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा द्वारा किया गया इस अवसर पर प्रमुख अतिथि पूर्व विधायक माणक जगताप व सम्माननीय अतिथि महासभा कार्यसमिति सदस्य पारस कोठारी थे।
जैन जीवन शैली कार्यशाला में उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए मुनि दिनेश कुमार जी ने कहा दुनिया में अनेक प्रकार की जीवन शैलियां प्रचलित है, उनमें एक महत्वपूर्ण जीवन शैली है -जैन जीवन शैली। जैन दर्शन पर आधारित आचार्य तुलसी द्वारा निरूपित जैन जीवन शैली प्रत्येक वर्ग, संप्रदाय, लिंग, और जाति के लिए उपयोगी है। संक्षेप में कहें तो यह जन जन की जीवन शैली है। सम्यग् दर्शन, अनेकांत, अहिंसा, समण संस्कृति, इच्छा परिमाण, सम्यक् आजीविका, सम्यक् संस्कार, आहार शुद्धि – व्यसन मुक्ति और साधार्मिक वात्सल्य ये जैन जीवन शैली के 9 सूत्र है। उन्होंने आगे कहा जीवन जीना एक बात है पर कलात्मक ढंग से जीवन जीना बिल्कुल दूसरी बात ह।ै कलात्मक जीवन जीने की पद्धति का नाम है जैन जीवन शैली। वर्तमान युग में आधुनिकता वह भौतिकता बढ़ती जा रही है जिसमें सांस्कृतिक मूल्यों का पतन होता जा रहा है। अपेक्षा है जैनी संयमित एवं श्रम शील बने। आडंबर प्रदूषण से मुक्त बन कर सादगीमय जीवन की एक मिसाल प्रस्तुत करें।
इस अवसर पर साध्वी संयमलता जी ने कहा सकारात्मक सोच, असहजता, सरलता, विनम्रता, वाणी की मधुरता व कथनी करनी की समानता हमारी जीवन शैली के आधार सूत्र होने चाहिए। जैनों को फाइव स्टार होटलों में शादिया,ं रात्रि भोजन, जमीकंद से दूर रहने का संकल्प लेना चाहिए।
इस अवसर पर श्री रमेश जी सुतरिया ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कार्यकर्ता अपनी अर्हता का अवश्य विकास करें। किसी भी कार्य को अंजाम तक पहुंचाने के लिए योजना, विमर्श, निर्णय, कार्य विभाजन एवं अनुशासन का होना जरूरी है।
श्रावक् निष्ठा पत्र का वाचन पारस कोठारी ने करवाया। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ महिला मंडल के मंगलाचरण से हुआ। स्वागत भाषण वरिष्ठ श्रावक लादूलाल गांधी ने प्रस्तुत किया। उपासिका स्मिता गांधी ने अपने विचार व्यक्त किए। तेरापंथ महिला मंडल की बहनों ने जैन जीवन शैली गीत प्रस्तुत किया। कार्यशाला के द्वितीय सत्र में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित हुआ।

जिसमें अपने विचार व्यक्त करते हुए मुनि श्री जिनेश कुमार जी ने कहा कोंकण प्रदेश हरा भरा है। यहां श्रद्धा के अनेक परिवार निवास करते हैं। उन्हें संगठित करने व संघीय गतिविधियों से जोड़ने के लिए तेरापंथ युवक परिषद तेरापंथ महिला मंडल का गठन किया गया है। दायित्व ग्रहण करना बड़ी बात नहीं है दायित्व को निभाना बड़ी बात है। दायित्व को भार नहीं उपहार समझे। संगठन में शक्ति है। मैं सभी
इस अवसर पर मुख्य अतिथि पूर्व विधायक माणक जगताप ने अपने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा 125 करोड़ की जनसंख्या में सिर्फ 50 लाख जैन है, फिर भी देश की प्रगति में उनका महत्वपूर्ण हिस्सा है। भगवान महावीर के विचारों को अमल में लाया जाए तो भारत महासत्ता बन सकता है।
तेरापंथ युवक परिषद रायगढ़ के अध्यक्ष विक्रम कोठारी, तेरापंथ युवक परिषद रत्नागिरी के अध्यक्ष दीपक श्रीमाल, तेरापंथ महिला मंडल रायगढ़ की अध्यक्षा सीमा गांधी, तेरापंथ महिला मंडल रत्नागिरी के अध्यक्षा मंजू मांडोत ने अपनी नवगठित कार्यकारिणियों की घोषणा की।
तेरापंथ सभा के सहमंत्री रमेश जी सुतरिया ने नवगठित कार्यकारिणियों को शपथ ग्रहण करवाई।
इस अवसर पर कोंकण मदारिया साजनान के अध्यक्ष जी देसरला, तेरापंथ सेवा समिति कोंकण के संयोजक बाबूलाल गांधी, चंदूलाल कोठारी, अशोक जैन आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। आभार ज्ञापन तेरापंथी सभा महाड़ के अध्यक्ष संतोषजी देरासरिया ने किया।
कार्यक्रम का संचालन मुनि परमानंद व श्री जैन संघ के अध्यक्ष पवन देसरला ने संयुक्त रूप से किया। अतिथियों का साहित्य सम्मान किया गया। कार्यक्रम में दापोली, खेड़ा, चिपलूण, माण गाँव, रोहा, गोरेगांव, दासगांव रत्नागिरी आदि क्षेत्रों से अच्छी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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