मुंबई। माणक गणि ज़ोन, कालूगणि ज़ोन एवं डालगणी ज़ोन के संयुक्त तत्वावधान में तेरापंथ युवक परिषद द्वारा दिनांक 2 अगस्त 2026 (रविवार) को भव्य मंत्र दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम शासन श्री साध्वी श्री विद्यावती जी द्वितीय आदि ठाणा-5 के पावन सान्निध्य में सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का मंगल प्रारंभ साध्वी श्री प्रियंवदाजी द्वारा णमोकार महामंत्र के मंगल उच्चारण से हुआ। तत्पश्चात शासन श्री साध्वी श्री विद्यावती जी द्वितीय ने बच्चों को मंत्र दीक्षा प्रदान कर आध्यात्मिक जीवन की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का कुशल संचालन भी साध्वी श्री प्रियंवदाजी ने किया।
कार्यक्रम में आंचलिक संयोजिका श्रीमती राजश्री कच्छारा जी एवं आंचलिक सह-संयोजिका श्रीमती अंजु चौधरी जी की गरिमामयी उपस्थिति रही। बोरीवली, कांदिवली, मलाड, गोरेगांव, जोगेश्वरी, संतोष नगर, महावीर नगर, दहिसर, मीरा रोड, भायंदर सहित 12 ज्ञानशालाओं के लगभग 250 बच्चों एवं 100 प्रशिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। साथ ही इन सभी क्षेत्रों की सभा के अध्यक्ष, मंत्री तथा तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष एवं मंत्रियों की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा में चार चाँद लगा दिए।
अपने प्रेरक उद्बोधन में शासन श्री साध्वी श्री विद्यावती जी द्वितीय* ने कहा कि गणाधिपति आचार्य श्री तुलसी के मन में यह चिंतन आया कि लाखों रुपये खर्च कर बच्चे विद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षा तो प्राप्त करते हैं, किंतु उनके संस्कारों का क्या? इसी चिंतन से ज्ञानशाला जैसे संस्कार निर्माण अभियान का जन्म हुआ, जहाँ बच्चों के जीवन में नैतिकता, अनुशासन, आध्यात्मिकता और संस्कारों का बीजारोपण किया जाता है। उन्होंने ज्ञानशाला की प्रशिक्षिकाओं की निस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए कहा कि वे समाज की भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माण का महान कार्य कर रही हैं।
कांदिवली तेरापंथ युवक परिषद के मंत्री श्री विमल जी धाकड़ ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। *श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन के मंत्री श्री जगदीश जी परमार ने मंत्र दीक्षा के महत्व पर प्रेरक विचार व्यक्त किए। आंचलिक सह-संयोजिका श्रीमती अंजु चौधरी जी ने कहा कि आज ज्ञानशाला का वटवृक्ष निरंतर फल-फूल रहा है। जैन धर्म एवं तेरापंथ के जीवन मूल्यों को बच्चों तक पहुँचाने में ज्ञानशाला की महत्वपूर्ण भूमिका है। बच्चों द्वारा प्रस्तुत अहिंसा विषयक मनोहारी प्रस्तुति भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में उतारने का सशक्त संदेश देती है।
आंचलिक संयोजिका श्रीमती राजश्री कच्छारा जी* ने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को नियमित रूप से ज्ञानशाला भेजें, जिससे उनमें धर्म, संस्कार और अनुशासन के श्रेष्ठ मूल्य विकसित हों तथा धर्म के प्रति उनकी रुचि बढ़े। डालगणी ज़ोन की ज़ोन संयोजिका श्रीमती चंदा जी धाकड़* ने बच्चों एवं अभिभावकों को ज्ञानशाला से निरंतर जुड़े रहने तथा मंत्र दीक्षा के संस्कारों को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ज्ञानशाला केवल शिक्षा का नहीं, बल्कि संस्कार, व्यक्तित्व एवं चरित्र निर्माण का श्रेष्ठ केंद्र है।
इस अवसर पर डालगणी ज़ोन की संयोजिका श्रीमती चंदा जी धाकड़, कालूगणि ज़ोन की संयोजिका श्रीमती मीता जी गुंदेचा तथा माणकगणि ज़ोन की संयोजिका श्रीमती भावना जी सांखला* के नेतृत्व में तीनों ज़ोन की समस्त प्रशिक्षिकाओं ने अथक परिश्रम, समर्पण एवं लगन के साथ बच्चों को तैयार किया। उनके उत्कृष्ट मार्गदर्शन में बच्चों ने अहिंसा विषय पर अत्यंत प्रभावशाली, अनुशासित एवं भावपूर्ण प्रस्तुति देकर उपस्थित सभी श्रद्धालुओं का मन मोह लिया तथा भगवान महावीर के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का प्रेरक संदेश दिया।
मलाड तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री सुनील जी धींग ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी साध्वीवृंद, पदाधिकारियों, प्रशिक्षिकाओं, अभिभावकों एवं बच्चों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस पूरे कार्यक्रम के प्रायोजक श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउंडेशन था।
श्री तुलसी महाप्रज्ञ फाउण्डेशन अध्यक्ष मेघराज जी धाकड़, मंत्री जगदीश जी परमार, कोषाध्यक्ष महेंद्र जी कच्छारा, कांदिवली तेरापंथी सभा अध्यक्ष मिठालाल जी धाकड़, मंत्री विनोद जी कोठारी,युवक परिषद के निवर्तमान अध्यक्ष राजेंद्र जी दुगड़, कोषाध्यक्ष हर्षल चोपड़ा, सहमंत्री अभिषेक चपलोत,महिला मंडल अध्यक्षा निर्मला जी कोठारी आदि पदाधिकारियों की गरिमा मय उपस्थिति रही।
भक्ति, संस्कार और आध्यात्मिक चेतना से ओत-प्रोत यह आयोजन सभी के लिए प्रेरणादायी एवं अविस्मरणीय रहा। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि ज्ञानशाला ही वह सशक्त माध्यम है, जहाँ से संस्कारवान, चरित्रवान और आदर्श पीढ़ी का निर्माण होता है।
तेरापंथ युवक परिषद के मंत्र दीक्षा कार्यक्रम में उमड़ा संस्कारों का सैलाब
Highlights
- 12 ज्ञानशालाओं के लगभग 250 बच्चों एवं 100 प्रशिक्षिकाओं की गरिमामयी उपस्थिति, अहिंसा की प्रस्तुति ने जीता सभी का मन

