लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण लागू कराने में हुई विसंगति संबंधित मामले को लेकर मा० सुप्रीम कोर्ट में विभाग द्वारा दिए गए एफिडेविट के अनुसार प्रकरण के निस्तारण को लेकर रविवार को अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमण्ल कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से मुलाकात कर एक ज्ञापन दिया।
अभ्यर्थियों के नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने कहा कि 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण की विसंगति को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे (रवि सक्सेना vs स्टेट ऑफ यूपी) में अभी हाल ही में 28/07/2026 की सुनवाई में माननीय न्यायालय द्वारा दिए गये आदेश में उल्लेखित है कि मामले के निस्तारण के लिए संविधान में दिए आर्टिकल 142 का प्रयोग करके मामले का निस्तारण किया जा सकता है। जैसा की आदेश में यह भी उल्लेखित है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 20/07/2026 को दिया एफिडेविट के अनुसार एओआर मनदीप कालरा सभी पक्षकारों के सहमति पत्र 31/07/2026 को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करना है।
अभ्यर्थियों ने मंत्री निषाद को बताया की विभाग की ओर कोर्ट में दिये गये एफिडेविट/चयन सूची में 3324 केवल ऐसे ओबीसी अभ्यर्थी के नाम दिया जिनको पहले से नौकरी मिल जानी चाहिए थी। जबकि यह आंकड़ा बड़ा है। क्योंकि सरकार इससे पहले 6800 की सूची थी। वहीं 4946 ऐसे अभ्यर्थियों के नाम डाल दिया है जिनको नौकरी के लिए बुलाया गया था लेकिन वह कार्यभार नहीं ग्रहण किये। अब इस स्थिति में मामले के निस्तारण के लिए 4946 कार्यभार न ग्रहण करने वाले पद की जगह मेरिट कम करके पूर्व में दी गई 6800 आरक्षित वर्ग की सूची के छूट रहे पात्र अभ्यर्थियों का चयन किया जाए। एवं अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के चयन के पक्ष में भी विभाग अपनी सहमति प्रदान करे। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने अभ्यर्थियों का ज्ञापन लेने के बाद उन्हें अश्वासन दिया की इस संबंध में वह मुख्यमंत्री जी की पत्र लिखेंगे जिसे यह मामला निस्तारित हो सके। प्रतिनिधि मंडल में शामिल रणजीत यादव,विजय,दीपेंद्र, कृष्णचंद्र, रवि, अमित गंगवार आदि अभ्यर्थी शामिल रहे।
69000 शिक्षक भर्ती : अभ्यर्थियों का एक प्रतिनिधिमण्ल कैबिनेट मंत्री संजय निषाद से मुलाकात की

