चेन्नई। साध्वी श्री उदितयशा जी ने कहा कि आत्मा-राज्य की नागरिकता प्राप्त करने के लिए मन, वचन और काया की अशुभ प्रवृत्तियों को सुलाना होगा। पर्यूषण आत्म-जागरण और आत्म-शुद्धि का पर्व है।
उन्होंने बताया कि ‘पर्यूषण’ का अर्थ है-चारों ओर से सिमटकर एक स्थान पर निवास करना, अर्थात् बाहरी संसार से हटकर अपने भीतर की ओर लौटना। यह पर्व लगभग ढाई-तीन हजार वर्षों से मनाया जाता आ रहा है और भगवान महावीर के युग से इसकी गौरवशाली परंपरा जुड़ी हुई है।
उन्होंने कहा कि हमें मूर्छा, मोह और प्रमाद को कम कर जागृति की ओर बढ़ना है। पर्यूषण की यात्रा राग-द्वेष से ऊपर उठकर जागृति से वीतरागता की ओर जाने की यात्रा है। भगवान महावीर का जीवन इसी आत्म-जागरण और वीतरागता की यात्रा का प्रेरणादायी उदाहरण है। साध्वी श्री संगीत प्रभा जी ने फरमाया भगवान ऋषभ के पूर्व जन्म का वर्णन करते हुए आधी युग के आदिश्वर सम्यक दर्शन की प्राप्ति का वर्णन करते हुए नौ कोटि परिषद भिक्षा के महत्व बताएं ।। साध्वी श्री भव्यशा जी एवं साध्वी श्री शिक्षा प्रभा जी ने सुमधुर गीतिका का संगान किया। साध्वी श्री शिक्षा प्रभाजी आज का दिवस खाद्य संयम दिवस पर अपने विचार व्यक्त किए।
खाद्य संयम दिवस – चेन्नई: पर्यूषण : आत्म राज्य की नागरिकता स्वीकार करें

