मुंबई। प्रेक्षा फाउंडेशन के तत्वावधान में प्रेक्षाध्यान योग साधना केंद्र अशोकनगर मुंबई का 30 वां स्थापना दिवस प्रकृति के सुरम्य वातावरण में मांडवी रिसार्ट विरार में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नमस्कार महामंत्र के उच्चारण के साथ वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक दुगड़ दंपति द्वारा किया गया। इसके बाद मंगलाचरण आत्म साक्षात्कार प्रेक्षाध्यान के द्वारा प्रेक्षा गीत की सुमधुर स्वर लहरियों के साथ केंद्र के सभी प्रशिक्षक प्रशिक्षिकाओं द्वारा किया गया।
वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षक पारसमल दुगड़ ने अपने प्रभावशाली एवं सारगर्भित वक्तव्य में प्रेक्षाध्यान की व्यवस्थित सुंदर जानकारी देते हुए कहा आज मनुष्य पदार्थ में ही आनंद मानता है। गर्मी बहुत ज्यादा है पंखा वह ऐसी अच्छे लगते हैं उसे बाह्य पदार्थ से आनंद की अनुभूति होती है भूख लगने पर गरिष्ठ भोजन फ्राई चीजें प्यास लगने पर फ्रीज का चील्ड पानी सब अच्छे लगते हैं उन्होंने कहा पदार्थ निरपेक्ष आनंद केवल भीतर ही खोजा जा सकता है । भगवान महावीर 6 -6 महीने तक भूखे प्यासे रहे तपस्या के साथ ध्यान में रहे तो भीतरी आनन्द बढ़ता गया कष्टों का कहर बरसता गया लेकिन उनका आनन्द सदैव बढता रहा। इसका मुख्य कारण वो पदार्थ आनन्द से निरपेक्ष थे।
प्रेक्षाध्यान की साधना आत्म साक्षात्कार का अचुक उपाय है।श्री दुगड ने दीर्घ श्वांस प्रेक्षा का आधा घंटा का ध्यान करवाया । लाडनूं में लगने वाले शिविरों की जानकारी दी एवं भाग लेने की प्रेरणा दी।
यह मुंबई का यह केंद्र 30 वर्षों से आध्यात्मिक विकास के लिए व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए स्वस्थता के लिए निःशुल्क व निःस्वार्थ भाव से दुगड दंपति के संचालकत्व में जबरदस्त कार्य कर रहा है मुंबई जैसी नगरी में मोहमयी मायावी नगरी में जहां मिट्टी के पैसे लगते हैं। ऐसी नगरी में एक केंद्र 30 वर्षों से पूर्णतया निःशुल्क चल रहा है। 365 दिन चलने वाला विश्व का नंबर वन बन गया है स्वयं का स्थान नहीं होने के बावजूद भी बहुत सुंदर कार्य हो रहा है। वर्तमान में इस केंद्र के 3 केंद्र और चल रहे हैं। टेरेस से टी वी तक की यात्रा, शुन्य से शिखर तक की यात्रा अनेक कठिनाइयां अनेक अवरोधों के बाद गुरुदेव की असीम अनुकम्पा एवं आशीर्वाद से सफलता पूर्वक पार किया है। इस अवसर पर आचार्य श्री महाश्रमण जी,साध्वी प्रमुखा श्री जी, एवं साध्वीवर्या श्रीजी ने आध्यात्मिक मंगल कामना द्वारा आशिर्वाद प्रदान किया। सर्दी गर्मी आंधी तूफान बारिश में भी बन्द नहीं रहने वाला यह केन्द्र सुनकर आश्चर्य लगता है लेकिन यह हकीकत है। इंदिरा गांधी गार्डन प्रेक्षाध्यान केंद्र एवं आकुर्ली माता मंदिर प्रेक्षाध्यान केंद्र दोनों केन्द्रों की बहनों ने गीतों द्वारा सुन्दर प्रस्तुति दी। योगिनी बेन ने मराठी में कविता प्रस्तुत की ।श्रीमती विमलादेवी दुगड 30 वर्षों के इतिहास की सुंदर जानकारी सभी साधक साधिकाओं के माध्यम से प्रेक्षा ट्रेन के द्वारा दी जिसकी सभी ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
इस अवसर पर प्रशिक्षक स्व.देवेंद्र पामेचा का सम्मान मरणोपरान्त अमुल्य सेवाओं के लिए उनकी धर्मपत्नी का सम्मान किया गया।मधुजी मीनाजी ने गीत के द्वारा अपने प्रस्तुति दी कार्यक्रम का कुशलता पूर्वक संचालन प्रशिक्षक भागवत जोशी एवं शान्ता बेन ने बड़ी कुशलता पूर्वक किया।
प्रेक्षाध्यान योग साधना केंद्र मुंबई का 30 वां स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मांडवी रिसार्ट में मनाया गया

