नासिक:इंडियन आर्मी का तीन दशक पुराना इंतजार शुक्रवार को खत्म हो गया। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की मौजूदगी में नासिक के देवलाली तोपखाने केंद्र पर ‘K9 वज्र और M777 होवित्जर’ तोपों को सेना में शामिल किया गया। इस दौरान इनका एक डेमो भी किया गया। इस दौरान यहां सेना प्रमुख बिपिन रावत भी मौजूद थे।
रक्षा मंत्री ने शुक्रवार सुबह ही ट्वीट कर कहा था – , ‘आज 155 mm M777 A2 अल्ट्रा लाइट होवित्जर आधुनिक गन सिस्टम्स को सेना में शामिल किया जाएगा। इस मीडियम तोप को आसानी से दुर्गम पहाड़ी इलाकों में भी तैनात किया जा सकता है। 2006 से इसे लेकर बातचीत चल रही थी और पिछले तीन साल के अंदर इसे मुकाम तक पहुंचाया गया।’
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, ‘के. 9 वज्र को 4,366 करोड़ रूपये की लागत से शामिल किया जा रहा है। यह कार्य नवंबर 2020 तक पूरा होगा। कुल 100 तोपों में 10 तोपें प्रथम खेप के तहत इस महीने आपूर्ति की जाएगी। अगली 40 तोपें नवंबर 2019 में और फिर 50 तोपों की आपूर्ति नवंबर 2020 में की जाएगी। के. 9 वज्र की प्रथम रेजीमेंट जुलाई 2019 तक पूरी होने की उम्मीद है।
थल सेना ”145 एम 777 होवित्जर की सात रेजीमेंट भी बनाने जा रही है। मंत्रालय के मुताबिक सेना को इन तोपों की आपूर्ति अगस्त 2019 से शुरू हो जाएगी और यह पूरी प्रक्रिया 24 महीने में पूरी होगी। प्रथम रेजीमेंट अगले साल अक्टूबर तक पूरी होगी।
K-9 में क्या है खास
– इस तोप की मारक क्षमता 28-30 किमी है जो 30 सेकेंड में 3 गोले दाग सकती है।
– यह पहली ऐसी तोप है जिसे इंडियन प्राइवेट सेक्टर ने बनाया है।
– यह तोप तीन मिनट में 15 राउंड की भीषण गोलाबारी कर सकती है और 60 मिनटों में लगातार 60 राउंड की फायरिंग भी कर सकती है।
M777 होवित्जर तोप की विशेषता
– यह तोप भी 30 किलोमीटर तक मार कर सकती है।
– इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे हेलीकॉप्टर और प्लेने के माध्यम से मनचाही जगह पर ले जाया जा सकता है।
– इस समय इस तोप का इस्तेमाल अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे लोग कर रहे हैं।
सीमा पर और मजबूत होगी भारत की स्थिति
पाकिस्तान और चीन की सीमा पर मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर इस तोप की जरूरत काफी समय पहले से महसूस की जा रही थी। आखिरी बार भारतीय सेना में बोफोर्स तोप को शामिल किया गया था।
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