मुंबई। सायन कोलीवाड़ा में शासन श्री साध्वी कैलाशवतीजी के सानिध्य में प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आयोजन किया गया। आचार्य श्री महाप्रज्ञ जीकी जन्म शताब्दी पर प्रेक्षा ध्यान कार्यशाला में साध्वी श्री जी ने उद्बोधन देते हुए कहा- ध्यान का अर्थ है एकाग्रता। हमारे अंतिम तीर्थंकर भगवान महावीर ने साढे बारह वर्ष तक साधना की जिसमें ध्यान का काल अधिक रहा।दो-चार-दस दिन तक दिन-रात खड़े-खड़े ध्यान किया। ध्यान से व्यक्ति उर्जा को प्राप्त करता है। ध्यान जीवन का प्राण है।
साध्वी श्रीपंकज जी ने कहा- जो स्थान शरीर में मेरुदंड का है वही स्थान धर्म में ध्यान का है। स्वामी रामकृष्ण परमहंस ने कहा था जितने मार्ग है सभी उस मंजिल तक पहुंचने का प्रयत्न करते हैं। ध्यान से रहित कोई भी धर्म अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सकता। मंत्र व जप ध्यान के साथ ही फलदाई बन सकता है। साध्वी ललिता श्री जी ने इस अवसर पर समय विसर्जन किया । साध्वी शारदा प्रभाजी नेअंतर यात्रा का प्रयोग करवाते हुए कहा पत्थर में सोना और काठ में अग्नि बिना प्रयोग के प्रगट नहीं होती है वैसे ही ध्यान के बिना आत्मा का दर्शन नहीं होता साध्वी सम्यक्तव यशा जीने कायोत्सर्ग का प्रयोग करवाया। प्रेक्षा प्रशिक्षक निवर्तमान मुंबई कन्या मंडल प्रभारी मीना जी कच्छारा ने प्रेक्षा ध्यान का प्रयोग करवाया। और प्रेक्षा प्रशिक्षण बनने के लिए कहा। तेयुप के अध्यक्ष अविलेश जी डांगी ने अपने विचार रखे। मंत्री सुनील जी कोठारी शैलेशजी दुग्गड सहसंयोजिका सरिता जी ढालावत तरुणा जी कोठारी का विशेष सहयोग रहा। संयोजिका सीमा जी सोनी ने आभार व्यक्त किया।
सायन-कोलीवाड़ा में प्रेक्षाध्यान कार्यशाला का आयोजन

