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Reading: भारत इस समय भीषण संकट में, मोदी सरकार नहीं बल्कि कांग्रेस ही देश को संकट से बाहर निकाल सकती है, ‘मोदी मस्ट गो’: यशवंत सिन्हा
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भारत इस समय भीषण संकट में, मोदी सरकार नहीं बल्कि कांग्रेस ही देश को संकट से बाहर निकाल सकती है, ‘मोदी मस्ट गो’: यशवंत सिन्हा

Last updated: June 14, 2026 10:46 am
Surabhi Saloni
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8 Min Read
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Highlights
  • मोदी सरकार के विकास के आंकड़े गलत, संगठित और असंगठित क्षेत्र में भारी असमानता, जीएसटी और नोटबंदी से MSME क्षेत्र बर्बाद: प्रो. अरुण कुमार
  • सत्य और अहिंसा के मार्ग पर सड़क पर उतरकर स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई लड़नी होगी: हर्षवर्धन सपकाल
  • ‘भारत में आने वाली आर्थिक सुनामी?’ विषय पर तिलक भवन में विशेष परिसंवाद संपन्न

मुंबई। देश में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय भी विपक्ष का सम्मान किया जाता था। संसद में कभी विपक्ष को दुश्मन नहीं माना गया, लेकिन आज विपक्ष को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। राजनीतिक प्रतिशोध का दौर चल रहा है और इससे देश के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इस संकट का मुकाबला केवल कांग्रेस ही कर सकती है। कांग्रेस पर बड़ी जिम्मेदारी है और कांग्रेस ने जमीनी स्तर पर संघर्ष करने का जो निर्णय लिया है, वह सही है क्योंकि वर्तमान संकट से मोदी सरकार देश को बाहर नहीं निकाल सकती। इसलिए ‘मोदी मस्ट गो’, ऐसा स्पष्ट संदेश पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने दिया।
महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अर्थशास्त्र विभाग तथा ऑल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस द्वारा संयुक्त रूप से ‘भारत में आने वाली आर्थिक सुनामी?’ विषय पर एक परिसंवाद आयोजित किया गया था। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा, वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार, पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व सांसद एवं योजना आयोग के पूर्व सदस्य डॉ. भालचंद्र मुंगेकर, पूर्व सांसद कुमार केतकर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने की।
इस अवसर पर यशवंत सिन्हा ने कहा कि मोदी सरकार जिस विकास दर का दावा कर रही है, उसके आंकड़े ही गलत हैं। सरकार कह रही है कि भारत की विकास दर 7.7 प्रतिशत है, लेकिन वास्तविकता अलग है। अनेक अर्थशास्त्रियों ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी भारत के आंकड़ों पर संदेह जताते हुए भारत को ‘सी’ ग्रेड में रखा है और कहा है कि भारत के आंकड़े पूरी तरह विश्वसनीय नहीं हैं। जबकि ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका को ‘ए’ ग्रेड मिला है। निवेश बढ़ेगा तभी विकास दर बढ़ेगी, लेकिन पिछले 12 वर्षों में निवेश GDP के लगभग 32 प्रतिशत के आसपास ही रहा है। ऐसे में विकास दर 6 से 6.5 प्रतिशत ही हो सकती है। सरकार के आंकड़े वास्तविकता से मेल नहीं खाते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की बात करते हैं, लेकिन इसके लिए 8 प्रतिशत से अधिक विकास दर आवश्यक है और वर्तमान परिस्थितियों में यह लक्ष्य प्राप्त करना बेहद कठिन दिखाई देता है।
उन्होंने कहा कि भारत के सामने खड़ा संकट केवल ईरान युद्ध के कारण नहीं है। सरकार डीजल का राशनिंग कर रही है, रुपया लगातार कमजोर हो रहा है, महंगाई बढ़ रही है और शेयर बाजार की स्थिति भी चिंताजनक है। पिछले दो वर्षों में 3.25 लाख करोड़ रुपये देश से बाहर चले गए हैं। किसान संकट में है, उर्वरकों की कमी है और ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। इसका व्यापक असर अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
