विकास धाकड़/ प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा जी ने सिटीलाइट तेरापंथ भवन में समायोजित श्रीमती प्रमिला भंसाली के 31 दिवसीय मासखमण तप-अभिनंदन समारोह में अपने संबोधन में कहा – ‘आत्मविशुद्धता का एक सशक्त माध्यम तप है। शंकल्पी और साहसी व्यक्ति ही इस कठिन-पथ का पथिक बन सकता है। इन्द्रियों और मन पर अनुशासन से ही तप-साधना हो सकती है। जैन परम्परा में तप का इतिहास प्रेरक और रोमांचकारी रहा है। प्रवचन श्रवण हेतु उपस्थित विशाल धर्म परिषद को प्रोफेसर साध्वी मंगल प्रज्ञा जी ने तपस्या करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा- चातुर्मास का समय – ज्ञान,दर्शन, चारित्र और तप की विशिष्ट आराधना का है। हर व्यक्ति अपनी शक्ति का संयोजन करे, बहन प्रेम भंसाली ने तप के साथ जप आदि की साधना की है। पूरा परिवार तप में सहयोगी बना, साधुवाद का पात्र है।
अपनी शक्ति का यथा संभव उपयोग करना चाहिए। मानव जन्म की दुर्लभता को पहचानें और चिन्तन करें – मैं जो कर सकता हू कर रहा या नहीं । समय और श्रम की सम्यक उपयोगिता जाने और मानव जीवन की सार्थक बनाएं। तपस्वी बहन की पुत्री नम्रता और बहु तर्ज ने तप के वर्धापन हेतु प्रस्तुति दी। साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी अतुलयशा, साध्वी डॉ चैतन्यप्रभा और साध्वी डॉ शौर्यप्रभा ने “आओ करें तप अनुमोदना’ गीत का सामूहिक संगान किया। तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष कल्येश बाफना ने तप अभिनन्दन पत्र का वाचन किया। तेरापंथ महिला मंडल उपाध्यक्षा ज्योति पटावरी ने साध्वी प्रमुखाश्री द्वारा प्रदत्त संदेश का वाचन किया। तेरापंथ सभा महिला मंडल, तेयुप, ‘तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम द्वारा मासखमण साधिका श्रीमती प्रमिला विनोद भंसाली का सम्मान किया गया, कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी अतुलयशा जी ने किया।
सूरत में मासखमण-तप अभिनन्दन समारोह का सुंदर आयोजन
Highlights
- इन्द्रिय-मन पर अनुशासन से ही संभव यह तपस्या: प्रोफेसर साध्वी मंगलप्रज्ञा

