आचार्य महाश्रमण जी के आज्ञानुवृति संजय कुमारजी ने नमस्कार महामंत्र की महिमा बलाते हुए कहा नवकार भवपार कर सकता है। क्यों कि इसमें चौदह पूर्वो का सार है। इसके विधिवत प्रयोग से अनेक समस्या का समाधान हो सकता है। अपेक्षा है नवकार के अर्थ को समझ कर शुद्ध उच्चारण करना चाहिए। उन्होंने भगवान महावीर के पूर्व जन्मों की रोचक घटना सुनाकर कर्म बंधन से बचने प्रेरणा दी।
मुनि सिद्ध प्रज्ञजी ने वाणी संयम दिवस पर उद्वोधन देते हुए कहा- वाणी अमृत भी है तो वाणी जहर भी है। सोच समझकर निकली वाणी अमृत का काम करती है और बिना सोचे निकली वाणी विष के समान होती है। सोचकर बोलने वाला मनुष्य सभी जगह सफल होता है। कभी किसी की बात को बीच में नहीं कांटना चाहिए।
मुंबई से समागत सभा मंत्री श्री रमेश ढालावत ने जानकारी देते हुवे कहा कि रैलमगरा में चल कार्यक्रम की गूंज सिर्फ रैलमगरा में ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारत वर्ष में गंजाई मान हो रही हे। लोगों ने ओम अर्हम की ध्वनि से इस बात की खुशी जाहिर की तेरापंथ सभा अध्यक्ष मुकेश महता ने भिक्षु साहित्य मुनि श्री को भेट किया!इस अवसर पर श्रद्धानिष्ठा श्रावक गंभीरमल सोनी चार की तपस्या का पंचखान किया सौरभ लोढ़ा ने लगातार तीन घंटे अखंड जप में भाग लिया प्रेषक रमेश ढालावत सभा मंत्री रेलमगरा
मंत्र के प्रयोग में उचारण शुद्धि जरूरी- मुनि संजय कुमार
Highlights
- वाणी अमृत भी और वाणी जहर भी है- सिद्ध प्रज्ञ

