सुरभि सलोनी डेस्क, लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कम नामांकन और शिक्षकों की कमी के चलते लगभग 5000 सरकारी स्कूलों को बंद करने या पड़ोसी स्कूलों में विलय करने का फैसला लिया है। इस निर्णय ने शिक्षा क्षेत्र में हलचल मचा दी है, और शिक्षक संगठनों ने इसका तीव्र विरोध शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, यह कदम केंद्र सरकार की नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत स्कूलों के संसाधनों को समेकित करने और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की शिक्षा पर गंभीर असर पड़ेगा।
उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग ने हाल ही में एक समीक्षा बैठक में पाया कि राज्य में 27,764 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 50 से कम छात्र हैं। इन स्कूलों को बंद करने या नजदीकी स्कूलों में विलय करने की योजना है। इसके अलावा, 970 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी स्थायी शिक्षक नहीं है, और 5,659 स्कूल केवल एक शिक्षक के सहारे चल रहे हैं। शिक्षा निदेशक कंचन वर्मा ने 23 अक्टूबर 2024 को ब्लॉक स्कूल प्रशासकों (BSAs) को निर्देश दिए कि वे इन स्कूलों के विलय की प्रक्रिया शुरू करें और 14 नवंबर 2024 तक अपनी रिपोर्ट सौंपें।
उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी लंबे समय से एक गंभीर समस्या रही है। 2021 के यूनेस्को की स्टेट ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश और बिहार में अकेले 5 लाख शिक्षक पद खाली हैं। प्राथमिक स्कूलों में 77% शिक्षक पद और उच्च प्राथमिक स्कूलों में 40% पद रिक्त हैं। दिसंबर 2018 के बाद से कोई नई स्थायी शिक्षक भर्ती नहीं हुई है, और ठेके पर रखे गए शिक्षकों की नियुक्ति ने आरक्षण नीतियों पर भी सवाल उठाए हैं।
प्रयागराज जैसे शहरों में स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कई स्कूल एकमात्र शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। उदाहरण के लिए, झलवा के कांशी राम आवास योजना के सरकारी स्कूल में 177 बच्चों को केवल एक शिक्षक पढ़ाता है। इसी तरह, राजापुर के एक स्कूल में 151 बच्चों के लिए एक शिक्षक और ग्यासुद्दीनपुर के स्कूल में 106 बच्चों के लिए एक शिक्षक उपलब्ध है। कुछ स्कूलों में तो कोई स्थायी शिक्षक ही नहीं है, और अन्य स्कूलों के शिक्षकों को अस्थायी रूप से जोड़ा गया है।
शिक्षा तक पहुंच में कमी: कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को बंद करने से बच्चों को दूर-दूर तक स्कूल जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां परिवहन सुविधाएं सीमित हैं, यह बच्चों, खासकर लड़कियों, के लिए शिक्षा तक पहुंच को और कठिन बना सकता है। आज़म प्रेमजी फाउंडेशन की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार, 70% ग्रामीण परिवारों ने स्कूलों की दूरी और सुरक्षा चिंताओं को लड़कियों की पढ़ाई छोड़ने का प्रमुख कारण बताया।
शिक्षक पदों पर असर: स्कूलों के विलय से शिक्षकों की आवश्यकता कम हो सकती है, जिससे मौजूदा शिक्षकों के पद खतरे में पड़ सकते हैं। शिक्षक संगठनों का कहना है कि इससे 50,000 शिक्षक पद खत्म हो सकते हैं।
निजी स्कूलों की ओर रुझान: सरकारी स्कूलों की संख्या में कमी और गुणवत्ता में गिरावट के कारण अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में भेजने को मजबूर हो रहे हैं। 2014-15 से 2023-24 के बीच उत्तर प्रदेश में निजी स्कूलों की संख्या में 24.96% की वृद्धि हुई, जबकि सरकारी स्कूलों में 15.5% की कमी आई।
शिक्षक संगठनों ने इस फैसले का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि स्कूलों को बंद करने से पहले शिक्षकों की भर्ती और स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए। यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ ने आंदोलन की चेतावनी दी है और मांग की है कि सरकार तत्काल शिक्षक भर्ती शुरू करे। संगठनों का यह भी कहना है कि स्कूलों को बंद करने का निर्णय नई शिक्षा नीति 2020 का दुष्प्रभाव है, जिसके तहत कम संसाधनों को समेकित करने पर जोर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश सरकार का तर्क है कि कम नामांकन वाले स्कूलों को बंद करने से संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। सरकार का कहना है कि इन स्कूलों के बच्चों को नजदीकी स्कूलों में स्थानांतरित किया जाएगा ताकि उनकी पढ़ाई बाधित न हो। इसके अलावा, सरकार ने ऑपरेशन कायाकल्प के तहत 1.36 लाख स्कूलों का कायाकल्प किया है और 1.64 लाख शिक्षकों की पारदर्शी नियुक्ति का दावा किया है। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि ये प्रयास अपर्याप्त हैं और शिक्षक भर्ती में देरी से समस्या और गंभीर हो रही है।
उत्तर प्रदेश में 5000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद करने का यह फैसला बहुत ही गलत फैसला है, जिसका तीव्र विरोध होना चाहिएष इससे उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों की कमी और स्कूलों के विलय से ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों, खासकर गरीब और लड़कियों, की शिक्षा तक पहुंच सीमित हो सकती है। सरकार को इस दिशा में संतुलित और समावेशी नीतियां अपनाने की जरूरत है ताकि शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत हर बच्चे को मुफ्त और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित की जा सके।
उत्तर प्रदेश में 5000 से अधिक सरकारी स्कूलों को बंद करेगी योगी सरकार
Highlights
- शिक्षकों की कमी की वजह से शिक्षा व्यवस्था पर संकट
- ग्रामीण शिक्षा पर पड़ेगा गंभीर असर, शिक्षक संगठनों का तीव्र विरोध

