वसई। जो दो हाथों से दान देते हैं विधाता उनकी हजार हाथों से झोलियां भरता है। अगर आप रोज दान देंगे तो बहुत जल्दी धनवान भी बन जाएंगे। दान देने से रुपए कम होते हैं पर लक्ष्मी की कृपा दुगनी बरसती है। जैसे धरती में एक बीज बोया जाए तो प्रकृति हजार गुना लौटाती है, वैसे ही दान और कुछ नहीं, समृद्धि पाने का इन्वेस्टमेंट है। जो कई गुना होकर वापस लौट आता है।
ये विचार जैन साध्वी विश्ववंदना ने श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ मेवाड़, वसई में श्रावको के बीच व्यक्त किए। उन्होंने कहा याद रखें परोपकार से बढ़कर कोई पुण्य नहीं है और पीड़ा से बढ़कर कोई पाप नहीं। जैसे बिना डॉक्टर का अस्पताल, बिना मूर्ति का मंदिर, बिना ब्रेक की गाड़ी, बिना पैसे का पर्स, बिना पानी की नदी बेकार है, वैसे ही परोपकार बिना जीवन बेकार है। अगर हम यहां किसी का अच्छा कर रहे होते हैं तो मान कर चलिए ऊपर वाला हमारे लिए भी अच्छा कर रहा होता है।
देंगे तो सब करेंगे याद
साध्वी ने उपस्थित श्रावको से कहा कि अगर आप अपनी सारी संपत्ति संतानों के लिए छोड़कर जाएंगे तो आपको दो लोग याद करेंगे, पर आप जनता के लिए कुछ करके चले जाओगे तो आपको हजारों लोग याद करेंगे। जिसके पास “भेजा” होता है वह कमाना जानता है ।जिसके पास कलेजा होता है वही लगाना जानता है। सूरज हमें रोशनी देता है, हम भी तो कुछ देना सीखे। जो कुछ हमें मिला है प्रभु से, उसे बांटकर खाना सीखे। अगर आपके पास दो रोटी है और खाने वाले 4 हैं तो मिल बांट कर खाने का आनंद लीजिए।
रुकावट ओं का समाधान है दान
इस मौके पर साध्वी परमेष्ठी वंदना ने कहा कि अगर आपके ऊपर ग्रह गोचर भारी है तो रोज दो रोटी गुड के साथ गौ माता को खिलाइए। आपके सारे ग्रह अनुकूल हो जाएंगे। अगर आपको दुश्मनों से डर लगता है तो कुत्ते को दूध के साथ रोटी खिलाए, अगर आप धन की आवक बढ़ाना चाहते हैं तो रोज पक्षियों को ₹10 के दाने डालिए या किसी मटके या कुंडे में पानी डालकर छत पर रख दीजिए ।अगर आप के ऊपर कोई कर्ज है तो उसे उतारना चाहते हैं तो रोज कीड़ी नगरा सींच कर आ जाइए ,आमदनी के नए रास्ते खोलने हैं तो मछलियों को आटे की गोलियां खिलाईये, आपके जीवन में कोई भी रुकावट आ रही है ,आप दान धर्म कीजिए सारे समाधान स्वत होते जाएंगे।
उत्तम वस्तुओं का दान करें
उन्होंने कहा दान के अनेक प्रकार है अन्नदान ,वस्त्रदान, ज्ञानदान ,रक्तदान ,नेत्रदान, श्रमदान आदि ।जब भी दान दें तो पुरानी खराब ,गंदी ,बिना काम की, वस्तुएं देने की बजाय उत्तम, श्रेष्ठ ,नई और ताजी वस्तुओं का दान करें ।ताकि हमें उत्तम परिणाम प्राप्त हो सके। प्रवचन के दौरान उन्होंने नगर के गरीब और जरूरतमंद लोगों को निशुल्क भोजन करवाने के लिए केंद्र खोलने के लिए भीश्रावको से आग्रह किया।

