सूरत {गुजरात}विकास धाकड़/ शब्द शक्ति का विवेक से उपयोग करें,वाणी संयम दिवस के अवसर पर पर्युषण पर्व आराधक श्रावक-श्राविका परिवार को उद्बोधित करते हुए प्रोफेसर साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ने कहा-शब्द शक्ति के बिना व्यक्ति का व्यवहार नहीं चलता। अपेक्षा हे इस शक्ति का उपयोग कैसे करें। परिवार समाज की अधिकतर समस्याओं का कारण वाणी है। यदि मर्यास उत्लब होता है वाणी विवेक की जरूरत है। पर्युषण का पीरियड प्रशिक्षण देता है। हर व्यक्ति चिन्तन करें उसे क्यों? कब? कहाँ ? क्या और कैसे बोलना चाहिए। सच यह है क्योंकि मूर्ख बोलकर सोचता है, ज्ञानी सोच कर बोलता है। बोलने की कला सीखनी चाहिए।
साध्वी वृन्द ने “पाषाण बन गया भगवान” की प्रेरक प्रस्तुति दी। साध्वी शौर्य प्रभा ने वाणी संयम का महत्व बताते हुए अनेक टिप्स दिए। साध्वी सुदर्शन प्रभा, साध्वी अतुलयशा साध्वी राजुल प्रभा साध्वी डॉ चैतन्य प्रभा और साध्वी डॉ शौर्यप्रभा जी ने सामूहिक संगान किया। प्रोफेसर साध्वी श्री मंगलप्रज्ञा जी ने भगवान महावीर के मरीचि विश्वविभूति आदि भवों की श्रृंखला का उल्लेख करते हुए त्रिपृष्ठ के भव का विस्तृत चित्रण किया।
इस अवसर पर जिला राजसमन्द, भीलवाड़ा,चित्तौड़गढ़ उदयपुर के निवासी सूरत प्रवासी श्रावक-श्राविका समुदाय ने मेवाड़ी गौरव – आचार्य भिक्षु. भारीमल जी, शोभजी श्रावक, महाराणा प्रताप और मीरा बाई जेसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए मनहर सुस्वर में संगान किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन साध्वी शौर्य प्रभा जी ने किया।
सूरत {गुजरात} पर्युषण पर्व का चतुर्थ दिन -वाणी संयम दिवस.!

