युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी की विदुषी शिष्या साध्वी श्री प्रज्ञा श्रीजी के पावन सान्निध्य में बोरज में प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आयोजन संपन्न हुआ। महाप्राण ध्वनि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
साध्वी श्री प्रज्ञा श्री जी ने प्रेक्षाध्यान पर प्रेरणादायक प्रवचन देते हुए कहां जैनों में ध्यान की पद्धति जो विलुप्त हो गयी थी उसे गुरुदेव से तुलसी की प्रेरणा से आचार्य श्री महाप्रज्ञजी ने पुनर्जीवित किया। उन्होंने कहा प्रेक्षाध्यान से न केवल शारीरिक स्तर पर न केवल मानसिक स्तर पर न केवल भावनात्मक स्तर पर आश्चर्यजनक परिवर्तन घटित होते हैं बल्कि इससे व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है।
वरिष्ठ प्रेक्षा प्रशिक्षिका श्रीमती विमला देवी दुगडअपनी जन्म स्थली में 25 मिनिट का ध्यान का प्रयोग समताल स्वांस प्रेक्षा का करवाया ।आभार व्यक्त भारती गुंदेचा ने किया । नवाह्निक आध्यात्मिक अनुष्ठान की संपन्नता तप जप के साथ हुई
प्रेक्षाध्यान कल्याण वर्ष के समापन के शुभ अवसर पर बोरज में कार्यशाला का आयोजन

