मुंबई। महाप्रज्ञ पब्लिक स्कूल कालबादेवी में दिनांक २३/०६/२०२५ को आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी की १०६ वीं पुण्यतिथि मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय के प्रांगण में पुण्यतिथि का भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस उपलक्ष्य में विद्यालय के मुख्य अतिथि गण को सम्मान पूर्वक सभागार तक लाया गया। मुख्य अतिथि के रूप में आचार्य महाप्रज्ञ विद्यानिधि फाउंडेशन के अध्यक्ष श्री कुंदनमल जी धाकड़ , निवर्तमान अध्यक्ष श्री किशन लालजी डागलिया, कार्यअध्यक्ष श्री गणपत लालजी डागलिया, सी.ए. श्री सुमेर सुराना जी, श्री रमेश मेहता जी, मंत्री श्री लक्ष्मी लालजी डागलिया, डॉक्टर श्री एस.के.जैन जी, सभा अध्यक्ष दक्षिण मुंबई श्री सुरेश जी डागलिया , श्री प्रकाश जी कुंडेलिया , सभा मंत्री श्री दिनेश जी धाकड़, युवक परिषद अध्यक्ष श्री गिरीश जी सिसोदिया, सहमंत्री श्री उत्सव जी धाकड़, महिला मंडल अध्यक्षा श्रीमती वनिता जी धाकड़, मंत्री श्रीमती संगीता राठौड़, विद्यालय की निर्देशिका महोदया डॉक्टर श्रीमती वनिता मनसुखानी प्रधानाध्यापिका श्रीमती सरोज माचाड़ो ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कार्यक्रम की शुरुआत नवकार मंत्र से की गई , छात्राओं ने अपने नृत्य प्रस्तुतीकरण से सभागार में भक्तिमय हो गया । यह कार्यक्रम विद्यालय में एक विशेष अवसर पर आयोजित किया गया। विद्यालय महाप्रज्ञ के नाम पर रखा गया है, उन्हीं की पुण्यतिथि पर आयोजित किया गया । आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी का जीवन परिचय (14 जून 1920 – 9 मई 2010) जैन धर्म के श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथ संप्रदाय के दसवें आचार्य थे । आचार्य श्री महाप्रज्ञजी एक संत, योगी , आध्यात्मिक दार्शनिक, लेखक, वक्ता और कवि थे। दीप प्रज्वलन का कार्यक्रम वहां पर उपस्थित सभी मुख्य अतिथि गणों के कर कमलों द्वारा‘असतो मां सदगमय ‘की धुन पर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदीजी के एक छोटे से संभाषण द्वारा की गई जिसमें उन्होंने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी को नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा”तेरापंथ मेरा पंथ बन गया” आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनका जीवन , विचार, चिंतन ,समाज के लिए है मानवता के लिए है।
कक्षा नौवीं की छात्रा युविका ने आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जीवन यात्रा पर प्रकाश डाला और उनकी उपलब्धियो, उनकी पुस्तकों से सभी को अवगत कराया।अपने संभाषण में सभी का अभिवादन किया । तत्पश्चात कक्षा छठी के छात्र-छात्राओं ने मिलकर मंगला चरण नमस्कार महामंत्र के नृत्य द्वारा सभी का मन मोह लिया। डॉ एस. के. जैन सर ने अपने संभाषण में कहा कि आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के सिद्धांतों और आदर्शों को सभी बच्चों तक पहुंचना चाहिए । वे एक महान दार्शनिक थे उन्होंने 300 से अधिक पुस्तकें लिखी। हम सभी उनका वंदन करते हैं उनके आदर्शों पर हम चल सके ऐसी मनोकामना के साथ उन्होंने सभी का अभिवादन किया। तत्पश्चात एक नाटकीय रूपांतरण द्वारा आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के जन्म से लेकर उनके समाधि तक उनके जीवन यात्रा को दर्शाया गया।
श्री एस.के. जैन सर जी ने अपने संभाषण में उन्हें याद करते हुए अपनी कुछ पुरानी यादों को ताजा करते हुए उन्होंने सभी छात्रों के समक्ष उनके जीवन को साझा किया। उन्होंने कहा”यह कार्यक्रम हर साल मनाया जाना चाहिए”। कक्षा चौथी तथा आठवीं के छात्रों ने एक सुंदर गीत को प्रस्तुतिकरण कर के आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी को याद किया जिसके बोल थे “जन्म सदी के परमल हारी है”। दीए की रोशनी द्वारा सभी छात्रों ने मिलकर आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी को श्रद्धांजलि दी उनके द्वारा दिए गए वचनों को दोहराया। श्री प्रकाश जी कुंडेेलिया ने अपने संभाषण से सभी को संबोधित किया । सभी का स्वागत किया , आचार्य श्री महाप्रज्ञ जी के बारे में बताते हुए उन्होंने उनके दर्शन, व्याख्यान के बारे में सभी को अवगत कराया और अंत में सभी का आभार व्यक्त किया।
जिन शासन को समर्पित एक नृत्य प्रस्तुतीकरण द्वारा मंगल हेतु कल्याण सभी बच्चों ने इस भावना के साथ अपने कार्यक्रम का समापन किया। सभागार में उपस्थित सभी मुख्य अतिथि गणों ने समूह चित्र लेकर उस पल को यादगार बना दिया। विद्यालय की निर्देशिका महोदया डॉक्टर वनीता मनसुखानी जी ने अपने भाषण में कहा “आज वे बहुत गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। “विद्यालय को चलाना एक जिम्मेदारी और गौरवपूर्ण बताया ,उन्होंने अपने संभाषण में कहा छात्रों में सभी मूल्यों का नैतिक विकास करना और अनुशासन को महत्वपूर्ण माना । उन्होंने छात्रों से अनुरोध करते हुए आत्म संयम पर जोर देने की बात कही । उपस्थित सभी मुख्य अतिथि गणों का सम्मान पूर्वक आदर सत्कार किया गया। अंत में कार्यक्रम का समापन करते हुए कार्यक्रम संचालन की बागडोर संभाले हुए कक्षा दसवीं की जिया और तृषा ने सभी को धन्यवाद दिया कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम को विराम दिया गया।

