By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Reading:   ज्ञानार्जन की सशक्त माध्यम है साहित्य संपदा : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण
Share
Font ResizerAa
सुरभि सलोनीसुरभि सलोनी
Font ResizerAa
  • National
  • State
  • Social
  • Entertainment
  • Mumbai / Maharashtra
  • Video
  • E-Magazine
Search
  • Business
  • entertainment
Have an existing account? Sign In
Follow US
  • Advertise
© 2022 Surabhi Sloni All Rights Reserved.
social

  ज्ञानार्जन की सशक्त माध्यम है साहित्य संपदा : शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण

Last updated: December 22, 2025 11:24 pm
Surabhi Saloni
Share
5 Min Read
SHARE
Highlights
  • भिक्षु चेतना वर्ष महाचरण : भिक्षु स्वामी की साहित्य संपदा को आचार्यश्री ने किया व्याख्यायित
  • विद्यार्थियों ने श्रीमुख से स्वीकार किए सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति के संकल्प

 कंटालिया, पाली (राजस्थान)। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के प्रथम अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु की जन्म त्रिशताब्दी वर्ष का महाचरण तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में महामना की जन्मस्थली कंटालिया में समायोजित हो रहा है। इस महाचरण में भाग लेने के लिए कंटालिया और आसपास के श्रद्धालु ही नहीं, अपितु देश के अन्य क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचकर इस सुअवसर का आध्यात्मिक लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
सोमवार को भिक्षु समवसरण में महाचरण के आठवें का दिन के मुख्य कार्यक्रम का शुभारम्भ अखण्ड परिव्राजक, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी के मंगल महामंत्रोच्चार के साथ हुआ। साध्वी मैत्रीयशाजी व साध्वी ख्यातयशाजी ने गीत का संगान किया। मुनि नमनकुमारजी ने आज के विषय ‘आचार्यश्री भिक्षु की साहित्य संपदा’ पर अपनी अभिव्यक्ति दी। तदुपरान्त शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन प्रतिबोध प्रदान करते हुए कहा कि धर्म के तीन आयाम बताए गए हैं। उनमें तीसरा आयाम है- तप। तप के भी 12 प्रकार बताए गए हैं। उन बारह प्रकारों में दसवां प्रकार है-स्वाध्याय। स्वाध्याय अनेक रूपों में हो सकता है। गुरु वाचना दे और शिष्य वाचना को ग्रहण करे। फिर प्रश्न, परिवर्तना भी हो फिर धर्मकथा हो। इससे यह अनुमान लगाया जा सकता है कि धर्मकथा अथवा प्रवचन देने से पूर्व वाचना, वर्तना, परिवर्तना, चिंतन-मनन आदि का होना आवश्यक होता है।
एक अर्हता आने के बाद धर्मकथा होती है तो वह प्रभावशाली भी हो सकती है। प्रवचन करने से पूर्व अच्छी सामग्री का संग्रहण हो और उसके विषय में अच्छे ढंग से समझा जाए तो वह प्रवचन भी जीवंत बन सकता है। कंठस्थ परंपरा से चलने वाला वाङ्मय और अब लिखित व्यवस्था से भी चलने वाले वाङ्मय उपलब्ध होते हैं। आज कितना आगम साहित्य प्राप्त है। लिपिबद्ध आगम नहीं होता तो आज हम सभी को ज्ञान की प्राप्ति कैसा हो सकता है। ज्ञान करने और अध्ययन करने में कुछ कठिनाई हो सकती थी। आगम का अपना गरिमापूर्ण स्थान है। हमारे धर्मसंघ की चारित्रात्माओं के द्वारा कितने ग्रन्थों की लिपियां तैयार की गई होंगी। वर्तमान में जैन विश्व भारती साहित्य प्रकाशन की अधिकृत संस्था है। आज कितनी किताबें जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित होती हैं। साहित्य हाथों में आता है तो पढ़ने वाले लोगों का ज्ञान भी विकसित भी हो सकता है। वह भी समय रहा होगा, जब बिना किताबों के ज्ञान का प्रसार होता था। कहीं हस्तलिखित और कहीं से सुनकर कितना ज्ञान का अर्जन किया होगा। आचार्यश्री भिक्षु, श्रीमज्जयाचार्य, गुरुदेव तुलसी और आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का अतीत के दशकों में साहित्य का अवदान करने में नाम आता है।  आचार्यश्री भिक्षु जन्म त्रिशताब्दी वर्ष ‘भिक्षु चेतना वर्ष’ चल रहा है और अभी महाचरण का आयोजन हो रहा है।
आचार्यश्री भिक्षु की अनेक संपदाओं में एक साहित्य संपदा को भी देख सकते हैं। साहित्य संपदा को तैयार करना भी ज्ञानावरणीय कर्म के क्षयोपशम भी उस रूप में होता है बहुत बड़ी बात होती है। हालांकि हमारे तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु ने जो साहित्य संपदा प्रदान की, वे आधारभूत ग्रन्थ हैं। इतनी प्रचुर मात्रा में साहित्य प्रदान करने की क्षमता भी अद्भुत थी। उनके ज्ञानावरणीय कर्म का कितना क्षयोपशम रहा होगा। स्वामीजी का जो साहित्य है और फिर बाद में श्रीमज्जयाचार्य ने जो साहित्य की रचना की, वह बहुत बड़ी बात है। उन्होंने तो पद्यात्मक रूप में राजस्थानी भाषा में साहित्यों का सृजन किया। तत्त्वज्ञान, तेरापंथ दर्शन आदि के माध्यम से ज्ञानार्जन का निरंतर प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री भिक्षु की साहित्य संपदा आज भी हमारे पास उपलब्ध है, जो हमारा मार्ग प्रशस्त कर रही है।
आचार्यश्री ने साधु-साध्वियों व समणीवृंद की अनेक जिज्ञासाओं को समाहित किया। शासन गौरव साध्वी राजीमतीजी द्वारा रचित ‘आत्म विशोधि पथ’ पुस्तक को जैन विश्व भारती की ओर से आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया। आचार्यश्री ने इस संदर्भ में अपनी प्रेरणा प्रदान की। साध्वी सम्यक्प्रभाजी ने अपनी प्रस्तुति देते हुए सहवर्ती साध्वियों के साथ गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने साध्वीवृंद को भी मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। श्रीमती अनिता डागा ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी। तेरापंथ महिला मण्डल-कंटालिया ने भी गीत का संगान किया। बभान-झंझाड़िया स्कूल के छात्र-छात्राओं की विशेष उपस्थिति थी। इस संदर्भ में स्कूल के प्रिंसिपल श्री महेन्द्रसिंह रावत ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी तथा आचार्यश्री से मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। आचार्यश्री ने उपस्थित विद्यार्थियों को प्रेरणा प्रदान करते हुए सद्भावना, नैतिकता व नशामुक्ति की प्रतिज्ञा भी कराई।

