मुंबई। से समागत प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री पारसमल दूगड़ एवं श्रीमती विमला दूगड़ ने दिया उपयोगी प्रशिक्षण महातपस्वी युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी की सुशिष्या “शासन श्री” साध्वी श्री मधुबाला जी के सान्निध्य में श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा उधना के तत्वावधान में तेरापंथ भवन उधना में द्वि दिवसीय प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आज शुभारंभ हुआ जिसमें मुंबई से समागत अनेक विश्व कीर्तिमान धारक एवं अनेक पुरस्कारों से सम्मानित प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री पारसमल दुगड़ एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती विमला दूगड़ ने बहुमूल्य प्रशिक्षण दिया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में “शासन श्री” साध्वी श्री मधुबाला जी ने नमस्कार महामंत्र एवं मंगल पाठ सुनाकर कार्यशाला का शुभारंभ करवाया। इस अवसर पर साध्वी श्री मंजुलयशा जी ने कहा कि प्रेक्षाध्यान आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी द्वारा प्रदत्त विशिष्ट अवदान है जो जन-जन के लिए अब वरदान साबित हो रहा है। प्रेक्षा प्रशिक्षक श्री पारसमल दूगड़ने कहा प्रेक्षाध्यान विशिष्ट साधना पद्धति है। इसे जिन्होंने अपनाया है उन्होंने लाभ प्राप्त किया है। इसके द्वारा न केवल व्यक्ति का शारीरिक विकास होता है न केवल मानसिक और भावनात्मक विकास होता है बल्कि व्यक्ति के व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास होता है। प्रेक्षाध्यान के द्वारा आज पूरा विश्व लाभ प्राप्त कर रहा है। यह महकता गुलशन है जिसके द्वारा समाज सुगंधित हो रहा है। हमारे भीतर आनंद का खजाना है, शक्तियों का खजाना है लेकिन हम उससे अनजान हैं। हम उसे खोज नहीं पा रहे हैं।
आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी फरमाते थे जब तक हम स्वयं को नहीं पहचानेंगे तब तक आगे नहीं बढ़ पाएंगे। प्रेक्षाध्यान हमें स्वयं की पहचान करवाता है। यह आत्म दर्शन का अनूठा उपक्रम है। बाहर की दुनिया में कोलाहल है, भीतर की दुनिया में शांति है। प्रेक्षाध्यान सकारात्मक ऊर्जा पैदा करता है। प्रेक्षाध्यान का लक्ष्य शरीर की स्वस्थता नहीं है बल्कि उसका लक्ष्य है चित्त की निर्मलता। लेकिन जैसे-जैसे प्रेक्षाध्यान के प्रयोग हम करते जाते हैं, उसकी गहराई में जाते हैं, चित्त की निर्मलता के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी स्वत: होता जाता है। उन्होंने प्रेक्षाध्यान की पांच उपसंपदाएं भाव क्रिया, प्रतिक्रिया विरति, मैत्री भाव, मितभाषण, और मितभाषिता के संदर्भ में विस्तार से जानकारी दी।
प्रेक्षाध्यान के विविध सत्रों में योगासन प्राणायाम और अनुप्रेक्षा के प्रयोग करवाए गए। ध्यान के प्रयोग करवाए गए। साथ-साथ स्वास्थ्य चर्चा की गई और विविध योगिक क्रियाओं के प्रयोग से भी शारीरिक स्वास्थ्य की प्राप्ति का मार्ग बताया गया। तेरापंथी सभा, उधना के अध्यक्ष श्री निर्मल चपलोत ने स्वागत भाषण दिया। श्री बसंती लाल नाहर, अर्जुन मेड़तवाल, लादुलाल नंगावत, डो. मुकेश छाजेड़ आदि ने प्रेक्षा गीत का संगान किया। कार्यक्रम संचालन तेरापंथी सभा उधना के मंत्री श्री मुकेश बाबेल ने किया। कार्यशाला की व्यवस्था में चंद्रेश लोढ़ा, बाबूलाल काल्या, हेमंत डांगी, अर्जुन धुपिया, सीमा जे. डांगी एवं सीमा एम डांगी का उल्लेखनीय सहयोग रहा।

