विलेपार्ले {मुंबई} विकास धाकड़/आचार्यश्री महाश्रमणजी की विदुषी सुशिष्या साध्वीश्री राकेश कुमारीजी,साध्वीश्री मलयविभाजी,साध्वी श्रीविपुलयशाजी, साध्वीश्री चेतस्वीप्रभाजी के पावन सानिध्य में,तेरापंथ युवक परिषद के तत्वावधान में मनोहरलालजी श्रीमती हेमाजी कोठारी के भव्य प्रांगण में पैंसठिया छंद अनुष्ठान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। साध्वी राकेश कुमारीजी नें नमस्कार महामंत्र से कार्यक्रम की सुरुवात की। साध्वी मलयविभाजी,साध्वी विपुलयशाजी व साध्वी चेतस्वीप्रभाजीने कृषभाय नमः
स्वर लहर द्वारा मंगलाचरण किया। साध्वी राकेशकुमारीजी ने श्रद्धालुओं को सम्बोधित करते हुए कहा- तू ही है अपने भाग्य का निर्माता विषय को स्पष्ट करते हुए पैंसठिया मंत्र यंत्र छंद के बारे में जानकारी दी। साध्वीश्री ने कहा आप सभी के जीवन में कोई न कोई समस्या, दुःख, तनाव परिवार में क्लेश, व्यापार में बाधा, सेहत की अव्यस्थता आदि ये सब क्यों ? साध्वीश्री ने कहा कहीं ना कहीं हमारे कर्म और ग्रह दोष बधाएं उपस्थित कर रहे हैं। जैन शासन में पैंसठिया यंत्र छंद का बहुत बड़ा महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पैंसठिया शब्द का अर्थ है-651।
ये पैंसठ पदों की स्तुती मंत्र है इसमें 24 तीर्थंकर, गणधर, आचार्य, उपाध्याय, जैन साधुओं को वंदन किया गया है। जैन आगमो में बताया गया है जिस घर में पैंसठिया छन्द का जाप होता है वहां नकारात्मक उर्जा नहीं टिकती। इससे कर्मो की निर्जरा भी होती है। इसने आत्मा पर आया हुआ कर्मों का आवरण हटता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इसकी उपयोगिता सिद्ध होती है। यंत्र एक उर्जा का केन्द्र है। छन्द का अलौकिक प्रभाव होता है। जब हम सामूहिक रूप में लय के साथ मंत्र का उच्चारण करते है तो हमारे शरीर के अन्दर और बाहर वाइब्रेशन बनता है। यह वाइब्रेशन मन को शांत, वातावरण को पवित्र करता है। जब समूह में लयबद्ध गाते हैं तो 100 गुणा उर्जा बढ़ जाती है। इससे व्यक्ति को तीन लाभ की प्राप्ति होती है, आज के परिवेश में पहला लाभ- शांति व उर्जा की प्राप्ति होती है मन शांत होता है। निर्णायक शक्ति का विकास होता है। दुसरा लाभ – ग्रह दोष शांत रहते है। शनि राहू मंगल ग्रह, के कारण जो बाधाएं अड्चने आती है उसका प्रभाव कम होता है। तीसरा लाभ – जब हम शुद्ध भाव से पैंसठिया छंद अनुष्ठान करते है देव देविया भी प्रसन होकर सुरक्षा प्रदान करते हैं। विधि पूर्वक पैंसठिया छंद मंत्र यंत्र का अनुष्ठान व्यवस्थित ढंग से साध्वी श्री ने कराया। उपस्थिति सराहनीय रही । बान्द्रा, सांताक्रुज, खार, अँधेरी , पार्ला, जोगेश्वरी, के श्रावक श्राविकाओं ने उत्साह से भाग लिया। युवक परीषद अध्यक्ष महेन्द्र जी बडाला के यह जानकारी दी।
साध्वी राकेशकुमारीजी आदि साध्वी वृंद के पावन सानिध्य में पेसंठिया छंद का सुंदर आयोजन

