विलेपार्ले {मुंबई} विकास धाकड़/ मंत्र साधना से जागृत होती है अंतरात्मा” : साध्वी श्री राकेश कुमारी जी, युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी आदि ठाणा ४ के पावन सान्निध्य में मंत्र दीक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्रीजी के नवकार मंत्र से हुआ। विलेपार्ले ज्ञानशाला द्वारा मंगलाचरण की प्रस्तुति दी गई।
तत्पश्चात साध्वी श्री मलय विभा जी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए एक रोचक कहानी के माध्यम से बताया कि बच्चे कोरे कागज के समान होते हैं। उन पर बचपन में जैसे संस्कारों और मूल्यों के रंग चढ़ाए जाते हैं, उनका व्यक्तित्व भी उसी अनुरूप विकसित होता है। अपने मंगल उद्बोधन में साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने सभी बच्चों को मंत्र दीक्षा प्रदान कर संकल्प दिलाए। उन्होंने कहा कि मंत्र साधना केवल शब्दों का दोहराव नहीं, बल्कि अंतरात्मा को जागृत करने की एक वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक प्रक्रिया है। अमर कुमार की प्रेरक कथा के माध्यम से उन्होंने मंत्र की महत्ता का सुंदर विवेचन किया। साध्वी श्रीजी ने कहा बच्चे देश का भविष्य और तस्वीर हैं। इसलिए प्रशिक्षिकाओं के साथ-साथ अभिभावकों का भी यह दायित्व है कि वे अपने जीवन को संयमित, संस्कारित एवं आदर्श बनाएं, क्योंकि बच्चों पर सबसे गहरा प्रभाव परिवार के आचरण का पड़ता है।
उन्होंने ज्ञानशाला प्रशिक्षिकाओं की सराहना करते हुए कहा कि वे भावी पीढ़ी को संस्कार और ज्ञान का अमूल्य उपहार दे रही हैं तथा जीवन की सबसे बड़ी संपदा धन नहीं, बल्कि संस्कार हैं। अंत में साध्वी श्रीजी ने बच्चों को नियमित रूप से नमस्कार महामंत्र के जप के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि यह मंत्र जीवन में आत्मबल, सकारात्मकता, एकाग्रता और सद्गुणों का विकास करता है तथा व्यक्ति को श्रेष्ठ जीवन जीने की प्रेरणा प्रदान करता है। विलेपार्ले ज्ञानशाला की प्रशिक्षिका सारिका वडाला ने सभी का स्वागत किया।ते.यु.प अध्यक्ष महेंद्र जी वडाला ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी श्री विपुल यशा जी ने किया। विलेपार्ले प्रशिक्षिका शिल्पा डागलिया एवम सारीका वडाला ने संस्कारो के पार्लर द्वारा अपनी प्रस्तूत दी । नागरदास ज्ञानशाला ने तेरापंथ का इतिहास पर बहुत रोचक प्रस्तूति दी।
खार ज्ञानशाला द्वारा नमस्कार महामंत्र पर बहुत सुन्दर नृत्य प्रस्तुत किया गया।बान्द्रा ज्ञानशाला द्वारा अंहिसा के द्वारा जीवन मे कैसे परिवर्तन करे नाटक द्वारा सुंदर प्रस्तुति। सान्ताकुंज ज्ञानशाला द्वारा प्रकृति की अदालत : मानव के विरुद्ध मुकदमा नाटक द्वारा बहुत मनमोहक एवम सारगर्भित प्रस्तूति दि गई। लोखनवाल ज्ञानशाला द्वारा अंहिसा पर प्रेरक प्रस्तूति दी गई। किशोर मण्डल द्वारा सुंदर प्रस्तुति दी गई एवम राष्ट्रीय अध्यक्ष मंयकजी धाकड द्वारा विचार व्यक्त किए गए। मुंबई ज्ञानशाला की संयोजिका एवम सहसंयोजक राजश्री कच्छारा और अंजु जी चौधरी भी उपस्थित हुए ।

