ठाणे। चातुर्मास की परिसपन्नता के पश्चात एवं गुरु इंगितानुसार तेरापंथ धर्म संघ के सूर्य आचार्य महाश्रमण जी की प्रबुद्ध शिष्या साध्वी श्री अणिमा श्री जी, साध्वी श्री मंगल प्रज्ञा जी एवं साध्वी वृन्द का हुबली की धरा पर मर्यादा महोत्सव के तहत विराजमान आचार्य श्री महाश्रमण जी के श्री चरणों में पहुँचे। इस भव्य मंगल मिलन समारोह का साक्षी मुम्बई का सम्पूर्ण तेरापंथ समाज बना।
इस अवसर पर चरित्रात्माओं ने श्री चरणों में गीतिका के माध्यम से अपने भाव व्यक्त किये और गुरुदेव का सुख साता पूछा। गुरुदेव ने संतियों के भावों को देखते हुए उनके प्रति मंगल कामना व्यक्त किया। इस मौके पर साध्वी श्री लावण्य जी भी साध्वी वृन्द के साथ गुरुदेव के दर्शन प्राप्त किये। श्री चरणों में पहुंचकर सभी चरित्रात्माओं ने अपने आप को सौभाग्यशाली कहा, साथ ही लंबे अरसे से श्री चरणों से दूर रहने के बाद मिले दर्शन से सभी के चेहरों पर जो चमक थी उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
साध्वी श्री अणिमा श्री जी ने कहा कि गुरुदेव आपकी कृपा से हमारा करीब 700 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा ठाणे तेरापंथ समाज एवं मुम्बई के अलग-अलग इलाकों के श्रावकों की रास्ते की सेवा की वजह से सफल और सुखदायी रहा। करीब चार साल बाद आप के दर्शन पाकर हम सभी साध्वियां कृतार्थ हो गईं। आपश्री के आशीर्वाद से आपके हर इंगिता की आराधना करने की पूरी कोशिश हमने की। इस दौरान हमसे कोई गलती हुई हो तो उसके लिए हम सभी क्षयाचना करते हैं।
इस अवसर पर ठाणे सभा अध्यक्ष देवीलाल श्री श्रीमाल एवं मंत्री जयंतीलाल बरलोटा के नेतृत्व में भारी संख्या में ठाणे, बांद्रा, दादर, भायंदर, खोपोली से श्रावकों को उपस्थिति रही। जय जय ज्योति चरण के जय घोष के साथ चरित्रात्माओं का गुरुदेव के समक्ष प्रांगण में पदार्पण हुआ। इससे पहले जैन आश्रय से भव्य अहिंसा रैली निकाली गई। जिसमें भारी संख्या में श्रावकों ने हिस्सा लिया। यह रैली 3 किलोमीटर से भी ज्यादा की दूर तक लंबी थी।
चरित्रात्माओं का गुरुदेव के श्री चरणों में पधारना अपने आपमें अद्भुत क्षण थे। गुरुदेव द्वारा सभी सतियों का सहजता से सुख साता पूछना और उन्हें मोटिवेट करना, गुरु की विनम्रता दिखाती है कि उनका उनका शिष्यों के प्रति कितना प्रेम हैं।
सभी चरित्रात्माओं ने साध्वी प्रमुखा साध्वी श्री कनक प्रभा जी के दर्शन कर अपने भावों को व्यक्त किया। वहीं सभी श्रावकों ने मुख्य मुनि महावीर कुमार जी, मुनि श्री कमल कुमार जी, मुनि श्री जीनेश कुमार जी, मुनि श्री कुमारश्रमण जी, मुनि श्री विश्रुत कुमार जी, मुनि श्री दिनेश कुमार जी आदि संतों की दर्शन सेवा का लाभ लिया। साथ ही देवीलाल श्री श्रीमाल, भरत श्रीश्रीमाल, अपूर्वा श्रीश्रीमाल एवं अभिषेक बाफना ने गुरु धारणा ली। भरत श्रीश्रीमाल ने कहा कि पहली बार गुरुदेव के इतने निकट जाने का अवसर प्राप्त हुआ। मानो एक अलग सी ऊर्जा का संचार मुझमें हुआ हो। गुरुधारणा प्राप्त करने के बाद जीवन जीने की सही दिशा प्राप्त हुई हो। ठीक इसी तरह के भाव अपूर्वा श्री श्रीमाल के भी थे।
″ सभा अध्यक्ष देवीलाल श्रीश्रीमाल और मंत्री जयंतीलाल बरलोटा ने कहा कि ठाणे तेरापंथ भवन में चातुर्मास के पश्चात गुरु इंगितानुसार हमारी जिम्मेदारी थी कि ठाणे से हुबली तक की रास्ते की सेवा सफलता पूर्वक सम्पन्न हो। जिस पर ठाणे की सभी परिषदों, महिला मंडल, कन्या मंडल और किशोर मंडल के साथ-साथ ठाणे तेरापंथ समाज एवं मुम्बई के अलग अलग इलाकों के श्रावकों के सहयोग से सफलता मिली। श्रीश्रीमाल ने गुरुदेव से निवेदन किया कि हर साल ठाणे को चातुर्मास फरमाएं, क्योंकि ठाणे का क्षेत्र बहुत बड़ा है तथा यहां के लोगों में धर्म के प्रति जुड़ाव व जानने-समझने की काफी जिज्ञासा है। अब तो यहां का तेरापंथ भवन भी तैयार हो चुका है। ऐसे में यहां चातुर्मास का श्रावक-श्राविकाओं को काफी लाभ मिलेगा।″

