जामनेर। आध्यात्मिक चेतना के उन्नायक आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वी श्री निर्वाणश्रीजी ठाणा-6 के पावन सानिध्य में होली चातुर्मास का कार्यक्रम जामनेर नगरी में सानंद संपन्न हुआ! इस अवसर पर उपस्थित विशाल जनमेदनी को सम्बोधित करते हुए विदुषी साध्वी श्री निर्वाणश्रीजी ने कहा – छह लेश्यांए हमारे आन्तरिक भावों का परिचायक है! लेश्या ध्यान के प्रयोग आभामंडल को उज्जवल बनाने का प्रयोग है! जैन तिर्थंकरों या महापुरुषों के चित्रों में चेहरे के पीछे एक वॄत्ताकार चित्र होता है, जिसे हम औरा/ भामंडल या आभामंडल कहते है!
भावधारा की पवित्रता आभामंडल को पवित्र रंगो से भर देती है, फलत: कर्मों का आगमन कम हो जाता है! होली का पर्व हमारे मानस को विशुद्ध बनाने वाला पर्व है!
साध्वीश्री ने कहा – जीवन में रंगो का बड़ा महत्व है! जब रंगो की कमी होत है, व्यक्ति बीमार हो जाता है. होली के तीन मुख्य रंगो के साथ आज हम होली पर्व मनाएंगे!
प्रबुद्ध साध्वी श्री डॉ योगक्षेमप्रभाजी ने अपने संयोजकीय वकतव्य में कहा – परमेष्ठी पंचक के रंगो का ध्यान, वॄतियों के परिष्कार का श्रेष्ठ माध्यम है! पवित्रता, भक्ति, निरामयता, सहनशीलता जैसे शाश्वत गुणों के विकास का माध्यम है रंगों का ध्यान! भक्ति एवं श्रद्धा के गुलाबी व रक्त वर्ण से रंगा यह जामनेर नगर सचमुच एक उदाहरण बन रहा है! जामनेर श्री संघ का यह आयोजन सफल हो रहा है! साध्वी लावण्यप्रभाजी, साध्वी कुंदनयशाजी, साध्वी मुदितप्रभाजी, साध्वी मधुरप्रभाजी ने पचरंगे रंगो के प्रतिक नवकार मंत्र के पंच पदों की विभिन्न राग-रागिनियों में प्रस्तुति दी जिससे सभी हर्ष विभोर हो उठे!
कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल संगान से हुआ, जिसे साध्वी मधुरप्रज्ञाजी ने स्वर दिया! समागत अतिथियों का स्वागत श्री ओसवाल जैन संघ के मंत्री इश्वरचंदजी साबद्रा ने किया! खान्देश सभा के अध्यक्ष अनिलजी सांखला ने अपने ह्द्योद्गार प्रकट किए! आनंद संगीत मंडल की बहनों व जामनेर जैन महिला मंडल की बहनों ने गीत की मधुर स्वर लहरियाँ प्रस्तुत की! इस अवसर पर जामनेर संघ की और से नमस्कार महामंत्र के रंगो के प्रतीक दुप्पटे से समागत अतिथियों को सन्मानित किया गया! धन्यवाद ज्ञापन जामनेर तेरापंथ समाजे के कर्मठ कार्यकर्ता पवनजी सांखला ने किया! इस अवसर पर साध्वीश्रीजी ने भाई-बहनों को ध्यान का सरस प्रयोग करवाया! होली चातुर्मास के इस विशिष्ठ आयोजन में धुलिया, भुसावल, जलगाँव, अमलनेर आदि कई क्षेत्रों से श्रद्धालु उपस्थित हुए!
होली चौमासी पक्खी के अवसर पर साध्वीश्रीजी व्दारा हाजरी वाचन किया गया! इस मौके पर अनेक भाई-बहनों ने उपवास, बेला, तेला के तप का प्रत्याख्यान किया! कार्यक्रम को सफल बनानें में सुरेशजी ललवाणी, इश्वरजी ललवानी, सुरेंद्रजी कुचेरिया व पवनजी सांखला आदि का सक्रिय सहयोग रहा!
होली के रंग – संतो के संग: जामनेर में होली चातुर्मास का अदभूत नजारा

