कुर्ला (मुंबई)। तेरापंथ समाज विद्याविहार ने आज आचार्य श्री महाश्रमण की शिष्या शासनश्री साध्वी कंचनप्रभा , शासनश्री साध्वी श्री मंजूरेखा व अन्य साध्वी वृन्द के सानिध्य में मृतभोज रूपी कुरीति पर कठोर प्रहार करते हुए श्रावक समाज में जागरूकता फैलाते हुए समाज के सभी श्रावकों के लिए संदेश दिया , साध्वी श्री ने मृत्यु निमित्त शोक सभा में संगीत वाद्यों का प्रयोग , गायन का उपयोग, समान वेशभूषा पहनना इसे प्रसंग की स्थिति को देखते हुए आनावश्यक क्रिया बताया ।
साध्वी श्री ने अपने मंगल उद्बोधन में शोक सभा के आयोजन के समय पर भी चिंता व्यक्त की साध्वी श्री ने 2-3 घंटे चलने वाली शोकसभा को भी समाज के लिए अनावश्यक बताया वो इन कुरीतियों से बचने को कहा। यह नई व में अनावश्यक प्रवृति के समाज में घर कर रही है। साध्वी श्री ने उपस्थित श्रावक श्राविकाओं को प्रेरणा देते हुए यह संकल्प करवाया कि मृत्युभोज निम्मित भोजन नहीं करेंगे।
नई पहल की सामाजिक क्रांति की शुरुवात विद्याविहार कुर्ला से हो रही हे राजू अलबेला , उतम कोठारी, जीतू मादरेचा, भरत चौधरी, जीतू कोठारी, महेंद्र मेहता, सुनील सांखला, महिला मंडल कुर्ला अध्यक्ष शोभा मादरेचा व साथ में कुर्ला के विशिष्ट श्रावक श्राविकाएं उपस्थित थी।
शासन श्री साध्वी श्री कंचनप्रभा की एक पहल, आडंबर मुक्त समाज
Highlights
- नीलकंठ किंगडम विद्याविहार, कुर्ला से एक नई सोच और एक नए कदम का आगाज

