बैंग्लोर। जैन विश्व भारती द्वारा पूर्वअध्यक्ष रमेश जी बोहरा, व्यवस्था समिति अध्यक्ष मूलचंद जी नाहर, महामंत्री दीपचंद जी नाहर, मुंबई से महावीर जी कोठारी, गौतम जी कोठारी, बिंदु जी रायसोनी उपस्थित थे ।
अपने आशीर्वचन में परम पूज्य ने फ़रमाया की साधुत्व प्राप्त होना वर्तमान जीवन की ही नही आत्मा की अनंतक़ालीन यात्रा की बहुत बड़ी उपलब्धि होती है, साधु जीवन एक पवित्र जीवन होता है, उसमें साधनाजन्य अनेक अनुभव भी हो सकते है।
शासनश्री साध्वी नगीनांजी हमारे धर्मसंघ की एक अग्रगण्य साध्वी थी, उन्होंने लम्बी यात्राएँ की थी, वे साध्वी भत्तूजी के साथ वर्षों तक रही थी, वे एक अच्छी वक्ता थी, उन्होंने अनेक रूपों में अपनी सेवाएँ दी, उनकी आत्मकथा “आत्मदर्पण” अध्यात्म के प्रति समर्पण की प्रेरणा देने वाली बने यह मंगलकामना।
साध्वी प्रमुखा श्री जी ने फ़रमाया की साध्वी नागिनां श्री जी ने अपने पुरुषार्थ के बल पर धर्मसंघ में अपनी सशक्त पहचान बनायी है दीक्षा के समय वे ज़्यादा पढ़े लिखे नही थे और ज़्यादा चोखले में भी नही रहे और गुरु कृपा रही गुरु ने उन्हें साध्वी भत्तूजी को सौंपा जिन्होंने उनको पढ़ने का अवकाश दिया इतना सिखाया इतनी यात्राएँ की अपने धर्म संघ की वे दीप्त साध्वी बन गयी।
साध्वी श्री नगीना श्री जी की पुस्तक “आत्मदर्पण “ का लोकार्पण

