विकास धाकड़/मुंबई। युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या साध्वी श्री राकेश कुमारी जी आदि ठाणा-4 के सान्निध्य में चौमासी चौदस एवं तेरापंथ स्थापना दिवस का आयोजन,चौमासी चौदस के अवसर पर साध्वी श्री मलयविभा जी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा, आज लगा चातुर्मास, हम पाए दिव्य प्रकाश। चातुर्मास त्याग, तप एवं जप के माध्यम से दिव्य प्रकाश प्राप्त करने का अनुपम अवसर है।
साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने मंगल उद्बोधन में सूत्र “उटि्ठए णो पमायए” का भावार्थ समझाते हुए सभी को प्रमाद छोड़कर चातुर्मास को साधनामय बनाने की प्रेरणा दी तथा हाजरी का वाचन कराया। तेरापंथ स्थापना दिवस पर कार्यक्रम का शुभारंभ साध्वी श्री राकेश कुमारी जी के नवकार मंत्र से हुआ। साध्वी श्री चेतस्वी प्रभा जी ने सुमधुर मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
साध्वी श्री विपुलयशा जी ने तेरापंथ की कुछ घटक तत्वों पर प्रकाश डालते हुए कहा के स्वामी जी के 300 वर्ष पहले लगाई हुई नींव को उतरवर्ती आचार्य परंपरा और भी विकसित कर रहे हैं। तत्पश्चात साध्वीवृंद ने साध्वी श्री राकेश कुमारी जी द्वारा रचित गीत का संगान किया।अपने प्रेरणा पाथेय में साध्वी श्री राकेश कुमारी जी ने युवा युवाचार्य श्री महावीर कुमार जी की वर्धापना करते हुए कहा कि आचार्य श्री ने एक कुशल शिल्पकार की भाँति छोटे से कस्बे से आए एक नन्हे श्रावक को तराशकर हीरा बना दिया।
उन्होंने अपने संस्मरण साझा करते हुए युवाचार्य के प्रति मंगलकामना व्यक्त की वे गुरु-दृष्टि को वृद्धांगत करते हुए तेरापंथ धर्मसंघ को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। साथ ही उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु द्वारा त्याग और तपस्या पर स्थापित तेरापंथ धर्मसंघ की नींव आज भी अटल और अमर है। एक आचार, एक विचार,अनुशासन एवं मर्यादा की इस सुदृढ़ नींव को हम सभी अपने जीवन में पल्लवित करें तथा धर्मसंघ की प्रभावना में निरंतर सहभागी बनें। प्रेमलता जी आंचलिया ने गीतिका प्रस्तुत की। तेयुप अध्यक्ष महेंद्र जी वडाला एवं तेरापंथ महिला मंडल अध्यक्षा कुसुम जी कोठारी ने अपने भाव व्यक्त किए। तेरापंथ महिला मंडल द्वारा स्थापना दिवस पर आकर्षक प्रस्तुति दी गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन अनिल जी बाफना ने किया तथा संघगान के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।
विलेपार्ले में चोमासी चौदस एवं तेरापंथ स्थापना दिवस का सुंदर आयोजन

