पालघर। पालघर तेरापंथ समाज द्वारा राष्ट्रसंत आचार्य श्री तुलसी का 112 वा जन्म दिवस अणुव्रत दिवस के रूप में 23 अक्टूबर को रात्रि 9 बजे तेरापंथ भवन में आयोजन किया गया।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओंने आचार्य श्री तुलसी पर अपने भावों की अभिव्यक्ति में कहा बीसवीं सदी के अलोकपुंज व्यक्तित्व का नाम है आचार्य श्री तुलसी। वे मानवता की धरती पर जीवन मूल्यों में विश्वास रखने वाले जन-जन की आस्था के केंद्र थे तो आधुनिकता से भी परहेज नहीं करते थे। वे अलबेले योगी, संत, फकीर, प्रशासक, साहित्यकार, संगीतकार व प्रवचनकार थे। उनका जन्म राजस्थान में लाडनू ग्राम में हुआ। उन्होंने मात्र 11 वर्ष की उम्र में अष्टमाचार्य आचार्य कालू गणी के कर कमलों से मुनि दीक्षा स्वीकार की वे 16 वर्ष की उम्र में शिक्षक व 22 वर्ष की उम्र में तेरापंथ के आचार्य बन गए। उन्होंने मुनि जीवन के प्रारंभिक 14 वर्षों में 20 हजार श्लोक कंठस्थ किए। मानवीय मूल्यों की पुनर्स्थापना एवं चारित्रिक मूल्यों उन्नयन के लिए अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया। अणुव्रत केवल आचार संहिता ही नहीं अपितु पूरा जीवन दर्शन है। धर्म और व्यवहार का सेतु है। अणुव्रत निर्विशेषण धर्म है। इसको कोई भी जाति, वर्ग, वर्ण का व्यक्ति स्वीकार कर सकता है।
आचार्य तुलसी दिव्य दृष्टि से सम्पन्न थे। उनका इस राष्ट्र बड़ा उपकार है। वे चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी थे। अणुव्रत आंदोलन के जरिये लाखों लोगों को मानवता का संदेश दिया।
कार्यक्रम का प्रारंभ तुलसी अष्टकम से किया गया।
मंगलाचरण शांतिलाल जी सिंघवी ने सुमधुर गीतिका द्वारा किया।
इस अवसर पर सभा मंत्री दिनेश राठौड़, महिला मंडल मंत्री राजश्री शाह, अणुव्रत समिति मंत्री जयेश राठौड़ आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम के अंत में 10 मिनिट जाप किया।
कार्यक्रम में सभा, महिला मंडल, अणुव्रत समिति की उपस्थिति रही।
पालघर में राष्ट्रसंत आचार्य श्री तुलसी का 112 वां जन्म दिवस मनाया गया

