लगभग 9 कि.मी. का विहार के महातपस्वी श्री महाश्रमण पहुंचे यूडीकेरी
पूज्यवर ने किया मोक्ष के बाधक तत्वों का विवेचन
10-02-2020, सोमवार, यूडीकेरी, कर्नाटक। अहिंसा यात्रा प्रणेता जैन धर्म के प्रभावक आचार्य श्री महाश्रमण जी अपनी धवल सेना के साथ आज लगभग 9 किलोमीटर विहार कर यूडीकेरी स्थित एस. आर. हाई स्कूल में पधारे। इससे पूर्व पूज्यवर ने करिकट्टी से मंगल विहार किया। आज के विहार में आरोह-अवरोह से भरे मार्ग पर भी तेज हवाएं थकावट को दूर कर रही थी। मार्ग में अनेक ग्रामीणों ने पूज्य प्रवर के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
विद्यालय में प्रवचन सभा में शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा – धार्मिक जगत में मोक्ष की बात आती है। साधना का साध्य मोक्ष होता है। मोक्ष वह स्थिति है जहां केवल आत्मा होती है। शुद्ध ज्योतिर्मय, निरामय आत्मा अवस्थित होती है। एक बार जो मोक्ष में पहुंच गया वह जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। साधु साधना करते हैं। मूल लक्ष्य यही होता है कि मोक्ष को प्राप्त करें, सर्व दुखों से मुक्त बने।
आचार्यवर ने आगे मोक्ष के बाधक तत्वों की चर्चा करते हुए फरमाया कि जो प्रकृति से चंड होता है, क्रोधी होता है, वह मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता। अध्यात्म के क्षेत्र के साथ-साथ इस जीवन के लिए क्रोध अच्छा नहीं होता। अगर समस्याओं से बचना है तो आक्रोश नहीं करना चाहिए। हम उसके शमन का प्रयास करें। गुस्सा करने वाला व्यक्ति बड़ा नहीं बनता क्षमा से बनता है। दूसरा जो बाधक तत्व है वह है अभिमान। जो बुद्धि-ऋद्धि का अभिमान करता है वह भी मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता। अभिमान बढ़िया नहीं होता उसे मदिरा के समान कहा गया है। जैसे मदिरा से व्यक्ति उन्मत्त हो जाता है वैसे ही घमंड में आदमी को भान नहीं रहता। हम बुद्धि का अभिमान नहीं बल्कि उसका अच्छा उपयोग करे। और एक तत्व की व्याख्या करते हुए पूज्यवर ने कहां की जो अनुशासनहीन होता है वह भी मोक्ष को प्राप्त नहीं कर सकता। उद्दंडता अच्छी नहीं होती। व्यक्ति आत्मानुशासन का प्रयास करें। अपने आपको इन प्रकार के बाधक तत्वों से दूर कर के व्यक्ति मोक्ष की ओर बढ़ सकता है।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक शिवानंद हुम्बी ने गुरुदेव का स्वागत किया। अहिंसा यात्रा प्रणेता की प्रेरणा से स्थानीय ग्रामवासियों ने अहिंसा यात्रा के तीनों संकल्प स्वीकार किए।