यशवंत सिन्हा ने आगे कहा कि भारत ने अतीत में अनेक संकटों का सफलतापूर्वक सामना किया है। पंडित जवाहरलाल नेहरू से लेकर अटल बिहारी वाजपेयी तक सभी सरकारों ने चुनौतियों का मुकाबला किया, लेकिन वर्तमान मोदी सरकार में संकटों से लड़ने की इच्छाशक्ति नहीं है। झूठ बोलकर काम चलाया जा रहा है। आज भारत सरकार अमेरिका के सामने झुकी हुई दिखाई देती है। प्रधानमंत्री अमेरिका के सामने नतमस्तक हैं और इसका असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है। अमेरिका ईरान-पाकिस्तान विवाद में मध्यस्थता कर रहा है, तो फिर हमारे तथाकथित ‘विश्वगुरु’ कहाँ हैं? यह सवाल भी उन्होंने उठाया।
वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रो. अरुण कुमार ने कहा कि मोदी सरकार GDP के वास्तविक आंकड़े छिपा रही है। देश का असंगठित क्षेत्र बहुत बड़ा है और छोटे तथा सीमांत किसानों की संख्या भी अधिक है। नोटबंदी का सबसे बड़ा नुकसान MSME क्षेत्र को हुआ। जीएसटी को गलत तरीके से लागू किया गया, जिससे असंगठित क्षेत्र प्रभावित हुआ जबकि संगठित क्षेत्र को लाभ मिला। असंगठित क्षेत्र में बड़ी संख्या में ऐसे श्रमिक हैं जिनकी मासिक आय 10 हजार रुपये से भी कम है। बढ़ती महंगाई के बीच वे अपना जीवन कैसे चलाएँगे?
उन्होंने कहा कि महंगाई का प्रभाव संगठित और असंगठित क्षेत्रों पर अलग-अलग पड़ता है। गरीबों की वास्तविक स्थिति के आंकड़े सामने नहीं लाए जा रहे हैं। गरीब व्यक्ति लगातार दबाव में है। देश का बाजार कमजोर हो रहा है, तकनीकी क्षेत्र में भारत पीछे है और अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर हमारा निवेश अमेरिका और चीन की तुलना में बहुत कम है। आयात बढ़ रही है और भारत अमेरिकी दबाव के सामने झुकता दिखाई दे रहा है। शिक्षा पर भी भारत का खर्च अन्य देशों की तुलना में बहुत कम है। संगठित और असंगठित क्षेत्रों के बीच की खाई बढ़ रही है। रोजगार के अवसर घट रहे हैं, शिक्षित युवाओं को नौकरियाँ नहीं मिल रही हैं, जिससे सामाजिक समस्याएँ बढ़ रही हैं। सरकार वास्तविक आंकड़े छिपाकर लोगों को भ्रमित कर रही है। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में भी अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है। 25 करोड़ लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाने का दावा भी वास्तविकता से दूर है। उन्होंने कहा कि जब तक लोगों के हाथ में पैसा नहीं होगा, तब तक मांग नहीं बढ़ेगी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि आज देश कुछ चुनिंदा लोगों के हाथों में सिमट गया है और जनता के गले पर फंदा कसता जा रहा है। सवाल यह है कि संघर्ष की भावना कहाँ चली गई? वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए सड़क पर उतरकर स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई लड़नी होगी। यदि कहीं गलत हो रहा है तो उसके खिलाफ आवाज उठानी होगी।
उन्होंने कहा कि पूरे मई महीने में उन्होंने राज्यभर में विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों पर आंदोलन किए। इस दौरान कई गंभीर बातें सामने आईं। 500 रुपये के नोटों की कमी दिखाई दे रही है, बैंकों में पर्याप्त नकदी नहीं है। परीक्षाएँ हैं लेकिन पेपर लीक हो रहे हैं, डिग्रियाँ हैं लेकिन रोजगार नहीं है। युवाओं का शिक्षा से मोहभंग हो रहा है। खरीफ सीजन शुरू हो चुका है लेकिन किसान नाराज हैं। कृषि उत्पादों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है और असंतोष बढ़ रहा है। स्थिति गंभीर है और इससे निकलने का रास्ता खोजना होगा। उन्होंने कहा कि जाति और धर्म को राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय आर्थिक मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए।
कार्यक्रम का प्रारंभिक वक्तव्य अर्थशास्त्र विभाग के प्रमुख विश्वास उटगी ने दिया। अतिथियों का परिचय पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कराया। आभार प्रदर्शन डॉ. भालचंद्र मुंगेकर ने किया जबकि कार्यक्रम का संचालन गजानन देसाई ने किया।

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