बेंगलुरु। जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गनाइजेशन (जीतो) बेंगलुरु नॉर्थ के तत्वावधान में लेडीज विंग द्वारा ‘महक मिट्टी की’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का अत्यंत भव्य, गरिमामय एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध आयोजन गणेश बाग, इन्फेंट्री रोड स्थित महावीर अतिथि भवन में किया गया। यह आयोजन विशेष रूप से राजस्थान दिवस के उपलक्ष्य में किया गया, जिसका उद्देश्य राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और गौरवशाली विरासत का उत्सव मनाना था। कार्यक्रम में करीब १७५ उपस्थित सभी सदस्य पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजे-धजे नजर आए। रंग-बिरंगी ओढ़नी, पारंपरिक आभूषण और सोलह श्रृंगार से सजी महिलाओं ने मरुधरा की आन-बान-शान को जीवंत कर दिया।
राजस्थानी भाषा की मिठास ने पूरे वातावरण को आत्मीय बना दिया। ‘खम्मा घणी’ और ‘पधारो म्हारे देस’ जैसे शब्दों ने हर किसी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ दिया। कार्यक्रम की शुरुआत सौम्य, गरिमामयी एवं प्रेरणादायी उपाध्यक्ष श्रीमती सुमन वेदमुथा के स्वागत उद्बोधन से हुई। उन्होंने राजस्थान दिवस के महत्व और इसे मनाने के उद्देश्य को सुंदर ढंग से प्रस्तुत करते हुए कहा कि अपनी संस्कृति को समझना, उसे अपनाना और अगली पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी जिम्मेदारी है। जीतो बेंगलुरू नॉर्थ अध्यक्ष विमल कटारिया एवं महामंत्री विजय सिंघवी ने बधाई संदेश प्रेषित किए। लेडीज विंग अध्यक्ष लक्ष्मी बाफना ने सभी पधारे हुए सदस्यों को राजस्थान दिवस की शुभकामनाएं दीं।
इस अवसर पर कई विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, जिनमें प्रमुख रूप से बिंदु रायसोनी (जेएलडब्ल्यू एपेक्स संयोजक – गृह व्यवसाय मॉडल), सुनीता गांधी (जेएलडब्ल्यू एपेक्स संयोजक – श्रमण आरोग्यम), पिंकी जैन (केकेजी जोन जेएलडब्ल्यू संयोजक), बबीता रायसोनी (अध्यक्ष – जेएलडब्ल्यू बेंगलुरु साउथ), तथा रेशमा पुनमिया, चित्रा मेहता, अंजलि जैन एवं रत्निबाई मेहता शामिल रहीं।
पिंकी जैन ने अपने विचार रखते हुए राजस्थानी भाषा एवं पारंपरिक वेशभूषा की विशेषताओं पर प्रकाश डाला और कहा कि यह हमारी पहचान और संस्कृति की आत्मा है, जिसे हमें गर्व के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। बिंदु रायसोनी ने गृह व्यवसाय मॉडल के संदर्भ में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने और पारंपरिक मूल्यों के साथ आधुनिकता को जोड़ने के लिए प्रेरित किया। सुनीता गांधी ने श्रमण आरोग्यम के अंतर्गत स्वास्थ्य के महत्व पर बल देते हुए संतुलित जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम की मुख्य वक्ता श्रीमती नीलम ललवानी रहीं, जिन्होंने अपने प्रभावशाली एवं प्रेरणादायक विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने राजस्थान की समृद्ध संस्कृति, विरासत और त्योहारों के महत्व को बताते हुए कहा कि ये परंपराएं केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला हैं। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि परिवार के बुजुर्ग हमारे घर की जड़ होते हैं, उनकी सेवा और सम्मान हमारी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। राजस्थान की संस्कृति हमें परिवार को जोड़कर रखने और रिश्तों को निभाने की सीख देती है। साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली के महत्व पर भी प्रकाश डाला और कहा कि स्वस्थ शरीर और मन ही खुशहाल परिवार की नींव होते हैं।
लेडीज विंग महामंत्री रक्षा छाजेड़ ने पूरे कार्यक्रम का मंच संचालन अत्यंत जोशीले, ऊर्जावान एवं प्रभावशाली अंदाज में किया। उनके सशक्त शब्दों और उत्कृष्ट तालमेल ने कार्यक्रम को निरंतर जीवंत बनाए रखा। कार्यक्रम के दौरान एक नाटक के माध्यम से यह संदेश प्रस्तुत किया गया कि राजस्थान की मिट्टी में पले-बढ़े संस्कार व्यक्ति को केवल समृद्ध ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और परिवार के सुख-दुख में साथ निभाने वाला बनाते हैं। इसी दौरान आगामी कार्यक्रम नवकार दिवस, जो कि 9 अप्रैल को फ्रीडम पार्क में आयोजित किया जाएगा, के बैनर का विमोचन किया गया। इस भव्य आयोजन का संचालन कुशल, समर्पित एवं ऊर्जावान संयोजक श्रीमती नंदा बाफना एवं रचनात्मक, सजग और संगठित सह-संयोजक श्रीमती दीपिका बेताला द्वारा अत्यंत उत्कृष्ट रूप से किया गया। साथ ही समूह प्रतियोगिता प्रभावशाली अंदाज में आयोजित की गई। कार्यक्रम को सफल बनाने में कार्यकारिणी सदस्य अलका लोढ़ा, संगीता मुथा, नीता गादिया, प्रेमा रांका, संगीता नागौरी, बिंदु नाहर, लीला पितलिया सहित लेडीज विंग की अन्य समर्पित कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम में विभिन्न प्रतियोगिताओं जैसे श्रेष्ठ परिधान, सोलह श्रृंगार, पारंपरिक वेशभूषा, सुंदर गणगौर, थाल सज्जा, अत्यंत सक्रिय प्रतिभागी एवं सच्चा मारवाड़ी सम्मान के माध्यम से प्रतिभागियों की प्रतिभा और उत्साह को सराहा गया। संयुक्त सचिव मीना बडेरा ने आभार व्यक्त किया।अंत में सभी विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा राष्ट्रगान के सामूहिक गान के साथ इस गौरवमयी एवं यादगार कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। “महक मिट्टी की” केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, संस्कारों और जड़ों को गर्व के साथ जीने का एक जीवंत उत्सव बनकर सभी के हृदय में बस गया।
जीतो बेंगलुरु नॉर्थ लेडीज विंग द्वारा ‘महक मिट्टी की’ का भव्य आयोजन