Sign Up For Daily Newsletter

Be keep up! Get the latest breaking news delivered straight to your inbox.

By signing up, you agree to our Terms of Use and acknowledge the data practices in our Privacy Policy. You may unsubscribe at any time.
Share This Article
Facebook Whatsapp Whatsapp Telegram Email Copy Link Print
Share
What do you think?
Love0
Sad0
Happy0
Sleepy0
Angry0
Dead0
Wink0
Previous Article आमेट महिला मंडल मुंबई द्वारा तीर्थ एवं प्राकृतिक यात्रा का आयोजन
Next Article कफ सीरप को लेकर समाजवादी पार्टी का यूपी विधानसभा परिसर में प्रदर्शन

आज का AQI

Live Cricket Scores

Latest News

राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष बने अंबरीश तिवारी
state
April 20, 2026
नगमा मिराजकर, इरशाद कामिल, पुष्कर जोग और रूपाली सूरी सुनील कोठारी के नेक्सजेन लीडरशिप अवार्ड्स में हुए शामिल
entertainment
April 20, 2026
शांति वार्ता में पाकिस्तान की मेजबानी, भारतीय कूटनीति में बदलाव ज़रूरी : कांग्रेस
national
April 20, 2026
क्या भारत को नई प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है?
Articles national
April 20, 2026

Sign Up for Our Newsletter

Subscribe to our newsletter to get our newest articles instantly!

Follow US
© 2026 Surabhi Saloni All Rights Reserved. Disgen by AjayGupta
  • About Us
  • Privacy
  • Disclaimer
  • Terms and Conditions
  • Contact
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?