बेंगलुरु:भारत में विकसित और निर्मित हल्का लड़ाकू विमान तेजस अपने सभी परीक्षकों के बाद अब वायु सेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के चेयरमैन जीएस रेड्डी ने यहां एक रेडियो साक्षात्कार में कहा कि सभी परीक्षणों में तेजस और एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एईडब्ल्यूसीएस) सफल रहा।
डीआरडीओ डे समारोह के अवसर पर रेड्डी ने आकाशवाणी को बताया कि संगठन की स्थापना 60 साल पहले 1965 में 10 प्रयोगशालाओं के साथ की गई थी। इसका उद्देश्य रक्षा के क्षेत्र में शोध को बढ़ावा देना था। उन्होंने कहा कि आज देश मिसाइल, रडार, सेंसर आदि उपकरणों और प्रणालियों के विकास आत्मनिर्भर हो चुका है। सेना को सशक्त बनाने के लिए डीआरडीओ वर्षो से काम कर रहा है। तेजस चौथी पीढ़ी का सुपरसोनिक विमान है।

